10वीं सीट पर बीजेपी और सपा के बीच असली मुकाबला
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है। एक तरफ बीजेपी और उसके सहयोगी दल हैं, जिनके पास विधानसभा में इतना संख्या बल है कि 7 सीटों पर उसकी स्थिति बेहद मजबूत दिखाई दे रही है। तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी है, जो अपने दो उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति में है। लेकिन असली लड़ाई राज्यसभा की 10वीं सीट पर है, जिस पर अब बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच नंबर गेम के साथ-साथ क्रॉस-वोटिंग और रणनीतिक लामबंदी की चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल उत्तर प्रदेश की दस सीटों पर राज्यसभा चुनाव के लिए ऐलान हो चुका है। समाजवादी पार्टी ने अपने दो उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। 16 अक्टूबर को इसके लिए वोटिंग होगी। हालांकि उससे पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले होने वाली इस लड़ाई में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन दस सीटों में से भाजपा के पास 7 सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल हैं। वहीं, अखिलेश यादव के पास भी दो सीटों के लिए पर्याप्त विधायक हैं। लेकिन दसवीं सीट जीतने के लिए दोनों में से किसी के पास जरूरी नंबर नहीं हैं।
सपा के तीसरे उम्मीदवार से बढ़ी सियासी हलचल
ऐसे में बड़ा सवाल उठने लगा है कि दसवीं सीट कौन जीतेगा। खबर है कि पहले ही दो उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी समाजवादी पार्टी तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की योजना बना रही है। वहीं क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए भाजपा अपने विधायकों पर नजर बनाए हुई है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि अगर क्रॉस वोटिंग के कारण भाजपा और सपा में लड़ाई होती है और सपा यह सीट जीत लेती है तो विधानसभा चुनाव से पहले यह भाजपा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। इससे मतदाताओं के बीच गलत संदेश जा सकता है।
वहीं समाजवादी पार्टी के पास करीब 101 विधायक हैं और कांग्रेस के विधायकों के समर्थन को जोड़ने पर उसका आंकड़ा 100 के पार पहुंचता है। दो राज्यसभा सीटों के लिए करीब 74 वोट चाहिए। इसलिए मौजूदा संख्या के हिसाब से सपा के लिए दो सीटों का रास्ता साफ दिखाई देता है। लेकिन अखिलेश यादव की पार्टी ने यहीं पर बड़ा दांव खेला है। समाजवादी पार्टी ने रामगोपाल यादव के साथ धनराज परिमल नथवानी को भी उम्मीदवार बनाया है। यानी सपा ने दो सीटों के साथ तीसरी सीट के लिए भी मैदान तैयार कर दिया है। अब सवाल है…क्या समाजवादी पार्टी तीसरी सीट के लिए जरूरी अतिरिक्त वोट जुटा पाएगी?
396 विधायक और 37 वोट का राज्यसभा गणित
आपको बता दें कि बीते 11 महीनों में उत्तर प्रदेश में सात विधायकों का निधन हो चुका है। इसकी वजह से 403 विधायकों वाली यूपी विधानसभा में अभी सिर्फ 396 विधायक ही हैं। राज्यसभा चुनाव के हर उम्मीदवार को जीतने के लिए पहली पसंद के 37 वोटों की जरूरत होगी। सपा के पास 101 विधायक हैं। विधायक पूजा पाल BJP में शामिल हो चुकी हैं और भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने पिछले साल 14 अगस्त को विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस बात के लिए तारीफ की थी कि अतीक अहमद जैसे माफियाओं को धूल चटा दी गई है। इसके बाद सपा ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया।
सपा को दो कांग्रेस विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इससे उसके कुल विधायकों की संख्या 102 हो जाती है। ऐसे में सपा को तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए और 9 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। वहीं सपा ने बुधवार को चौंकाते हुए पांच बार राज्यसभा सांसद रहे राम गोपाल यादव के साथ-साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया।
अखिलेश यादव बोले- वोटों की गिनती पूरी होगी
अखिलेश यादव ने गुरुवार को कहा, “वोटों की गिनती पूरी होगी। यह गिनती का मामला है। तीसरे उम्मीदवार पर फैसला लेने के लिए धैर्य की जरूरत है। हमारे कई लोग वापस आना चाहते हैं क्योंकि वे NDA में खुश नहीं हैं। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद राज्यसभा चुनाव के गणित को लेकर सियासी चर्चा और तेज हो गई है। तीसरे उम्मीदवार के लिए जरूरी अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करना सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। यानी सपा के पास अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए संख्या बल मौजूद दिखाई देता है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे अपने खेमे से बाहर जाकर समर्थन जुटाना होगा। इसी वजह से आने वाले दिनों में विधायकों की स्थिति और संभावित समर्थन पर नजर रहेगी।
बीजेपी के पास 288 विधायक, सहयोगियों का भी साथ
इधर भाजपा के पास उत्तर प्रदेश में 255 विधायक हैं। NDA के सहयोगियों के पास 33 और विधायक हैं। इनमें अपना दल के 13, आरएलडी के 9, एसबीएसपी के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक शामिल हैं। इससे उनकी कुल संख्या 288 हो जाती है। पूजा पाल का भी समर्थन भाजपा को है। इनके अलावा निर्दलीय विधायक मनोज पांडे, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह के साथ-साथ राजा भैया की अगुवाई वाली जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो विधायकों को मिलाकर एनडीए की कुल संख्या 294 हो जाती है। भाजपा को 8 उम्मीदवारों के लिए 296 वोटों की जरूरत होगी। भाजपा इससे सिर्फ दो ही पीछे है। दसवीं सीट पर जीत दर्ज करने के लिए भाजपा को दो और वोट का जुगाड़ करना होगा, जो कि क्रॉस वोटिंग के बिना संभव नहीं है।
10वीं सीट के लिए दोनों दलों के सामने बड़ी चुनौती
बीजेपी के सामने चुनौती है कि अगर वह 8वीं सीट चाहती है तो अतिरिक्त वोट कहां से आएंगे। वहीं सपा के सामने चुनौती इससे भी बड़ी है, क्योंकि तीसरी सीट के लिए उसे अपने खेमे से बाहर जाकर अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। यानी 10वीं सीट के लिए सिर्फ संख्या बल ही नहीं, बल्कि विधायकों की एकजुटता भी निर्णायक हो सकती है। दोनों दलों के सामने अपने-अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त समर्थन बनाए रखने की चुनौती है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा और उसी दिन मतगणना भी होगी। 6 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख है, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 9 अक्टूबर तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी।
16 अक्टूबर को होगा मतदान, 10वीं सीट पर नजर
यानी आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर, विधायकों की स्थिति और संभावित क्रॉस-वोटिंग के दावों के बीच 10वीं सीट का गणित लगातार बदल सकता है। फिलहाल संख्या बल के हिसाब से 7 सीटों पर बीजेपी और 2 सीटों पर समाजवादी पार्टी की स्थिति मजबूत दिखाई देती है। अब देखना होगा कि यूपी में राज्यसभा की 10वीं सीट किसके पाले में जाती है, बीजेपी या समाजवादी पार्टी को?


