जोधपुर में एक साथ उड़ेंगे दुनिया के सबसे खतरनाक 80 फाइटर जेट, 8 देशों की ताकत दिखेगी

  • October 1, 2026
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जोधपुर में तरंग शक्ति एक्सरसाइज के दौरान फाइटर जेट

जोधपुर में होने जा रहा बड़ा हवाई युद्धाभ्यास

जोधपुर में 8 देशों की तरंग शक्ति एक्सरसाइज में दुनिया के सबसे खतरनाक फाइटर जेट्स एक साथ उड़ान भरेंगे। भारत में मौजूद फ्रांस एंबेसी ने इसकी जानकारी दी है। उसके मुताबिक अभ्यास में 60 से 70 फाइटर जेट एक साथ उड़ान भरेंगे। यह अभ्यास भारतीय वायुसेना की ओर से आयोजित बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास का हिस्सा है, जिसमें अलग-अलग देशों की वायु सेनाएं और उनके विमान शामिल हो रहे हैं। इस दौरान कई तरह के लड़ाकू और सपोर्ट विमान एक साथ ऑपरेशन में हिस्सा ले रहे हैं।

मंगलवार को एक्सरसाइज के चौथे दिन सुखोई फाइटर विमान ने राफेल फाइटर जेट को लीड किया। फ्रांस की ओर से इस अभ्यास में एयरबस ए400एम और एयरबस ए330 मल्टी रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट विमान ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान अलग-अलग विमानों के बीच ऑपरेशनल तालमेल और हवाई अभ्यास की गतिविधियां देखने को मिलीं। जोधपुर में चल रही इस एक्सरसाइज के दौरान अलग-अलग देशों के विमान भारतीय वायुसेना के साथ संयुक्त अभ्यास कर रहे हैं।

अभ्यास के दौरान 40 हजार फीट की ऊंचाई पर एयरबस ए400एम और राफेल फाइटर जेट में फ्यूल भरने की प्रैक्टिस की गई। यह अभ्यास हवा में ही एक विमान से दूसरे विमान को ईंधन उपलब्ध कराने की क्षमता से जुड़ा है। इसके अलावा 12 अक्टूबर तक चलने वाले वायुसेना के इस युद्धाभ्यास में अमेरिका का एफ-35 जेट भी शामिल है। भारत की ओर से तेजस फाइटर जेट के अलावा ट्रांसपोर्ट विमान भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

8 देशों की भागीदारी

तरंग शक्ति एक्सरसाइज में अलग-अलग देशों के सैन्य प्रतिनिधि और पर्यवेक्षक भी शामिल हैं। इस दौरान भारत के मित्र देशों के 28 से ज्यादा पर्यवेक्षक बेंगलुरु पहुंचे। इन पर्यवेक्षकों ने भारत की प्रमुख डिफेंस कंपनियों का दौरा किया और देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को करीब से समझा। प्रतिनिधियों में इंडोनेशिया, थाईलैंड, ब्राजील, पेरू, अल्जीरिया, नाइजीरिया, आइवरी कोस्ट और मालदीव समेत अन्य देशों के पर्यवेक्षक शामिल हुए। इस दौरे का उद्देश्य भारत की रक्षा और एयरोस्पेस क्षमताओं को समझना भी था।

युद्धाभ्यास में शामिल देशों के प्रतिनिधिमंडल ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL और नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज यानी NAL का दौरा किया। इन संस्थानों में प्रतिनिधियों ने भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस, रक्षा और उच्च तकनीकी क्षमताओं को करीब से समझा।इस दौरे के दौरान भारत में विकसित और निर्मित रक्षा तकनीक, एयरोस्पेस क्षमता और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को समझने का अवसर मिला। इससे विदेशी प्रतिनिधियों को भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र की क्षमता को करीब से देखने का मौका मिला।

भारत की रक्षा क्षमता को दिखाने का मकसद

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इस औद्योगिक दौरे का मकसद सिर्फ युद्धाभ्यास तक सीमित नहीं है। इसके जरिए मित्र देशों के सामने भारतीय हथियारों और रक्षा उपकरणों की क्षमता को भी प्रदर्शित करना है। आने वाले दिनों में इससे भारतीय रक्षा उत्पादों के निर्यात और विदेशी सहयोग को नई रफ्तार मिलने की संभावना बताई जा रही है। जोधपुर में होने वाली हवाई गतिविधियों और बेंगलुरु में भारतीय रक्षा कंपनियों के दौरे को एक साथ देखा जाए तो अभ्यास का दायरा केवल लड़ाकू विमानों के संचालन तक सीमित नहीं है। 80 फाइटर जेट की चर्चा के साथ यह अभ्यास अलग-अलग देशों की वायु सेनाओं के बीच सहयोग और भारत की रक्षा औद्योगिक क्षमता को दिखाने का भी माध्यम बन रहा है।

इस युद्धाभ्यास में फाइटर जेट के साथ-साथ टैंकर और ट्रांसपोर्ट विमान भी शामिल हैं। फ्रांस के एयरबस ए400एम और एयरबस ए330 मल्टी रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट ने इसमें भाग लिया है। अमेरिका के एफ-35 और भारत के तेजस के अलावा अन्य ट्रांसपोर्ट विमान भी अभ्यास का हिस्सा हैं। इस तरह 80 फाइटर जेट से जुड़ी खबर केवल लड़ाकू विमानों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि अभ्यास में शामिल अलग-अलग प्रकार के सैन्य विमानों, हवाई ईंधन भरने की प्रैक्टिस और बहुराष्ट्रीय सहयोग को भी सामने लाती है।