भारत-इजरायल रिश्तों में इंसानियत की एक और कहानी
भारत और इजरायल के बीच रिश्तों की बात जब भी होती है, तो अक्सर राजनीति, कूटनीति और रणनीतिक साझेदारी की चर्चा होती है…लेकिन आज हम आपको एक ऐसा रिश्ता दिखाने जा रहे हैं, जो किसी समझौते या दस्तावेज से नहीं बना…ये रिश्ता बना है इंसानियत से। जिस तरह भारतीय मूल के पायलट स्मित ने इजरायल जा रहे प्लेन में बैठे लोगों को बचाया, वैसे ही मुंबई अटैक के दौरान एक भारतीय महिला ने एक इजरायली बच्चे को बचाया था। दरअसल इजरायल जा रहे फ्लाइट में हुई चाकूबाजी की घटना के बाद भारतीय पायलट स्मित मच्छार ने घायल होने के बाद भी 174 लोगों की जान बचाई।
जिस प्लेन को पायलट स्मित ने जमीन पर उतारा, उसमें बड़ी संख्या में इजरायली यात्री थे। अब उनकी बहादुरी की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उन्हें हीरो बताया है। इसके अलावा दुनिया भर में भारतीय मूल के पायलट की बहादुरी की चर्चा हो रही है। लेकिन, इजरायलियों की जान बचाने वाली किसी भारतीय की यह पहली कहानी नहीं है। करीब 18 साल पहले मुंबई में भी एक भारतीय महिला ने आतंकियों के बीच से एक इजरायली बच्चे को बचाया था। ये बात है साल 2008 की जब मुंबई पर हमला किया गया था। मुंबई के नरीमन हाउस को भी आतंकियों ने निशाना बनाया था।
फ्लाइट में पायलट पर हुआ चाकू से हमला
विमान सुरक्षा नियमों के बारे में आम लोगों की सोच अक्सर गलत होती है। कई लोग मानते हैं कि एयरपोर्ट सिक्योरिटी हर नुकीली चीज जब्त कर लेती है, इसलिए कॉकपिट में कोई हथियार नहीं पहुंच सकता। लेकिन दुबई से इजरायल जा रही फ्लाईदुबई के प्लेन में हुई घटना में ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर उन्हें गर्दन और सिर पर गंभीर चोटें पहुंचाई। दरअसल ‘फ्लायदुबई’ के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की आसमान में दिखाई गई अदम्य वीरता और सूझबूझ की गूंज अब देश के सर्वोच्च मंचों तक पहुंच गई है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित की बहादुरी की जमकर तारीफ की।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संकट और बेहद मुश्किल वक्त में कैप्टन स्मित ने जो साहस और उपस्थिति दिखाई, उस पर आज पूरा भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया गर्व कर रही है। पीएम मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बहुत बड़ा हादसा टाल दिया और 9/11 जैसी खौफनाक साजिश को नाकाम कर दिया।
बचपन का सपना नहीं था पायलट बनना
आपको बता दे की कैप्टन स्मित मच्छार के लिए एविएशन कभी बचपन का सपना नहीं था। करीब 9,750 घंटों की उड़ानों का तजुर्बा रखने वाले और एक दशक से अधिक समय से व्यावसायिक विमान उड़ा रहे इस भारतीय पायलट ने कभी अपने पारिवारिक कपड़ा कारोबार को आगे बढ़ाने की योजना बनाई थी। लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि टेक्सटाइल इंजीनियरिंग से शुरू हुआ सफर मैनेजमेंट की पढ़ाई से होता हुआ सीधा कॉकपिट तक जा पहुंचा।
वहीं उनके ट्रेनिंग और अनुभव 30 सितंबर 2026 को उस वक्त 174 जिंदगियों के लिए मसीहा बन गया, जब आसमान में 30 हजार फीट की ऊंचाई पर मौत मंडरा रही थी। वहीं स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद स्मित मच्छार ने अपने पारिवारिक कपड़े के कारोबार को संभालने के इरादे से टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। बाद में उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध ‘वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट’ से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की पढ़ाई की। इसी दौरान, महज 19 साल की उम्र में वे एक एविएशन सेमिनार में शामिल हुए। उस एक सेमिनार ने उनकी जिंदगी का रुख बदल दिया।
