राहुल गांधी ने रचनात्मक कांग्रेस अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS पर निशाना साधा। उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी, छात्र आंदोलन और अमित शाह की संसद में अनुपस्थिति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
PM मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर राहुल गांधी का तंज
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और RSS पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते हैं। मुझे लगता था कि इसके पीछे शायद मार्केटिंग की स्ट्रेटजी है, लेकिन जब मैं उनके साथ एक कमरे में पांच मिनट बैठा तो पता चला कि यह जा ही नहीं सकते हैं। इस दौरान राहुल गांधी ने रचनात्मक कांग्रेस का मतलब भी समझाया। उन्होंने कहा कि रचनात्मक कांग्रेस का मतलब एक्सप्रेस करना है।
राहुल गांधी ने नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में रचनात्मक कांग्रेस प्रकोष्ठ अधिवेशन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए RSS की अभिव्यक्ति की रक्षा करने का वादा किया। उन्होंने कहा, ”जिस दिन आरएसएस की अभिव्यक्ति को देश से खत्म करने की बात शुरू हुई तो मैं उनकी रक्षा करूंगा, क्योंकि उनका भी एक्सप्रेशन है।”
RSS और कॉरपोरेट असर को लेकर राहुल गांधी का हमला
दरअसल कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर तंज कसा। राजधानी दिल्ली के मावलंकर हॉल में रचनात्मक कांग्रेस कन्वेंशन में राहुल गांधी ने कई मुद्दों पर बात उठाई और उन्हें लेकर सरकार के रुख और रवैये पर टिप्पणी की। राहुल गांधी ने कांग्रेस कन्वेंशन में कहा कि छोटे कारोबारी कभी RSS की असली ताकत हुआ करते थे, लेकिन नोटबंदी और गलत तरीके से लागू GST ने इसी वर्ग को बड़ा नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि RSS में कॉरपोरेट असर की शुरुआत प्रमोद महाजन के दौर में हुई और नरेंद्र मोदी ने इस प्रक्रिया को पूरा कर दिया।
राहुल गांधी ने कहा कि अब पुराना RSS खत्म हो चुका है और संगठन बड़े पूंजीपतियों के हितों के लिए काम करने वाला जरिया बन गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि RSS और पीएम मोदी दोनों ही उद्योगपतियों और कॉरपोरेट हितों के लिए काम कर रहे हैं। इसके साथ ही राहुल ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग इस ताकत के खिलाफ आवाज उठाने से डरते रहे हैं।
PM मोदी और अमित शाह पर भी राहुल का हमला
वहीं राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि आजकल नरेंद्र मोदी रात में सो नहीं पाते हैं। इसके कई कारण हैं, जिनमें कुछ जाहिर और कुछ छिपे हुए हैं।
उन्होंने कहा, ”अमित शाह को चाणक्य और जाने क्या-क्या कहा जाता था, लेकिन वो गायब हो गए… और 20 दिन तक संसद में नहीं आ पाए।” राहुल गांधी ने कहा कि अब इस सरकार को समझ आ गया है कि ये देश अपने आपको अभिव्यक्त करने से नहीं रोकेगा।
छात्र आंदोलन और अभिव्यक्ति की आजादी पर बोले राहुल
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आगे छात्र आंदोलन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों को चुप रहने के लिए कहा गया। एक दुखी मां को चुप रहने के लिए कहा गया।
राहुल गांधी के मुताबिक, भाजपा-आरएसएस ऑर्डर थोपना चाहते हैं और कांग्रेस का काम है कि भारत को खुद को एक्सप्रेस करने दिया जाए और उस ऑर्डर को तोड़ा जाए। राहुल ने कहा कि वे किसी को रोकना नहीं चाहते, बल्कि हर किसी की फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्र अपनी बात रखना चाहते थे। वे तकलीफ में थे और अपनी बात कहना चाहते थे, लेकिन सरकार कहती है नहीं।
‘हम इनको पागल कर देंगे’… राहुल गांधी का बयान
रचनात्मक कांग्रेस कन्वेंशन में राहुल गांधी ने कहा कि ‘हमारा काम बहुत सिंपल है. हम इनको पागल कर देंगे।’ उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी रात को नहीं सोते हैं और इसके अलग-अलग कारण हैं। राहुल गांधी ने अमित शाह का भी जिक्र किया और कहा कि वह 20 दिन तक संसद भवन में नहीं घुस पाए। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार पहली बार भारत की अभिव्यक्ति का एहसास कर रही है और अब समझ चुकी है कि भारत एक्सप्रेस करने लगा है।
‘भारत एक्सप्रेशन से नहीं रुकेगा’
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि अब सरकार को एक बात समझ आ गई है कि यह देश एक्सप्रेशन से नहीं रुकेगा। उन्होंने कहा कि भारत में बहुत से लोग कायरों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि 3000 साल पुराने भारत को समझने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आज के भारत को समझने की जरूरत है।
राहुल गांधी के बयान से क्या संदेश निकला?
राहुल गांधी के पूरे भाषण में अभिव्यक्ति की आजादी, छात्र आंदोलन, RSS, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने कांग्रेस के रचनात्मक कांग्रेस प्रकोष्ठ को लोगों को अपनी बात रखने और अपनी अभिव्यक्ति के लिए मंच के तौर पर पेश किया। अब राहुल गांधी के इन बयानों पर सत्ता पक्ष की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या यह मुद्दा आगे राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता है, इस पर नजर रहेगी।


