22 एकड़ में 600 करोड़ से बना एशिया का सबसे बड़ा 1857 क्रांति स्मारक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को हरियाणा के ऐतिहासिक शहर अंबाला में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों की स्मृति में निर्मित भव्य राष्ट्रीय शहीद स्मारक संग्रहालय का विधिवत लोकार्पण किया। लगभग 600 करोड़ रुपये की विशाल लागत से 22 एकड़ क्षेत्र में फैला यह स्मारक 1857 की क्रांति पर केंद्रित एशिया का सबसे बड़ा और आधुनिक संग्रहालय है।
लोकार्पण समारोह में वरिष्ठ राज्य मंत्री अनिल विज ने भावुक होते हुए बताया कि वर्ष 2015 में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के समक्ष इस ऐतिहासिक धरोहर का प्रस्ताव रखा था, जिसे तुरंत मंजूरी मिली थी। विज ने कहा कि इतिहासकारों ने लंबे समय तक यह गलत पढ़ाया कि क्रांति मेरठ से शुरू हुई थी, जबकि शोध से सिद्ध हो चुका है कि मेरठ से 9 घंटे पहले ही अंबाला छावनी में आजादी के संघर्ष का पहला बिगुल फूंका गया था। इस गौरवशाली इतिहास को सहेजने के लिए सामने आया अमित शाह अंबाला स्मारक आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति की पावन तीर्थस्थली बनेगा।
करनाल में राहुल गांधी पर तीखा वार: ‘बिल्ली खंभा नोच रही है’
अंबाला पहुंचने से पूर्व गृह मंत्री शाह करनाल में भाजपा की विशाल पदयात्रा में सम्मिलित हुए, जहां उन्होंने गांधी मैदान की जनसभा से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 के आम चुनाव में देश की जनता ने लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री चुनकर स्पष्ट जनादेश दिया है, जिसके चलते कांग्रेस लगातार हताशा और पराजय के दलदल में धंसती जा रही है।
शाह ने तंज कसते हुए कहा, “कहावत है कि जब बिल्ली को कोई रास्ता नहीं सूझता तो वह झपटकर खंभा नोचने लगती है; ठीक यही हाल राहुल गांधी का है”। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस संसद में बहस और नीतिगत चर्चा से भागती है, शोर-शराबा कर सदन को ठप करती है और फिर बाहर आकर एक अराजकतावादी (अनार्किस्ट) की तरह सड़कों पर भीड़ जुटाकर देश में अस्थिरता का माहौल बनाती है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि अमित शाह अंबाला स्मारक का लोकार्पण देश को देशभक्ति की राह दिखाता है, जबकि विपक्ष केवल विभाजन की राजनीति में उलझा है।
‘सड़क पर चर्चा का शौक है, तो युवा मोर्चा अध्यक्ष से करें डिबेट’
गृह मंत्री ने राहुल गांधी की खुली बहस की चुनौतियों पर पलटवार करते हुए कहा, “देश की प्रबुद्ध जनता को यह तय करना होगा कि देश की समस्याओं और जन-कल्याणकारी नीतियों पर गंभीर चर्चा संसद के पवित्र मंदिर में होनी चाहिए या सड़कों के चौराहों पर? यदि राहुल गांधी को सड़क पर ही बहस करने का इतना शौक है, तो वे हरियाणा के किसी भी चौराहे की जगह और समय तय कर लें, हमारी पार्टी के युवा मोर्चा का एक साधारण कार्यकर्ता और अध्यक्ष ही उनसे डिबेट करने पहुंच जाएगा”।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे घर-घर जाकर जनता को समझाएं कि कांग्रेस का यह आंदोलन मतदाताओं को बचाने का नहीं, बल्कि रोहिंग्या और अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देने का अभियान है। इस प्रकार अमित शाह अंबाला स्मारक के ऐतिहासिक मंच से राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवादी विमर्श को एक नई वैचारिक धार दी गई।


