चीनी हैकिंग टूल्स के जरिए भारतीय वित्तीय ढांचे पर सेंध
आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों का घातक दुरुपयोग करके अंतरराष्ट्रीय साइबर जालसाज भारत के वित्तीय क्षेत्र को बड़े पैमाने पर निशाना बना रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पिछले लगभग दो महीनों के भीतर देश भर में सुनियोजित साइबर हमलों के माध्यम से जालसाजों ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) से करीब 300 करोड़ रुपये की भारी धनराशि उड़ा ली है।
इस संगठित साइबर हमले में मुख्य रूप से वे छोटी कंपनियां निशाने पर रही हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर 1,000 करोड़ रुपये या उससे कम है और जिनका साइबर सुरक्षा तंत्र कमजोर है। इस मामले में अब तक देश के विभिन्न राज्यों में लगभग 150 औपचारिक शिकायतें और एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इस चौंकाने वाले मामले ने एआई साइबर ठगी एनबीएफसी के बढ़ते खतरे को देश की राष्ट्रीय वित्तीय सुरक्षा से जोड़ दिया है।
दिल्ली की कंपनी पर दो बार हमला, 14.75 करोड़ का नुकसान
साइबर सुरक्षा एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने कमजोर आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाकर कुछ कंपनियों पर बार-बार हमले किए हैं। दिल्ली में स्थित एक मध्यम दर्जे की एनबीएफसी पर हैकरों ने कुछ ही दिनों के अंतराल में दो बार साइबर स्ट्राइक की। कंपनी को पहले हमले में 7.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और कुछ ही दिनों बाद दूसरे हमले में 7.25 करोड़ रुपये अतिरिक्त उड़ा लिए गए, जिससे कंपनी को कुल 14.75 करोड़ रुपये का फटका लगा।
15 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास कुल 8,502 एनबीएफसी पंजीकृत हैं। अब तक मुंबई में लगभग 30, दिल्ली में 25 से अधिक और चेन्नई तथा अन्य शहरों में 15 से 16 गंभीर शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। साइबर अपराध की संवेदनशीलता के कारण इन मामलों की विवरणियों को अत्यधिक गोपनीय रखा जा रहा है। इस तरह अंजाम दी जा रही एआई साइबर ठगी एनबीएफसी के पीछे बेहद आधुनिक विदेशी तकनीक काम कर रही है।
चीनी प्लेटफॉर्म ‘CyberStrike’ और ‘ARTEX’ से हो रहा हमला
जांच एजेंसियों द्वारा कई मामलों की तकनीकी फॉरेंसिक जांच पूरी करने के बाद यह खुलासा हुआ है कि इस विशाल वित्तीय लूट के पीछे ‘CyberStrike’ नामक एक खतरनाक चीनी हैकिंग प्लेटफॉर्म सक्रिय है। भारत के अलावा जापान और दक्षिण कोरिया की वित्तीय कंपनियों को भी ऐसे ही हमलों का शिकार होना पड़ा है। विशेषज्ञों ने बताया कि दो प्रमुख चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूलकिट—ARTEX और CyberStrike के साथ-साथ चीनी ओपन सोर्स मॉडल जैसे डीपसीक (DeepSeek), अलीबाबा का क्वेन (Qwen), मूनशॉट का किमी (Kimi) और झिपू का जीएलएम (GLM) का इस्तेमाल करके भारतीय वित्तीय नेटवर्क में सेंध लगाई जा रही है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, हैकर हमला करने से पहले 10 से 12 दिनों तक संबंधित एनबीएफसी के नेटवर्क और कार्यप्रणाली की रेकी करते हैं और सिस्टम की कमजोरी उजागर होते ही व्हाइटलिस्टेड आईपी से फर्जी ट्रांजेक्शन कर देते हैं। दुनिया भर में 2,250 से अधिक संगठनों को आर्टेक्स के जरिए निशाना बनाया गया है। अतः एआई साइबर ठगी एनबीएफसी के इस विशाल सिंडिकेट को रोकने के लिए आरबीआई ने सभी वित्तीय संस्थानों को अपना सुरक्षा तंत्र तुरंत अपग्रेड करने की सख्त हिदायत दी है।


