JPSC 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के बीच अभ्यर्थियों के चयन के लिए रकम तय होने के दावे सामने आए हैं। वहीं छात्रों का आंदोलन और देवेंद्र महतो की भूख हड़ताल जारी है।
JPSC 14वीं परीक्षा में कथित सेटिंग का बड़ा दावा
झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। सीआईडी की पूछताछ में बुद्धेश्वर भगत ने कथित तौर पर परीक्षा में अभ्यर्थियों की सेटिंग से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी दी है। जांच में सामने आए दावों के मुताबिक, अभ्यर्थियों को पास कराने से लेकर अंतिम चयन तक के लिए अलग-अलग रकम तय की गई थी। मामले में सीआईडी पहले ही कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के अंतिम चयन के लिए एक करोड़ रुपये, जबकि एससी-एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 80 लाख रुपये का रेट तय किया गया था। इस कथित नेटवर्क के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये वसूलने की तैयारी थी। सेटिंग की रकम नकद लेने की योजना थी, जबकि अभ्यर्थियों को नेटवर्क से जोड़ने वाले एजेंटों के लिए प्रत्येक अभ्यर्थी पर 15 लाख रुपये कमीशन तय होने की बात सामने आई है।
छात्र आंदोलन 21वें दिन भी जारी, अस्पताल में देवेंद्र महतो
दरअसल रांची में छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ परीक्षा में कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एडमिट कार्ड, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य के सवाल पर आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो इस वक्त अस्पताल में हैं, लेकिन उनका कहना है कि इलाज के बीच भी उनका अनशन जारी है। यानी शरीर अस्पताल में है, लेकिन आंदोलन से पीछे हटने को तैयार नहीं।
भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन अब 21वें दिन में पहुंच चुका है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच देवेंद्र महतो की भूख हड़ताल आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है।
मंत्री के बयान पर छात्र नेता रवींद्र पासवान का सवाल
दरअसल झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी है। इन सब के बीच छात्र नेता रवींद्र पासवान ने झारखंड सरकार में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के बयान पर कहा है कि हम उनसे यही पूछ रहे हैं कि आपको कैसे पता चला कि हम छात्र नहीं हैं। रवींद्र पासवान ने कहा कि हमारा जो प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए गया था, हम सभी अपना एडमिट कार्ड दिखा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बिना जांच किए, बिना सोचे-समझे इस तरह का बयान देना गलत है। सभी के पास एडमिट कार्ड है और सभी JPSC-JSSC की परीक्षाएं लिखते हैं।
अस्पताल में भी भूख हड़ताल जारी रखने पर अड़े देवेंद्र महतो
इस बीच देवेंद्र नाथ महतो कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। डॉक्टरों की लगातार निगरानी के बावजूद उन्होंने अपना अनशन खत्म नहीं किया है। देवेंद्र नाथ महतो ने अस्पताल से कहा है कि उन्होंने उपचार के दौरान भी अपनी भूख हड़ताल जारी रखी है।
उन्होंने कहा, इस समय मैं अस्पताल में हूं और उपचार के दौरान भी अपनी हड़ताल जारी रखी है। 10 अगस्त 2026 को आयोजित विधानसभा घेराव के दौरान लाठीचार्ज और धक्कामुक्की के बाद एंबुलेंस से अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया था। मैं 4 दिनों से अस्पताल में हूं। देवेंद्र नाथ महतो ने आगे कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान कई साथियों पर लाठीचार्ज किया गया, जो बहुत गलत हुआ। उन्होंने इसकी जांच की मांग की।
छात्रों की मांग क्या है?
दरअसल प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थी जवाब चाहते हैं। आंदोलनकारियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाए। कुछ प्रदर्शनकारी केंद्रीय जांच की मांग भी उठा रहे हैं।
यही वजह है कि आंदोलन लगातार लंबा खिंचता जा रहा है। लेकिन इस आंदोलन के साथ अब सबसे बड़ी चिंता जुड़ गई है—देवेंद्र महतो की सेहत। लंबे समय तक भूख हड़ताल के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके साथ कई अन्य प्रदर्शनकारी भी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
लाठीचार्ज के बाद और बढ़ा विवाद
यानी जिस आंदोलन की शुरुआत परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के सवाल से हुई थी, वह अब स्वास्थ्य और प्रशासनिक कार्रवाई के सवाल तक पहुंच गया है। वहीं 10 अगस्त की पुलिस कार्रवाई ने भी विवाद को और बढ़ा दिया। प्रदर्शनकारियों ने लाठीचार्ज का आरोप लगाया, जबकि पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक और पुलिस पक्ष भी सामने आया है।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत कब होगी?
अब सवाल सिर्फ ये नहीं है कि देवेंद्र महतो अपना अनशन कब खत्म करेंगे। सवाल ये है कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत कब होगी? क्या छात्रों की मांगों पर कोई ठोस पहल होगी? क्या भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों का समाधान निकलेगा? और सबसे अहम, क्या अस्पताल में भर्ती देवेंद्र महतो की बिगड़ती सेहत के बीच सरकार कोई ऐसा रास्ता निकालेगी, जिससे आंदोलन भी खत्म हो और छात्रों की चिंताओं का समाधान भी हो?


