चिराग पासवान के बयान से बिहार की सियासत में हलचल
बिहार की सियासत में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं है… सवाल ये भी है कि आखिर एनडीए के भीतर रहते हुए चिराग पासवान अपनी ही सरकार पर इतने तीखे हमले क्यों कर रहे हैं? चिराग पासवान ने बिहार में महिलाओं के खिलाफ हुई हालिया घटनाओं को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए… यहां तक कहा कि उन्हें ऐसी सरकार का हिस्सा होने पर शर्मिंदगी महसूस होती है। लेकिन अब उनके इस बयान पर एनडीए के ही नेता जीतन राम मांझी ने पलटवार किया है। मांझी ने साफ कहा—अगर इतनी शर्मिंदगी है तो आगे की कार्रवाई करिए।
तो सवाल यही है… चिराग पासवान के इन बयानों का मकसद आखिर क्या है? क्या वो बिहार सरकार पर दबाव बना रहे हैं? क्या वो खुद को एनडीए के भीतर एक स्वतंत्र आवाज के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं? दरअसल बिहार की राजनीति में चिराग पासवान का ताजा बयान अचानक चर्चा में नहीं आया। जमुई और समस्तीपुर से सामने आई महिलाओं से जुड़ी घटनाओं के बाद चिराग ने कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई। समस्तीपुर की घटना को लेकर उन्होंने सख्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि सिर्फ कुछ गिरफ्तारियों से बात खत्म नहीं होनी चाहिए।
इसके बाद चिराग का वो बयान सामने आया जिसने बिहार की सियासत में हलचल तेज कर दी। चिराग ने कहा कि उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है कि वो ऐसी सरकार का समर्थन कर रहे हैं, जहां इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। यानी निशाना सिर्फ अपराधियों पर नहीं था…सवाल सीधे प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर था।
‘मुझे शर्म आती है कि मैं ऐसी सरकार के साथ हूं’
और यहीं से विवाद की शुरुआत होती है। क्योंकि चिराग पासवान कोई विपक्षी नेता नहीं हैं। वो एनडीए का हिस्सा हैं…केंद्र में मंत्री हैं…और बिहार की सत्ता में भी उनकी पार्टी गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में जब गठबंधन का ही एक बड़ा नेता सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, तो उसका राजनीतिक संदेश स्वाभाविक रूप से बड़ा हो जाता है।
दरअसल हाल ही में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख चिराग पासवान ने एक न्यूज़ पोर्टल से बातचीत में बिहार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था, “मुझे शर्म आती है कि मैं ऐसी सरकार के साथ हूं, जहां पर ऐसी घटनाएं हो रही हैं। बिहार में आज की तारीख़ में कोई सुरक्षित नहीं है।”
चिराग ने बिहार के प्रशासन को ‘निकम्मा’ बताया और कहा, “इनके बस में बिहार के लोगों को सुरक्षित रखना नहीं है। मुझे शर्म आती है कि में ऐसी सरकार का समर्थन कर रहा हूं।”
दरअसल बिहार में हाल ही में लड़कियों के साथ यौन हिंसा से जुड़े कई वीडियो वायरल हुए हैं। ऐसा ही एक वीडियो जमुई लोकसभा क्षेत्र का भी था जहां से चिराग पासवान पहले खुद सांसद रहे हैं और फिलहाल उनके जीजा अरुण भारती इस सीट से सांसद हैं।
क्या चिराग NDA से अलग हो सकते हैं?
चिराग पासवान के इस बयान के बाद कई सवाल उठे हैं, जिनमें से सबसे अहम है कि क्या चिराग एनडीए से अलग हो सकते हैं? क्या इन बयानों के जरिए चिराग आगामी यूपी और पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए दांव साध रहे हैं? या फिर ये बयान सम्राट चौधरी के विवादित बयान के बीच एक युवा नेता के तौर पर ख़ुद की मज़बूत पोजिशनिंग की कोशिश है?
