भारत मंडपम में वैज्ञानिकों और युवाओं से सीधा संवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित केंद्र सरकार के प्रतिष्ठित ‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कॉन्क्लेव’ (ESTIC 2026) का औपचारिक उद्घाटन किया। अपने प्रेरणादायी संबोधन में प्रधानमंत्री ने वहां उपस्थित देश-विदेश के शीर्ष रिसर्चर्स, प्रमुख इंडस्ट्री लीडर्स, युवा स्टार्ट-अप संस्थापकों और मेधावी छात्रों से आह्वान किया कि वे वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे स्पष्ट तकनीकी लक्ष्य निर्धारित करें जिन्हें सटीक रूप से मापा जा सके।
उन्होंने उपस्थित वैज्ञानिकों से आग्रह करते हुए कहा कि अगले तीन वर्षों में हर शोधकर्ता को यह तय करना चाहिए कि वे कौन सी नई तकनीक, कौन सा वर्किंग प्रोटोटाइप, कौन सा पायलट प्रोजेक्ट या कौन सा क्रांतिकारी उत्पाद विकसित करेंगे। पीएम मोदी विज्ञान लक्ष्य को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें ऐसे नवाचार करने होंगे जो भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने में सीधा योगदान दें।
केवल विचारों का फोरम नहीं, ठोस नतीजों का प्लेटफॉर्म बने
प्रधानमंत्री ने बल देकर कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन केवल अकादमिक विचारों और सिद्धांतों पर चर्चा का एक सामान्य फोरम बनकर नहीं रहेगा, बल्कि यह ऐसे ठोस, व्यावहारिक और मापने योग्य नतीजों के लिए एक प्रभावी लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म साबित होगा जिसे दुनिया देख सके।
इस भव्य उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री के साथ केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद और विश्वविख्यात तीन नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक—प्रोफेसर जोकिम फ्रैंक, सर रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स और प्रोफेसर कोन्स्टेंटिन नोवोसेलोव मंच पर विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस उच्च स्तरीय वैज्ञानिक मंच से पीएम मोदी विज्ञान लक्ष्य का संदेश वैश्विक स्तर पर प्रसारित हुआ।
21वीं सदी का भारत अब किसी का पिछलग्गू नहीं
सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज का नया भारत किसी अन्य देश का अंधानुकरण करने वाला राष्ट्र नहीं रहा, बल्कि आज का भारत पूरी दुनिया को अपने पीछे आने और मार्गदर्शन लेने के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने गर्व से कहा कि भारत अब केवल एक सहयोगी देश नहीं बल्कि एक मजबूत ‘ग्लोबल को-क्रिएटर’ बन चुका है। यह 20वीं सदी का पीछे चलने वाला देश नहीं बल्कि 21वीं सदी के भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार ‘मोदी का भारत’ है।
प्रधानमंत्री ने भी इसी भाव को दोहराते हुए कहा कि कई दशक पहले एक ऐसा निराशाजनक दौर था जब भारत के लिए विज्ञान का अर्थ दुनिया के आविष्कारों के पीछे-पीछे चलना भर था, लेकिन आज भारत वैश्विक चुनौतियों का समाधान देने की क्षमता स्वयं विकसित कर रहा है। इस प्रकार पीएम मोदी विज्ञान लक्ष्य ने देश के वैज्ञानिक परिदृश्य को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की है।


