रेलवे का बड़ा फैसला: गरीब रथ और जन शताब्दी समेत 10 जोड़ी ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा खत्म

  • October 30, 2026
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ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा खत्म होने के बाद रेलवे ट्रैक पर चलती जन शताब्दी ट्रेन

सुपरफास्ट से सामान्य मेल/एक्सप्रेस बनने का उलटा दौर

भारतीय रेलवे में एक जमाना वह था जब रेल मंत्रालय सामान्य पैसेंजर और मेल/एक्सप्रेस गाड़ियों की औसत गति (स्पीड) बढ़ाकर उन्हें गर्व के साथ ‘सुपरफास्ट’ का विशिष्ट दर्जा प्रदान करता था। इससे यात्रियों का सफर तेजी से पूरा होता था और रेलवे को सुपरफास्ट सरचार्ज के जरिए अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होती थी। लेकिन अब बदलते रेलवे प्रबंधन के बीच एक सर्वथा उलटा दौर शुरू हो गया है, जहां थोक भाव में प्रतिष्ठित सुपरफास्ट गाड़ियों का यह दर्जा वापस लेकर उन्हें सामान्य मेल/एक्सप्रेस श्रेणी में बदला जा रहा है।

रेलवे द्वारा लिए गए एक ताजा प्रशासनिक निर्णय में कम से कम 10 जोड़ी अत्यधिक लोकप्रिय और व्यस्त ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा समाप्त कर दिया गया है। इस सूची में गरीब रथ एक्सप्रेस, जन शताब्दी एक्सप्रेस और कई अन्य लंबी दूरी की ट्रेनें शामिल हैं। ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा खत्म करने का यह बड़ा आदेश आगामी 1 जनवरी 2027 से औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा।

गरीब रथ और जन शताब्दी के बदले गए ट्रेन नंबर

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि साउथ वेस्टर्न रेलवे के बेंगलुरु डिवीजन ने समीक्षा के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है। तय कार्यक्रम के अनुसार यशवंतपुर से त्रिवेंद्रम नॉर्थ (कोचुवेली) के बीच चलने वाली लोकप्रिय गरीब रथ एक्सप्रेस अब सुपरफास्ट ट्रेन नहीं रहेगी। ट्रैक पर इसकी औसत गति कम किए जाने के कारण अब यह सामान्य एक्सप्रेस ट्रेन की तरह संचालित होगी।

नियमों के तहत इसका मौजूदा ट्रेन नंबर 12257/58 बदलकर अब 16537/38 कर दिया जाएगा। हालांकि, इसका नाम गरीब रथ ही रहेगा। इसी प्रकार मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से हिंगोली डेकन के बीच चलने वाली जन शताब्दी एक्सप्रेस की औसत गति कम होने से इसका भी सुपरफास्ट दर्जा छीन लिया गया है। अब यह ट्रेन अपने पुराने नंबर 12071/72 के स्थान पर नए सामान्य नंबर 11069/70 से पटरी पर दौड़ेगी। इस प्रकार ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा खत्म होने से इनकी पहचान और नंबरिंग प्रणाली बदल गई है।

मुंबई, वाराणसी और अयोध्या रूट की गाड़ियां भी शामिल

रेलवे बोर्ड के अनुसार केवल यही दो ट्रेनें नहीं, बल्कि मुंबई और मध्य भारत के इलाके से चलने वाली 8 अन्य प्रमुख गाड़ियों का दर्जा भी घटा दिया गया है। इनमें छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से वाराणसी के बीच चलने वाली प्रसिद्ध महानगरी एक्सप्रेस समेत दो ट्रेनें और अयोध्या कैंट से लोकमान्य तिलक टर्मिनस मुंबई के बीच चलने वाली तुलसी एक्सप्रेस जैसी लोकप्रिय गाड़ियां शामिल हैं।

रेलवे अधिकारियों का तर्क है कि रूट पर बढ़ते ट्रैफिक, स्टॉपेज बढ़ने और मेंटेनेंस ब्लॉक के चलते इन ट्रेनों की औसत परिचालन गति सुपरफास्ट के 55 किमी प्रति घंटा के अनिवार्य मानक से नीचे आ गई थी। अतः नियमों की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा खत्म किया गया है ताकि यात्रियों से सुपरफास्ट शुल्क न वसूला जाए।