19 साल की उम्र में एविएशन से बदली जिंदगी
स्मित ने एक इंटरव्यू में बताया था कि पायलट बनना उनका बचपन का सपना नहीं था, बल्कि मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान उन्हें फ्लाइंग का जुनून सवार हुआ। हालांकि, शुरुआत में उनकी मां इस नए करियर को लेकर काफी चिंतित थीं। इसके बाद अपने फैसले पर अडिग रहते हुए स्मित पायलट की ट्रेनिंग के लिए न्यूजीलैंड चले गए। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने जून 2011 में स्पाइसजेट एयरलाइंस जॉइन की। करीब 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में सेवाएं देते हुए वे सीनियर कमांडर और लाइन ट्रेनिंग कैप्टन के पद तक पहुंचे, जहाँ वे नए पायलटों को ट्रेनिंग देते थे।
जून 2022 में, बोइंग 737 उड़ानों में महारत हासिल करने के बाद, वे ‘फ्लायदुबई’ में डायरेक्ट-एंट्री कैप्टन के रूप में शामिल हो गए। इस तरह टेक्सटाइल इंजीनियरिंग से शुरू हुआ उनका सफर एविएशन तक पहुंचा और लंबे अनुभव के बाद वह फ्लायदुबई के कैप्टन बने। वर्षों की ट्रेनिंग और उड़ान के अनुभव के बाद 30 सितंबर 2026 का दिन उनके करियर का सबसे कठिन समय साबित हुआ।
30 हजार फीट की ऊंचाई पर 174 जिंदगियों का सवाल
वहीं 30 सितंबर 2026 को कैप्टन स्मित की बरसों की मेहनत और सूझबूझ का सबसे कड़ा इम्तिहान था। वे ‘फ्लायदुबई’ की फ्लाइट FZ1073 (बोइंग 737 मैक्स 8) को दुबई से तेल अवीव ले जा रहे थे। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे। अचानक, ओमान मूल के सह-पायलट ने विमान को क्रैश करने की साजिश के तहत कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला कर दिया। फ्लाइट डेटा के मुताबिक, महज 30 सेकंड के भीतर विमान करीब 14,000 फीट नीचे गिर गया और आपातकालीन कोड 7700 और 7500 एक्टिव हो गए।
वहीं गंभीर रूप से जख्मी होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने गजब का साहस दिखाया। उन्होंने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे बाहर मौजूद क्रू मेंबर्स और यात्रियों को अंदर आने का मौका मिल गया। यात्रियों और क्रू ने मिलकर सिरफिरे सह-पायलट को दबोच लिया। इसके बाद, विमान में यात्रा कर रहे ‘फ्लायदुबई’ के ही दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने कमान संभाली और प्लेन को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंड कराया।
नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित की बहादुरी को सराहा
वहीं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित की बहादुरी की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी कार्रवाई ने एक बड़ी हवाई त्रासदी को रोकने में मदद की। गौरतलब है कि वर्ष 2008 में मुंबई में एक भारतीय महिला ने इजरायली बच्चे को बचाया था। अब 18 साल बाद फिर वही इंसानियत देखने को मिली और इस बार भारतीय मूल के पायलट ने कई इजरायली लोगों को बचाया। हजारों फीट ऊपर एक भारतीय पायलट ने इजरायली यात्रियों समेत विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।
इस घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा हो रही है और उनके साहस की तारीफ की जा रही है। फिलहाल मुंबई के रहने वाले कैप्टन स्मित मच्छार का एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन हुआ है और अब उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। एक साधारण बैकग्राउंड से आकर 174 जिंदगियों के रक्षक बने कैप्टन स्मित का यह अदम्य साहस आज पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन चुका है।


