शक्तिशाली अल नीनो के कारण प्रमुख फसलों के उत्पादन में गिरावट
प्रशांत महासागर की मौसमी परिघटना ‘अल नीनो’ (El Niño—जिसे स्पैनिश में ‘छोटा बच्चा’ कहा जाता है) ने भारत की कृषि अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। इस मौसमी चक्र ने देश में दाल, चीनी, तिलहन और धान जैसी अत्यंत जरूरी फसलों के घरेलू उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम वैज्ञानिकों द्वारा इसे अब तक के इतिहास का सबसे शक्तिशाली अल नीनो माना जा रहा है।
गंभीर सूखे और अनियमित मानसून के चलते फसलों के उत्पादन में भारी कमी आई है, जिससे खाद्य वस्तुओं की घरेलू आपूर्ति को लेकर भारी चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले महीनों में महंगाई बेकाबू हो सकती है और भारत सरकार को घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए व्यापक स्तर पर कृषि उत्पादों और पशु आहार का आयात बढ़ाना पड़ सकता है। उत्पन्न हुआ यह अल नीनो खाद्य संकट बाजार में सीधे तौर पर खाद्य तेल और दालों की कीमतों को प्रभावित कर रहा है।
चीनी, खाद्य तेल और सोयाबीन का बढ़ेगा आयात
सूत्रों के अनुसार, विभिन्न औद्योगिक संगठन उत्पादन लागत को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार से आयात नियमों को आसान बनाने की लगातार मांग कर रहे हैं। चीनी उद्योग को पहले ही रॉ शुगर के आयात के लिए समय-सीमा बढ़ाने की अनुमति मिल चुकी है। अब घरेलू तिलहन की कमी के कारण एडिबल ऑयल (खाद्य तेल) का आयात भी काफी बढ़ाना पड़ेगा। खरीफ सीजन में मराठवाड़ा, विदर्भ, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के कई कृषि अंचलों में सूखे के कारण सोयाबीन और मूंगफली की फसलों को भारी क्षति पहुंची है।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, इस साल मूंगफली उत्पादन में 20% से अधिक की गिरावट आ सकती है। सनविन ग्रुप के सीईओ संदीप बाजोरिया ने बताया कि भारत का कुल खाद्य तेल आयात वर्ष 2025-26 के 16.5 मिलियन टन से बढ़कर 2026-27 में 17.5 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। भारत अपनी घरेलू खाद्य तेल खपत का लगभग 54 से 56 प्रतिशत हिस्सा आयात से ही पूरा करता है और 2024-25 में कुल आयात 166.63 लाख टन रहा था। इस प्रकार अल नीनो खाद्य संकट से आयात बिल में भारी वृद्धि तय मानी जा रही है।
पोल्ट्री उद्योग पर संकट, 30 लाख टन सोयाबीन मील की मांग
फसलों के संकट का सीधा असर देश के पोल्ट्री उद्योग और पशु आहार पर भी दिखाई दे रहा है। कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CLFMA) के पूर्व अध्यक्ष दिव्य कुमार गुलाटी ने सरकार से 30 लाख टन सोयाबीन मील के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति मांगी है। उन्होंने बताया कि पोल्ट्री फीड में 80% हिस्सा अकेले सोयाबीन मील और मक्के का होता है और वर्तमान में कटाई के समय भी इनकी कीमतें आसमान छू रही हैं।
यदि तुरंत आयात की अनुमति नहीं दी गई, तो चिकन और अंडों जैसे पोल्ट्री उत्पादों की कीमतें बेतहाशा बढ़ जाएंगी, जिससे आम उपभोक्ताओं की थाली महंगी होगी। इसके अलावा कपड़ा उद्योग कॉटन से आयात शुल्क हटाने और स्टार्च उद्योग चीन से मक्के के आयात की मांग कर रहा है। इस प्रकार अल नीनो खाद्य संकट ने भारत के संपूर्ण कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।


