पटना स्नातक चुनाव: छोटे सरकार की चुनौती, नीरज की प्रतिष्ठा; कौन किस पर भारी?

  • September 22, 2026
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पटना स्नातक चुनाव में अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक टकराव

पटना स्नातक चुनाव में आमने-सामने JDU के दो नेता

बिहार की सियासत में एक बार फिर ऐसा मुकाबला चर्चा में है, जिसने जनता दल यूनाइटेड के भीतर की राजनीति को गरमा दिया है। एक तरफ हैं मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह…और दूसरी तरफ हैं JDU के वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद नीरज कुमार। दोनों नेता एक ही पार्टी से जुड़े हैं, दोनों का बिहार की राजनीति में अपना प्रभाव है और दोनों भूमिहार समाज से आते हैं। लेकिन इस वक्त दोनों आमने-सामने हैं। मामला है बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट के चुनाव का, जहां नीरज कुमार JDU के उम्मीदवार हैं। और अनंत सिंह ने खुलकर नीरज कुमार के समर्थन से इनकार कर दिया है। इतना ही नहीं… अनंत सिंह ने उन्हें चुनाव में हराने की चुनौती तक दे दी है। रिपोर्टों के मुताबिक अनंत सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन का ऐलान किया है। अब सवाल है—

आखिर JDU के इन दो नेताओं के बीच इतनी तल्खी क्यों है?

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच मुकाबले की तारीख तय

नेता दोनों ही जेडीयू के हैं. एक विधायक और एक एमएलसी. विधायक अनंत सिंह हैं, एमएलसी नीरज कुमार. लेकिन दोनों के बीच टकराव एकदम दो कट्टर विरोधियों जैसा है. इस टक्कर की तारीख आ गई है. दरअसल पटना-मोकामा का पुराना झगड़ा फिर से गर्म हुआ पड़ा है. मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह और जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार इस 23 अक्टूबर को सियासी मैदान में आमने-सामने होंगे। बिहार के छोटे सरकार अनंत सिंह इस विवाद से सीधे नहीं जुड़े हैं. लेकिन बिहार ब्रांड की राजनीति जहां सिपहसालारों के जोर पर सत्ता हासिल की जाती है और कायम रखी जाती है वहां अनंत सिंह ने एमएलसी के इस चुनाव को अपनी मूंछ की लड़ाई बना ली है।

इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि अनंत सिंह खुद पटना स्नातक सीट से उम्मीदवार नहीं हैं। इसके बावजूद उन्होंने जिस तरह नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला है, उसने चुनाव को JDU के लिए अतिरिक्त चुनौती बना दिया है। अनंत सिंह का प्रभाव मुख्य रूप से मोकामा और उसके आसपास के इलाकों में माना जाता है। अनंत सिंह की राजनीति दबंगई और बाहुबल के आधार पर चलती है। सवाल यह है कि उनका यह प्रभाव स्नातक मतदाताओं के बीच कितनी दूर तक राजनीतिक समर्थन में बदल पाता है। यही कारण है कि इस चुनाव में अनंत सिंह की भूमिका को केवल एक समर्थक की भूमिका के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। उनका वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि वह अपने प्रभाव वाले इलाकों में कितने मतदाताओं को किसी खास उम्मीदवार के पक्ष में लामबंद कर पाते हैं।

अनंत सिंह ने नीरज कुमार पर लगाए आरोप

वही अनंत सिंह ने नीरज कुमार पर पुराने विवादों को लेकर कई आरोप लगाए हैं और नार्को टेस्ट की चुनौती तक दी है। दूसरी ओर नीरज कुमार ने पलटवार करते हुए कहा है कि आरोपों के सबूत हैं तो अदालत का रुख किया जाना चाहिए। नार्को टेस्ट को लेकर भी नीरज कुमार ने कहा कि इसका फैसला अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है।

आपको बता दे की इस वक्त जेडीयू नेता नीरज कुमार पटना ग्रेजुएट सीट से MLC हैं. उनका कार्यकाल 16 नवंबर को खत्म होने वाला है. टीवी चैनलों और मीडिया पर जेडीयू का पक्ष रखने वाले नीरज कुमार ने इस सीट से फिर दावेदारी ठोक दी है. लेकिन इस सीट में अच्छा खासा होल्ड रखने वाले अनंत सिंह ने कह दिया है कि वे नीरज कुमार को सपोर्ट नहीं करेंगे। इस सीट के लिए उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह को अपनी पसंद बताया है. अनुज कुमार सिंह नवादा के हैं और जन सुराज से चुनाव लड़ चुके हैं. तो अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के नीरज कुमार को क्यों सपोर्ट नहीं कर रहे हैं, इस अदावत की कहानी हम आगे बताएंगे।