हालाँकि ये पहली बार नहीं है जब चिराग ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए हों। जुलाई 2025 में पटना के बड़े कारोबारी गोपाल खेमका की गांधी मैदान के पास हत्या कर दी गई थी। उसके बाद भी चिराग पासवान ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पत्रकारों से कहा था, कि “इस सवाल से भागने का प्रयास ना मैं करूंगा, ना हमारी सरकार को करना चाहिए। ये चिंता का विषय है कि शहरी इलाक़े में इस तरह से खुलेआम इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया जाता है, जहां थाना बगल में है और बड़े-बड़े अधिकारी पास रहते हैं।” चिराग ने ये बयान बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ महीनों पहले दिया था। इस बयान को उनकी दबाव की राजनीति माना गया था ताकि वो विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीट ले सकें। हुआ भी यही।
2025 चुनाव में LJP को मिली 29 सीटें
साल 2025 के विधानसभा चुनाव में लोजपा को 29 सीटें मिलीं और पार्टी ने बढ़िया प्रदर्शन करते हुए 19 सीटों पर जीत हासिल की। तो क्या इस बार भी चिराग बिहार की कानून व्यवस्था के कंधे पर बंदूक रखकर यूपी और पंजाब के चुनाव को लक्ष्य कर रहे हैं?
क्यूंकि यूपी चुनाव को लेकर चिराग पासवान ने कहा है, “पार्टी यूपी में चुनाव लड़ेगी। गठबंधन का स्वरूप क्या होगा, ये तय होना बाकी है। लेकिन हमारी तैयारी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की है। गठबंधन हुआ तो ठीक, वरना हम अकेले चुनाव लड़ेंगे।”बीबीसी की एक रिपोर्ट में राजनीतिक विश्लेषकों और पत्रकारों के हवाले से कहा गया है कि चिराग की पार्टी उत्तर प्रदेश और पंजाब के चुनावों में अपनी भूमिका बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
यूपी और पंजाब चुनाव को लेकर क्या है रणनीति?
हालाँकि चिराग की इस रणनीति ने उनके सामने कई बड़ी चुनौती भी सामने ला दिया है। वो एक तरफ एनडीए का हिस्सा बने रहना चाहते हैं…और दूसरी तरफ सरकार की नीतियों और कानून-व्यवस्था पर खुलकर सवाल भी उठा रहे हैं। यही वजह है कि उनके ताजा बयान के बाद एनडीए के भीतर से प्रतिक्रिया आने लगी है। मांझी का बयान इसी खींचतान को सामने लाता है। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल भी चिराग के बयान को सरकार पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। कुल मिलाकर बिहार की सियासत में चिराग पासवान इस वक्त एक दिलचस्प स्थिति में हैं। सत्ता के साथ भी…और सत्ता से सवाल भी। उनका कहना है कि बिहार की बेटियों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। वहीं उनके गठबंधन के नेता कह रहे हैं कि अगर सरकार के कामकाज से इतनी ही नाराजगी है तो सिर्फ बयान नहीं, कार्रवाई भी होनी चाहिए।
क्या बयान तक सीमित रहेगी नाराजगी?
अब देखना ये होगा कि चिराग की ये नाराजगी सिर्फ बयान और दबाव की राजनीति तक सीमित रहती है…या फिर वो सरकार से जवाबदेही तय कराने के लिए आगे कोई ठोस राजनीतिक कदम भी उठाते हैं? फिलहाल उनके बयान ने बिहार की सियासत में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ वह एनडीए का हिस्सा हैं और दूसरी तरफ अपनी ही सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इसी वजह से उनके बयान के राजनीतिक मकसद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। साथ ही, यूपी और पंजाब के चुनावों को लेकर उनकी पार्टी की तैयारियों का जिक्र भी इसी राजनीतिक संदर्भ में हो रहा है। हालांकि, इन बयानों से आगे की उनकी राजनीतिक दिशा क्या होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।


