US Sanctions on Indian Couple: ईरानी तेल की तस्करी में चंडीगढ़ के दंपती और 9 कंपनियों पर बैन

  • November 6, 2026
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अमेरिकी प्रतिबंध भारतीय कंपनियां के तहत ब्लैकलिस्ट किए गए जहाजों और फर्जी दस्तावेजों का प्रारूप

ईरानी ‘शैडो फ्लीट’ को फर्जी पहचान दिलाने का भंडाफोड़

संयुक्त राज्य अमेरिका के वित्त मंत्रालय (यूएस डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी) के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (OFAC) ने ईरान के अवैध तेल निर्यात नेटवर्क पर एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रहार किया है। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर चंडीगढ़ के एक प्रमुख कारोबारी दंपती सहित कुल 4 भारतीय नागरिकों और उनसे प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी 9 अंतरराष्ट्रीय शिपिंग व फर्जी रजिस्ट्री कंपनियों पर पूर्ण आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं।

अमेरिकी सरकार का आरोप है कि यह संगठित नेटवर्क ईरान के उन गुप्त तेल टैंकर जहाजों (जिन्हें अंतरराष्ट्रीय समुद्री भाषा में ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है) को अवैध रूप से दूसरे संप्रभु देशों के झंडे (फ्लैग ऑफ कन्वीनियंस) और फर्जी तकनीकी कागजात दिलाने का काम कर रहा था। इस कूटनीतिक खुलासे के साथ लागू हुए अमेरिकी प्रतिबंध भारतीय कंपनियां अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में हड़कंप मचा रहे हैं।

चंडीगढ़ के सुनील शर्मा और जसप्रीत के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा जारी आधिकारिक प्रतिबंध सूची में चंडीगढ़ के निवासी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद, अश्वनी कुमार श्रीमान और इशविंदर सिंह के नाम प्रमुखता से शामिल किए गए हैं। इसके अलावा भारत में पंजीकृत कंपनियों और सिंगापुर में खोली गई एक मुखौटा (शेल) कंपनी को भी काली सूची में डाला गया है।

अमेरिकी जांच में पाया गया कि सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी कई फर्जी वेबसाइटों और फर्जी गैर-सरकारी संस्थाओं का संचालन करते थे, जिनके जरिए वे अंतरराष्ट्रीय तेल जहाजों को अन्य देशों की आधिकारिक सरकारी मंजूरी के बिना ही अवैध समुद्री पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी कर देते थे। वे दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना और अफ्रीकी देश मोजाम्बिक, माली, मलावी और अरूबा जैसे देशों के नाम पर फर्जी फ्लैग रजिस्ट्री तैयार करते थे। इस प्रकार अमेरिकी प्रतिबंध भारतीय कंपनियां की मदद से चल रहे इस गुप्त नेटवर्क को पूरी तरह बेनकाब कर चुके हैं।

2014 से सक्रिय था सिंडिकेट, असली पहचान छिपाकर चल रहे थे जहाज

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट वर्ष 2014 से लगातार सक्रिय था। शुरुआत में इस नेटवर्क ने कैरेबियाई देश डोमिनिका की फर्जी जहाज पंजीकरण एजेंसी बनकर समुद्री उद्योग में पैठ बनाई थी। जब ईरानी तेल टैंकर इन फर्जी देशों के झंडे लगाकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सफर करते थे, तो उपग्रह ट्रैकिंग और तटरक्षक बलों के लिए यह पता लगाना लगभग नामुमकिन हो जाता था कि इन जहाजों का वास्तविक मालिक कौन है और वे किस देश से कच्चा तेल लोड करके ले जा रहे हैं।

इस अवैध आड़ के जरिए ईरान अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों को चकमा देकर वैश्विक बाजारों में अरबों डॉलर का कच्चा तेल बेच रहा था। नए प्रतिबंधों के तहत इन सभी 4 भारतीयों और 9 कंपनियों की अमेरिका में मौजूद सभी बैंक संपत्तियां सीज कर दी गई हैं और किसी भी अमेरिकी नागरिक या अंतरराष्ट्रीय बैंक द्वारा इनके साथ लेनदेन करने पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। इस प्रकार अमेरिकी प्रतिबंध भारतीय कंपनियां के इस नेटवर्क ने अवैध तेल तस्करी पर कड़ा प्रहार किया है।