US ट्रेजरी में चीन का डबल गेम: अमेरिकी बॉन्ड होल्डिंग्स छिपाई, कनाडा और बेल्जियम से लगाया पैसा

  • October 30, 2026
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चीन अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स को छिपाकर दूसरे देशों से डॉलर बॉन्ड्स में निवेश करता हुआ

डॉलर से दूरी का दिखावा और बैकडोर से अमेरिकी कर्ज की खरीद

दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियां—अमेरिका और चीन वैश्विक मंच पर आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक मोर्चे पर एक-दूसरे के सामने खड़ी हैं। चीन पिछले कई वर्षों से खुद को वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रमुख इंजन के रूप में प्रस्तुत करता रहा है, लेकिन हाल के समय में उसकी आर्थिक विकास दर काफी सुस्त पड़ चुकी है। अपनी स्थिति मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने के लिए चीन दुनिया भर में यह संदेश फैला रहा है कि वह अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता समाप्त कर रहा है और अमेरिकी सरकार के ट्रेजरी बॉन्ड्स को तेजी से बेच रहा है।

हालांकि, अमेरिकी वित्तीय आंकड़ों के गहन विश्लेषण से यह हकीकत सामने आई है कि चीन वास्तव में अमेरिका के साथ एक बड़ा ‘डबल गेम’ खेल रहा है। हकीकत में चीन अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स को केवल आधिकारिक प्रत्यक्ष खातों से हटाकर अन्य मित्र और तटस्थ देशों के कस्टोडियल खातों के जरिए गुप्त रूप से निवेश कर रहा है।

आधिकारिक आंकड़ों में 2008 के बाद सबसे निचला स्तर

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रत्यक्ष रूप से दर्ज अमेरिकी ट्रेजरी में चीन की होल्डिंग्स अगस्त माह में 27 अरब डॉलर गिरकर 591 अरब डॉलर के स्तर पर आ गई है। यह अगस्त 2008 के बाद से चीन का सबसे निचला स्तर है। लेकिन इसी समान अवधि के दौरान पड़ोसी देश कनाडा की यूएस ट्रेजरी होल्डिंग्स 38 अरब डॉलर की जबर्दस्त छलांग लगाकर 465 अरब डॉलर के विशाल स्तर पर पहुंच गई।

यह तथ्य इसलिए भी अत्यधिक चौंकाने वाला है क्योंकि अमेरिका और कनाडा के बीच पिछले कुछ समय से राजनयिक तनाव बना हुआ है। वर्ष 2019 की शुरुआत से तुलना करें तो कनाडा की होल्डिंग्स में 369 अरब डॉलर यानी 384 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है, जबकि प्रत्यक्ष चीनी होल्डिंग्स में 534 अरब डॉलर यानी 48 प्रतिशत की भारी गिरावट दिखाई गई है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार चीन अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स को केवल कागजों पर घटाकर दिखाया जा रहा है।

बेल्जियम और लक्जमबर्ग के खातों से छुपाया जा रहा निवेश

अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह के विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपनी अमेरिकी प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) को सीधे पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के नाम रखने के बजाय ‘फॉरेन कस्टोडियन’ खातों के पास स्थानांतरित कर रहा है। इससे आधिकारिक रिपोर्ट में ऐसा आभास होता है कि चीन डॉलर और अमेरिकी संपत्ति से किनारा कर रहा है, जबकि पर्दे के पीछे सच्चाई एकदम उलट है।

चीन ने यूरोप के बेल्जियम और लक्जमबर्ग जैसे वैश्विक कस्टोडियल हब्स के जरिए भारी मात्रा में ट्रेजरी संपत्तियां सुरक्षित रखी हैं। अगस्त के ही महीने में बेल्जियम की होल्डिंग्स में 20 अरब डॉलर और लक्जमबर्ग की होल्डिंग्स में 6 अरब डॉलर की अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस प्रकार अपनी मुद्रा युआन को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने का दावा करने के बावजूद चीन अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स के जरिए अमेरिकी बॉन्ड्स में सुरक्षित ब्याज कमाने का गुप्त खेल खेल रहा है।