दो हजार रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर मर्चेंट फीस लगाने का मुद्दा इन दिनों चर्चा में है। विपक्ष ने जहां इसे जनविरोधी कदम करार दिया है, वहीं सरकार ने अपने फैसले का बचाव किया है। इस बीच नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से इससे जुड़ी व्यवस्था को लेकर जानकारी सामने रखी गई है। इस व्यवस्था में 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होगा। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है। इसमें छोटे व्यापारियों और डिजिटल भुगतान के इकोसिस्टम को लेकर अलग-अलग प्रावधान रखे गए हैं।
UPI पेमेंट पर क्यों चर्चा में है चार्ज?
UPI पेमेंट पर मर्चेंट फीस लगाने का मुद्दा इसलिए चर्चा में है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। सरकार की ओर से इस फैसले का बचाव करते हुए कहा गया है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए इसमें निवेश की जरूरत है। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के अनुसार, पिछले छह साल में इकोसिस्टम में लगभग 75,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। दो हजार रुपये से ज्यादा के भुगतान पर लगाए गए चार्ज से होने वाली कमाई के जरिए सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता खत्म होने और इनोवेशन को बढ़ावा मिलने की बात कही गई है।
पहले साल में कितनी कमाई की उम्मीद?
UPI पेमेंट पर लगाए जाने वाले चार्ज से पहले साल में 15,000 से 15,000 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद जताई गई है। इसमें से 5 प्रतिशत हिस्सा छोटे मर्चेंट की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाएगा और समय-समय पर इस मॉडल की समीक्षा की जाएगी। इस व्यवस्था को टिकाऊ बनाने के लिए इकोसिस्टम में और निवेश की जरूरत बताई गई है। इसी वजह से भुगतान पर चार्ज लगाने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान के लिए जरूरी सिस्टम को आगे बढ़ाना और उसके संचालन से जुड़े खर्च को पूरा करने के लिए एक टिकाऊ मॉडल तैयार करना बताया गया है।
2,000 रुपये तक के भुगतान को लेकर क्या व्यवस्था है?
नई व्यवस्था में 2,000 रुपये तक के कई भुगतान शुल्क से बाहर रखे गए हैं। वहीं 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर MDR लागू होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं बताया गया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि 80 प्रतिशत से ज्यादा चार्ज उन कारोबारों से आएंगे, जिनका टर्नओवर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इनमें से कई कारोबारी पहले से कार्ड स्वीकार कर रहे हैं और उन पर ज्यादा लेनदेन होते हैं।
सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इस कदम का मकसद छोटे प्लेयर्स पर बोझ डालना नहीं है। ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों से चार्ज आने की बात कही गई है। साथ ही यह भी बताया गया है कि छोटे मर्चेंट और कम लेनदेन वाले कारोबारों को राहत देने की व्यवस्था रखी गई है। इससे डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल को बढ़ाने और छोटे कारोबारियों को इससे जोड़ने के उद्देश्य को बनाए रखने की कोशिश की गई है।
UPI सिस्टम को टिकाऊ बनाने पर जोर
NPCI चीफ ने कहा कि पी2एम यानी व्यक्ति से व्यापारी लेनदेन पर हमेशा से चार्ज लगता रहा है, जबकि पी2पी यानी व्यक्ति से व्यक्ति लेनदेन मुफ्त रहा है। 2020 में MDR माफ करने के बाद मर्चेंट के बीच इसके इस्तेमाल में तेजी आई थी, लेकिन बाद में इसकी ग्रोथ धीमी हो गई। इसीलिए बैंकों, फिनटेक कंपनियों और इंडस्ट्री बॉडीज ने डिजिटल पेमेंट के ज्यादा इस्तेमाल के लिए फंड जुटाने और एक टिकाऊ मॉडल की जरूरत महसूस की। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम तैयार करना है, जो लंबे समय तक डिजिटल भुगतान के विस्तार और उसमें नए निवेश को समर्थन दे सके।
चीन और ब्राजील का उदाहरण
NPCI चीफ ने चीन और ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों में डिजिटल पेमेंट का एडॉप्शन लगभग 80 प्रतिशत है, जबकि भारत के मामले में यह करीब 40 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि खासकर गरीब यूजर्स तक डिजिटल पेमेंट की पहुंच बढ़ाने की जरूरत है। इसी वजह से डिजिटल पेमेंट के इकोसिस्टम को मजबूत करने और उसमें और निवेश की जरूरत बताई गई है। प्रतिशत-आधारित मॉडल कम कीमत वाले भुगतान को बचाता है, जबकि अधिकतम सीमा ज्यादा कीमत और कम मार्जिन वाले लेनदेन को नियंत्रित करती है।
NPCI की ओर से कहा गया है कि इस कदम का उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर बोझ डालना नहीं है। 80 प्रतिशत से ज्यादा चार्ज उन बिजनेस से आने की बात कही गई है, जिनका टर्नओवर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इनमें से कई कारोबारी पहले से ही कार्ड स्वीकार कर रहे हैं और ऐसे कारोबारों पर अधिक लेनदेन होते हैं। इस तरह चार्ज का बड़ा हिस्सा बड़े कारोबारों से आने की व्यवस्था बताई गई है, जबकि छोटे मर्चेंट को राहत देने की कोशिश की गई है।
डिजिटल भुगतान के विस्तार और लागत का सवाल
डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने में बैंकों, फिनटेक कंपनियों और अन्य संस्थाओं की लागत आती है। NPCI चीफ के मुताबिक सिस्टम को टिकाऊ बनाए रखने के लिए इसमें निवेश की जरूरत है। UPI पेमेंट के इस्तेमाल को बढ़ाने और इकोसिस्टम में इनोवेशन लाने के लिए भी फंड की जरूरत बताई गई है। इसी पृष्ठभूमि में 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर MDR लागू करने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान के इकोसिस्टम के लिए एक टिकाऊ मॉडल तैयार करना बताया गया है।


