सस्ता कच्चा तेल: गल्फ से टैंकर भर-भरकर तेल ला रहीं भारतीय कंपनियां, बदली पूरी स्ट्रैटजी

  • October 2, 2026
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भारतीय तेल रिफाइनरी और कच्चे तेल के टैंकर

भारतीय रिफाइनरियों ने बदली रणनीति

अमेरिका की संसद ने हाल में एक बिल पारित किया था। इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है। इससे भारतीय कंपनियां रूसी तेल खरीदने से परहेज कर सकती हैं। साथ ही इराक भारी डिस्काउंट पर तेल बेच रहा है। इसे देखते हुए भारतीय तेल रिफाइनरियों ने अपनी रणनीति बदल दी है और वे होर्मुज से गुजरने वाले टैंकर किराए पर ले रही हैं।

हाल के महीनों में होर्मुज से तेल की आवाजाही में सुधार और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के फिर से चालू होने के बाद भारतीय रिफाइनर्स की रणनीति में बदलाव आया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय तेल रिफाइनरियां फारस की खाड़ी से कच्चा तेल लाने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकर किराए पर ले रही हैं। इस बदलाव का उद्देश्य तेल की खरीद और उसे भारत तक लाने की लागत को कम करना भी है। सस्ता कच्चा तेल मिलने की संभावना के बीच रिफाइनरियां लॉजिस्टिक्स और शिपिंग व्यवस्था को नए तरीके से संभाल रही हैं।

होर्मुज से टैंकर किराए पर लेने की तैयारी

एक सूत्र ने कहा कि भारतीय कंपनियों ने टेंडर जारी किए हैं और शिपिंग कंपनियों के साथ बातचीत कर रही हैं। सिनोकोर ग्रुप और डायनाकोम टैंकर मैनेजमेंट लिमिटेड को टेंडर दिए गए हैं। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और लीला ग्लोबल ने भी बोलियां लगाई थीं, लेकिन वे टेंडर रद्द कर दिए गए।

भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान युद्ध की शुरुआत से ही होर्मुज से अपने टैंकर भेजने से परहेज किया था। इसकी वजह यह थी कि वहां हमले का जोखिम था। वे खाड़ी से तेल मंगाने के लिए पूरी तरह स्थानीय उत्पादकों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों पर निर्भर थे। इसके लिए उन्हें भारी प्रीमियम देना पड़ रहा था। अब हालात में बदलाव के बाद भारतीय कंपनियां सीधे टैंकर किराए पर लेने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इससे रिफाइनरियों को तेल की सप्लाई के लिए अपने लॉजिस्टिक्स पर ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है।

इराकी तेल खरीदने पर भी जोर

इंडियन ऑयल कॉर्प, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और नायरा एनर्जी लिमिटेड ने फ्री-ऑन-बोर्ड यानी एफओबी आधार पर इराकी कच्चा तेल खरीदा है। ऐसी बिक्री में खरीदारों को कार्गो लोड करने के लिए जहाज भेजने और फिर उसे मंजिल तक पहुंचाने की लॉजिस्टिक्स खुद संभालनी पड़ती है। एफओबी डील से भारतीय रिफाइनरियों को लागत कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि टैंकर ढूंढना और हासिल करना आसान काम नहीं है। फिर भी कंपनियां लागत कम करने और कच्चे तेल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए नए विकल्प तलाश रही हैं। इंडियन ऑयल, रिलायंस, भारत पेट्रोलियम, नायरा एनर्जी, सिनोकोर, डायनाकोम, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और लीला ग्लोबल को टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।

युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंची शिपमेंट

सूत्रों के मुताबिक हाल के हफ्तों में मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की शिपमेंट में भी सुधार आया है। जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी ने हाल में एक नोट में कहा कि मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की शिपमेंट अब युद्ध से पहले के लेवल के 98 फीसदी पर है। इस सुधार के साथ भारतीय रिफाइनरियों के लिए फारस की खाड़ी से कच्चा तेल लाने की स्थिति पहले की तुलना में बदली है। होर्मुज से तेल की आवाजाही में सुधार और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के दोबारा चालू होने का असर भी रणनीति पर पड़ा है। ऐसे में सस्ता कच्चा तेल हासिल करने की कोशिश में भारतीय कंपनियां टैंकर किराए पर लेने, एफओबी डील करने और शिपिंग की जिम्मेदारी खुद संभालने जैसे विकल्पों पर आगे बढ़ रही हैं।