NEET के बाद BPSSC परीक्षा की 30 लाख में डील, मास्टरमाइंड रविशंकर ने मेडिकल स्टूडेंट्स को बनाया सॉल्वर

  • September 22, 2026
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BPSSC परीक्षा में सॉल्वर गैंग और रविशंकर मामले की खबर

पटना में NEET UG धांधली मामले की जांच के दौरान सामने आया कि डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट का गिरोह केवल मेडिकल प्रवेश परीक्षा तक सीमित नहीं था। यह गिरोह बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग यानी BPSSC की बहाली परीक्षाओं में भी सक्रिय था। आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU को जांच के दौरान ऐसे उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड मिले हैं, जिनका संबंध सहायक पदों और हवलदार भर्ती से जुड़ी परीक्षाओं से बताया गया है। जांच के दौरान मूल दस्तावेज और ब्लैंक चेक भी बरामद हुए हैं। अब EOU रविशंकर के पास से मिले रोल नंबरों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। इन सबूतों के आधार पर जांच एजेंसी को परीक्षाओं में सॉल्वर और हॉल मैनेजमेंट के संगठित खेल के संकेत मिले हैं।

उम्मीदवार से 22 से 30 लाख रुपये तक की डील

जांच में सामने आया है कि रविशंकर सम्राट का गिरोह अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन कराने के नाम पर प्रति उम्मीदवार 22 लाख से 30 लाख रुपये तक की डील करता था। इसमें आधी रकम एडवांस के तौर पर ली जाती थी, जबकि बाकी राशि परीक्षा परिणाम आने के बाद लेने की बात सामने आई है।

इस पूरे नेटवर्क में उम्मीदवार की जगह मेडिकल छात्रों को सॉल्वर के रूप में बैठाया जाता था। यानी जिस उम्मीदवार ने परीक्षा के लिए आवेदन किया था, उसकी जगह दूसरा व्यक्ति परीक्षा देने पहुंचता था। जांच में बायोमेट्रिक वेंडर से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है। लखीसराय, नालंदा और हाजीपुर में काम करने वाले कुछ बायोमेट्रिक वेंडर कर्मचारियों के साथ मिलीभगत की बात जांच में सामने आई है।

थंब इंप्रेशन और फोटो की क्लोनिंग से फर्जी उपस्थिति

परीक्षा केंद्र में उम्मीदवार की जगह दूसरे व्यक्ति को बैठाने के लिए थंब इंप्रेशन और फोटो की क्लोनिंग का इस्तेमाल किया जाता था। इससे फर्जी उपस्थिति दर्ज कराई जाती थी। बायोमेट्रिक जांच पूरी होने के बाद केंद्र के कर्मचारियों की मदद से सॉल्वर को निर्धारित कमरे में बैठाया जाता था। इसके बाद वह उम्मीदवार की जगह ओएमआर शीट भरता था। इस पूरी प्रक्रिया में परीक्षा केंद्र से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। EOU अब उन रोल नंबरों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का मिलान कर रही है, जो रविशंकर के पास से मिले हैं। जांच एजेंसी इन सबूतों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन-किन परीक्षाओं में इस नेटवर्क ने उम्मीदवारों की जगह सॉल्वर बैठाए थे।

रविशंकर मेडिकल छात्र है

डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट पावापुरी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस फाइनल ईयर का छात्र है। एक परीक्षा में फेल होने के बाद वह परीक्षा देने आर्यभट्ट विश्वविद्यालय पहुंचा था, जहां उसे पकड़ा गया। जांच में यह भी सामने आया कि उसका नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़ा हुआ था। रविशंकर का गिरोह केवल मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में ही धांधली नहीं कर रहा था, बल्कि कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं यानी सीबीटी में भी गड़बड़ी कर रहा था। परीक्षा को भी सीबीटी मोड में आयोजित किए जाने की संभावना के बीच इस नेटवर्क की गतिविधियों की जांच की जा रही है।

NEET के बाद अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं भी जांच के दायरे में

NEET UG धांधली मामले में गिरफ्तारी के बाद रविशंकर उर्फ सम्राट से जुड़े नेटवर्क की जांच आगे बढ़ी तो अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उसकी सक्रियता सामने आई। EOU को उसके ठिकाने और मोबाइल से ऐसे दस्तावेज और जानकारी मिली, जिनका संबंध BPSSC से जुड़ी परीक्षाओं के उम्मीदवारों से बताया गया है।

जांच एजेंसी अब उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड, मूल दस्तावेज, ब्लैंक चेक, रोल नंबर और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। इन दस्तावेजों के आधार पर सॉल्वर और परीक्षा केंद्र के स्तर पर किए गए इंतजामों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि उम्मीदवारों की जगह मेडिकल छात्रों को बैठाने के लिए पहले से व्यवस्था की जाती थी। बायोमेट्रिक जांच के बाद केंद्र के कर्मचारियों की मदद से सॉल्वर को निर्धारित कमरे तक पहुंचाया जाता था और वहां उम्मीदवार की जगह ओएमआर शीट भरवाई जाती थी।

मास्टरमाइंड रविशंकर और उज्ज्वल राज गिरफ्तार

NEET UG 2026 और जून में हुई री-NEET परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड डॉ. उज्ज्वल राज और डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट को EOU ने पटना से गिरफ्तार किया था। अब जांच में रविशंकर के नेटवर्क का दायरा मेडिकल प्रवेश परीक्षा से आगे बढ़कर BPSSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं तक सामने आ रहा है। EOU अलग-अलग परीक्षाओं के रोल नंबर और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। इसके अलावा बायोमेट्रिक वेंडर कर्मचारियों और परीक्षा केंद्रों से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस मामले में उम्मीदवारों से ली जाने वाली रकम, मेडिकल छात्रों को सॉल्वर के रूप में बैठाने, थंब इंप्रेशन और फोटो की क्लोनिंग तथा परीक्षा केंद्र में हॉल मैनेजमेंट की पूरी व्यवस्था को जांच के दायरे में रखा गया है।