सौरभ हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला
मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में आखिरकार वो दिन आ गया, जिसका इंतजार करीब डेढ़ साल से किया जा रहा था…अदालत का फैसला आया… मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया। और जैसे ही अदालत का फैसला सामने आया, दोनों के चेहरे पर तनाव और मायूसी साफ नजर आई। अभियोजन पक्ष के वकील के मुताबिक, फैसले से पहले दोनों पिछले कुछ दिनों से काफी शांत थे और प्रार्थना भी कर रहे थे। तो जिस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था, उसी मामले में अब अदालत ने दोनों को दोषी मान लिया है।
दरअसल मेरठ के चर्चित नीला ड्रम सौरभ हत्याकांड में बुधवार को जिला अदालत ने मृतक की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को हत्या का दोषी करार दिया। जिला कारागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शाम करीब 4:45 बजे दोनों की पेशी हुई। जिला जज द्वारा दोषी ठहराए जाने की जानकारी मिलते ही मुस्कान और साहिल दोनों रोने लगे।
फैसला सुनते ही रोने लगे मुस्कान और साहिल
जेलकर्मियों ने दोनों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन वे काफी देर तक रोते रहे। बाद में दोनों को रोते हुए बैरक में ले जाया गया। इस दौरान आरोपी मुस्कान दुपट्टे से बार-बार अपने आंसू पोंछती रही, जबकि साहिल हाथों से आंसू पोंछते हुए बैरक लौटा। अदालत के फैसले से पहले दोनों के व्यवहार में भी बदलाव दिखाई दे रहा था। मुस्कान पिछले तीन दिनों से अधिक समय पूजा-पाठ में लगा रही थी। बुधवार को दोनों ने सामान्य दिनों की अपेक्षा कम खाना खाया।
वहीं दोष सिद्धि के दौरान मृतक सौरभ की मां रेनू देवी, भाई बबलू, ताई और बुआ कुसुम समेत अन्य परिजन अदालत में मौजूद रहे। अदालत के फैसले के बाद परिजनों ने राहत जताई और दोनों आरोपियों के लिए फांसी की मांग की। इस फैसले के साथ सौरभ हत्याकांड में दोष सिद्धि का चरण पूरा हो गया है। अब मामले में अदालत की ओर से सजा सुनाए जाने का इंतजार है।
मार्च 2025 से शुरू हुई थी इस मामले की कहानी
दरअसल कहानी शुरू होती है मार्च 2025 से…सौरभ राजपूत, जो मर्चेंट नेवी से जुड़े थे, मेरठ में अपने परिवार के पास आए थे। इसके कुछ ही समय बाद उनकी हत्या कर दी गई। जांच में सामने आया कि इस हत्या के पीछे उनकी पत्नी मुस्कान और साहिल शुक्ला की भूमिका थी। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद सौरभ के शव को एक नीले ड्रम में छिपाया गया था। यही वजह है कि इस पूरे मामले को देशभर में ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ के नाम से जाना जाने लगा। मामला सामने आने के बाद पुलिस जांच तेज हुई और मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद एक लंबा कानूनी सफर शुरू हुआ।
करीब 13 महीने तक चली सुनवाई में अदालत के सामने 22 गवाहों के बयान दर्ज हुए और करीब 126 सुनवाई हुईं। अभियोजन पक्ष ने हत्या के साथ-साथ सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप भी अदालत के सामने रखे। और फिर आया 30 सितंबर 2026…मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया। अदालत के इस फैसले के साथ ही इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई का एक बड़ा पड़ाव पूरा हो गया।
2016 में हुआ था सौरभ और मुस्कान का प्रेम विवाह
दरअसल यह हत्याकांड देशभर में नीले ड्रम कांड से काफी चर्चित रहा है। इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत ने ब्रह्मपुरी निवासी मुस्कान रस्तोगी से 2016 में प्रेम विवाह किया था। सौरभ लंदन में नौकरी करते थे और पत्नी मुस्कान मेरठ में रहती थी। इसी दौरान मुस्कान का अपने पुराने दोस्त साहिल शुक्ला से करीबी संबंध बन गए। 24 फरवरी 2025 को सौरभ अपनी छह साल की बेटी और पत्नी मुस्कान का जन्मदिन मनाने के लिए लंदन से घर आए थे। संबंधों में बाधा बनने पर मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने सौरभ की तीन मार्च 2025 की रात हत्या कर दी।
बताया गया की हत्या करने से पहले मुस्कान ने सौरभ के खाने में नशीली दवा मिला दी। जब सौरभ बेसुध हो गए तो मुस्कान ने फोन करके अपने प्रेमी साहिल को घर बुला लिया। और फिर दोनों ने मिलकर उस्तरे और चाकू से सौरभ की हत्या कर दी। और उसके बाद शव को टुकड़े करके नीले ड्रम में भरने के बाद मुस्कान अपने प्रेमी के साथ घूमने चली गई। वहीं पुलिस ने मुस्कान और साहिल को उनके घर से 19 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने अदालत में 12 मई 2025 को करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।
शव के टुकड़े नीले ड्रम में छिपाने का आरोप
दरअसल सौरभ की हत्या करने के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए मुस्कान और साहिल ने जो तरीका अपनाया उसकी चर्चा देश भर में रही। हत्या के बाद दोनों ने सौरभ के सिर को धड़ से अलग कर दिया और दोनों हाथों की कलाइयां काट दीं। इसके बाद बाजार से अनाज रखने वाला बड़ा नीला प्लास्टिक का ड्रम, सीमेंट, बालू और डस्ट खरीदकर लाए। सौरभ के शव के कटे हुए टुकड़ों को पॉलिथीन में लपेटकर नीले ड्रम में रख दिए। दुर्गंध रोकने के लिए ड्रम के ऊपर सीमेंट और डस्ट का भारी घोल डालकर उसे सील कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों पुलिस और परिजनों को गुमराह करने के लिए शिमला-मनाली घूमने चले गए।
वहीं जिला जज के द्वारा मुस्कान और साहिल को दोषी करार देने के दौरान सौरभ की मां रेनू देवी, भाई बबलू, ताई इंद्रा और बुआ कुसुम आदि परिजन न्यायालय में मौजूद रहे। परिजनों ने कहा कि अदालत के निर्णय से उन्हें राहत मिली है। उन्होंने कहा कि दोनों ने निर्मम तरीके से सौरभ की हत्या की थी। अदालत को दोनों को फांसी की सजा देनी चाहिए।
अब 14 अक्टूबर को सजा पर आएगा फैसला
गौरतलब है कि ऐसे अपराध समाज को झकझोर देते हैं और सामाजिक तानेबाने को तोड़कर डर पैदा करते हैं। एक तरफ दोनों दोषियों की जिंदगी है तो दूसरी तरफ समाज है। फिलहाल कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले में एक सवाल फिर सामने आया है…आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक पारिवारिक रिश्ते का अंत हत्या जैसे गंभीर अपराध में हुआ? इस सवाल का जवाब अब अदालत के रिकॉर्ड, गवाहों और सामने आए सबूतों में तलाशा जा रहा है। सौरभ के परिवार के लिए ये फैसला सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया का अंत नहीं, बल्कि लंबे इंतजार के बाद आया एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब सबकी नजरें 14 अक्टूबर पर हैं—जब अदालत सजा के मामले में अपना फैसला सुनाएगी।