2015 से शुरू हुई अनंत सिंह और नीरज कुमार की अदावत

दरसल नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच घमासान कोई आज का नहीं है। वक्त के साथ जरूर इन दोनों के बीच मतभेद का दायरा बड़ा होता गया। हालांकि इस विरोध की पटकथा तो वर्ष 2015 में लिखी जानी शुरू हुई थी। वो तब का वक्त था जब बिहार में महागठबंधन की सरकार थी और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री जबकि तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री थे। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच जंग की शुरुआत 24 जून 2015 को हो गई थी, जब बाढ़ के पुटुस हत्याकांड में विधायक अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई। चर्चा यह है कि इस गिरफ्तारी के जरिए अनंत सिंह के विरुद्ध माहौल बनाया गया। नीतीश कुमार ने भी उस माहौल को स्वीकार किया और नवंबर 2015 में विधानसभा चुनाव हुआ तो मोकामा सीट से अनंत सिंह को टिकट कटवा दिया गया।

इस टिकट कटवाने का आधार नीरज कुमार को इसलिए मान लिया गया क्यूंकि नीतीश ने नीरज कुमार को टिकट दिया। हालांकि अनंत सिंह जेल से ही निर्दलीय चुनाव लड़े और नीरज कुमार को 18,348 वोटों के अंतर से हरा दिया। सबसे बड़ा मामला 2019 का AK 47 वाला है. पुलिस ने अनंत सिंह के पैतृक घर लदमा में छापा मारा और AK 47 राइफल के साथ गोला-बारूद बरामद किया. अनंत सिंह सीधा आरोप लगाते हैं कि नीरज कुमार की साजिश से उनके घर में हथियार रखवाया गया और उन्हें जेल भिजवा दिया गया।

JDU में वापसी के बाद भी जारी रही जुबानी जंग

कहा जाता है कि राजनीति संभावनाओं का खेल है। घूम फिर कर अनंत सिंह जदयू में आ गए। पर नीरज सिंह ने उनके जदयू में आगमन का नोटिस नहीं लिया, स्वागत तो दूर की बात। यह भी अनंत सिंह को अखर गई। इसे तब केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का प्रभाव माना गया। लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह ने ललन सिंह का भरपूर समर्थन किया। लेकिन बाद तब बिगड़ी जब नीरज कुमार को प्रचार करने के संदर्भ में जब पत्रकारों ने पूछा कि अनंत सिंह का प्रचार करने जायेंगे न? तब उनका जवाब आया कि ‘हम आपराधिक चरित्र वाले व्यक्ति के समर्थन में चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। इस वक्तव्य से भी अनंत सिंह नाराज हुए। और तब से लेकर आज तक दोनों नेताओं के बिच जुबानी जंग जारी है।

पटना स्नातक चुनाव की तारीखें और आगे की चुनौती

गौरतलब है की MLC चुनाव के लिए नोटिफिकेशन 29 सितंबर को जारी किया जाएगा, जबकि नॉमिनेशन भरने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है. नॉमिनेशन की जांच 7 अक्टूबर को होगी और उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक अपना नॉमिनेशन वापस ले सकते हैं. वोटिंग 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगी और वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी।

तो पटना स्नातक चुनाव में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अनंत सिंह का विरोध कितना व्यापक है। क्या यह मोकामा और आसपास के इलाकों तक सीमित रहेगा या पटना और नवादा के स्नातक मतदाताओं के बीच भी इसका असर दिखाई देगा? नीरज कुमार के सामने दूसरी चुनौती अपने पुराने नेटवर्क को सक्रिय रखने की होगी। वहीं JDU के सामने चुनौती यह होगी कि पार्टी का संगठन संभावित आंतरिक असहमति के बावजूद कितनी मजबूती से एक उम्मीदवार के पीछे खड़ा रहता है। फिलहाल इतना जरूर है कि पटना स्नातक सीट ने JDU के भीतर की सियासी हलचल को सार्वजनिक बहस में ला दिया है।