पोटेशियम नाइट्रेट मिलाते समय हुआ जोरदार धमाका
राजस्थान के नागौर जिला मुख्यालय स्थित बड़ली आवासीय क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक अवैध और अनधिकृत पटाखा गोदाम में कानफोड़ू धमाका हो गया। धमाका इतना भयानक और विध्वंसकारी था कि पूरा इलाका दहल उठा और आसपास के मकानों की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए। हादसा सुबह करीब 9:40 बजे उस समय घटित हुआ जब गोदाम के भीतर आगामी दीपावली के पटाखों के लिए रासायनिक पदार्थ पोटेशियम नाइट्रेट मिलाकर कच्चा बारूद तैयार किया जा रहा था।
विस्फोट की चपेट में सीधे आने के कारण मौके पर काम कर रहे दो सगे-चचेरे भाइयों—28 वर्षीय मोहम्मद आमिर सोरगर और 32 वर्षीय मुजीद सोरगर की मौके पर ही अत्यंत दर्दनाक मौत हो गई। धमाके की प्रचंड तीव्रता के कारण दोनों युवकों के शवों के टुकड़े-टुकड़े होकर 50 मीटर दूर तक छिटक गए। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले नागौर बारूद गोदाम ब्लास्ट के बाद समूचे क्षेत्र में भारी दहशत और चीख-पुकार मच गई।
परिजनों और स्थानीय भीड़ का हंगामा, पुलिस पर पथराव
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और क्षत-विक्षत शवों के अवशेषों को एकत्र करने का काम शुरू किया। लेकिन हादसे के करीब डेढ़ घंटे बाद स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों ने प्रशासनिक लापरवाही और अवैध रूप से घनी बस्ती में चल रहे गोदाम के विरोध में उग्र हंगामा शुरू कर दिया।
जब पुलिस बल ने भीड़ को जलते हुए गोदाम के पास से हटाने का प्रयास किया, तो आक्रोशित भीड़ ने पुलिस पर अचानक अंधाधुंध पथराव शुरू कर दिया। कई पुलिस वाहनों के शीशे टूट गए। हालात बेकाबू होते देख पुलिस को अतिरिक्त जाब्ता बुलाना पड़ा और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का लाठीचार्ज कर स्थिति पर नियंत्रण पाया गया। इस कानून-व्यवस्था के संकट ने नागौर बारूद गोदाम ब्लास्ट के बाद के माहौल को अत्यधिक संवेदनशील बना दिया।
बिना वैध लाइसेंस के अवैध रूप से बन रहा था बारूद
पुलिस उपाधीक्षक ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस अवैध गोदाम का संचालन मोहम्मद अमीन (50) द्वारा किया जा रहा था, जिसने त्योहारों में भारी मुनाफा कमाने के लिए बिना किसी अग्निशमन सुरक्षा अनापत्ति (NOC) या वैध लाइसेंस के रिहायशी इलाके में भारी मात्रा में विस्फोटक छिपा रखा था।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में यह कोई पहली घटना नहीं है; इससे करीब पांच महीने पहले जयपुर के आमेर-नागोरियान इलाके में भी एक अवैध पटाखा निर्माण इकाई में हुए ऐसे ही धमाके में दो सगे भाइयों सहित छह लोगों की जान चली गई थी। इसके बावजूद नागौर में खुलेआम अवैध विस्फोटक का निर्माण होता रहा। फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की टीम ने घटनास्थल से रसायनों के नमूने एकत्र किए हैं। पुलिस ने फरार गोदाम मालिक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस प्रकार सुरक्षा नियमों की खुली अनदेखी से हुए नागौर बारूद गोदाम ब्लास्ट ने दो परिवारों के कमाऊ चिराग हमेशा के लिए बुझा दिए।


