सितंबर की गिरावट के बाद अक्टूबर पर नजर
घरेलू शेयर बाजार में सितंबर में भारी बिकवाली देखने को मिली। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़क गए। इसी तरह बीएसई मिडकैप 150 में भी 6.6 फीसदी और बीएसई स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में 3.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यह मार्च के बाद से सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। मार्च में दोनों इंडेक्स करीब 11 फीसदी तक गिर गए थे।
अब निवेशकों की नजर अक्टूबर पर है। ऐतिहासिक रूप से यह महीना शेयरों के लिए मजबूत महीना रहा है। फेस्टिव सीजन होने के कारण इस दौरान ऑटो, जूलरी और कंज्यूमर सेक्टर पर ज्यादा खर्च की उम्मीद रहती है। आमतौर पर अक्टूबर शेयर बाजार के लिए अच्छा महीना रहा है। पिछले 10 साल में सात बार निफ्टी 50 बढ़त के साथ बंद हुआ है। हालांकि, इस साल सितंबर में हुई भारी बिकवाली के बाद बाजार में आगे की दिशा को लेकर कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
फेस्टिव सीजन से बाजार को उम्मीद
अक्टूबर में फेस्टिव सीजन के कारण ऑटो, जूलरी और कंज्यूमर सेक्टर पर खर्च बढ़ने की उम्मीद रहती है। यही वजह है कि ऐतिहासिक तौर पर इस महीने को शेयर बाजार के लिए मजबूत माना जाता है। पिछले 10 साल के आंकड़ों में निफ्टी 50 सात बार बढ़त के साथ बंद हुआ है। हालांकि, इस बार सितंबर में बाजार में हुई भारी बिकवाली के कारण निवेशकों के सामने अलग तरह की परिस्थितियां हैं। सितंबर में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी नीचे आए। मार्च के बाद सितंबर की गिरावट सबसे बड़ी मासिक गिरावट रही। इसलिए अक्टूबर में बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। फेस्टिव सीजन के दौरान खपत बढ़ने की उम्मीद बाजार के कुछ हिस्सों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है। लेकिन बाजार के सामने मौजूद वैश्विक और घरेलू चुनौतियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड की चुनौती
बाजार को कच्चे तेल की ऊंची कीमत, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर रुपये जैसी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। इन कारणों से निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है। सितंबर में भारी बिकवाली के बाद अक्टूबर में बाजार किस दिशा में जाता है, यह इन जोखिमों के साथ-साथ कंपनियों के प्रदर्शन पर भी निर्भर करेगा। कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे भी अक्टूबर में आएंगे। इन पर निवेशकों की नजर रहेगी। तिमाही नतीजों के जरिए कंपनियों की कमाई, मांग और कारोबार की स्थिति से जुड़ी तस्वीर सामने आएगी। इसलिए अक्टूबर में केवल ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर बाजार को देखने के बजाय मौजूदा जोखिमों और कंपनियों के प्रदर्शन पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
एक्सपर्ट्स की नजर किन बातों पर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक अक्टूबर एक अहम परीक्षा होगी कि क्या सितंबर में आई गिरावट में जोखिमों को ठीक से शामिल कर लिया गया है या अभी और एडजस्टमेंट की जरूरत है। एसबीआई सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिटेल रिसर्च के हेड सनी अग्रवाल ने कहा कि ज्यादातर सेक्टर के लिए, खासकर लार्ज-कैप शेयरों ने हालिया गिरावट के दौरान खराब प्रदर्शन किया है। उन्होंने वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही में डिमांड और वॉल्यूम ग्रोथ के लिहाज से बेहतर स्थिति की उम्मीद से जुड़ी बात कही। इससे बाजार के सामने एक तरफ फेस्टिव सीजन और दूसरी छमाही में मांग की उम्मीद है, जबकि दूसरी तरफ वैश्विक परिस्थितियों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
पिछले आंकड़ों से क्या संकेत
ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में निफ्टी 50 पिछले 10 साल में सात बार बढ़त के साथ बंद हुआ है। लेकिन इस आंकड़े को मौजूदा बाजार की परिस्थितियों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। सितंबर में हुई भारी बिकवाली के बाद बाजार को कच्चे तेल की ऊंची कीमत, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर रुपये जैसी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है।
अक्टूबर में कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे भी सामने आएंगे। इसके अलावा फेस्टिव सीजन के कारण ऑटो, जूलरी और कंज्यूमर सेक्टर में मांग पर भी नजर रहेगी। ऐसे में अक्टूबर शेयर बाजार के लिए ऐतिहासिक रूप से मजबूत महीना होने के बावजूद इस बार बाजार के सामने कई अलग-अलग कारक हैं। निवेशकों की नजर तिमाही नतीजों, मांग और वैश्विक संकेतों पर रहेगी।


