BSP में राजनीतिक विवाद के बीच मायावती का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी के भीतर चल रहा राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बसपा प्रमुख मायावती ने पहले बड़े भतीजे आकाश आनंद पर भरोसा जताया। उन्हें राजनीतिक उत्तराधिकारी तक घोषित कर दिया। लेकिन, पिछले तीन वर्षों में तीन बार बसपा प्रमुख ने आकाश आनंद को तीन बार तमाम पदों से हटाया। अब दूसरी बार पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
वहीं, अपने दूसरे भतीजे ईशान आनंद को वह राजनीति में एंट्री दे चुकी हैं। उन्हें पार्टी में नॉर्थ इंडिया का प्रभारी बनाया गया। अब बसपा प्रमुख मायावती ने राजनीतिक उत्तराधिकारी के मसले पर स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने साफ किया है कि उनके भाई आनंद कुमार के बेटों में किसी को अब बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिलेगी।
इस मामले में उन्होंने आनंद कुमार की इकलौती बेटी दीपिका आनंद के नाम का प्रस्ताव उनको राजनीतिक मदद के लिए दिया है। साथ ही, आनंद कुमार के बेटों के लिए नो-एंट्री की बात कही गई है।
मायावती ने परिवारवाद को किया खारिज
दरअसल, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने पार्टी में परिवारवाद को सिरे से खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया एक्स पर बेहद सक्रिय मायावती ने शनिवार को भी अपनी एक पोस्ट से पार्टी की नीति और सिद्धांत को काफी स्पष्ट कर दिया है। बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत दे दिए हैं। उन्होंने संगठन में युवाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही बसपा मुखिया मायावती ने साफ कर दिया है कि उनके भाई आनंद कुमार के बच्चों को BSP में राजनीतिक पद या बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। दरअसल, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बहुजन समाज पार्टी में कोई भी पद देने से साफ मना कर दिया है।
प्रमुख मायावती ने पोस्ट में लिखा कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को पार्टी में कोई छोटा-बड़ा पद नहीं दिया जाएगा। आगे भी उनके बच्चों को पार्टी की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी। बसपा सुप्रीमो ने स्पष्ट कहा कि आनंद कुमार के किसी बेटे को पार्टी में कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
आनंद कुमार की बेटी को लेकर क्या कहा मायावती ने?
आनंद कुमार जरूरत पड़ने पर अपनी छोटी बेटी दीपिका की मदद ले सकते हैं या उसे अपनी जिम्मेदारी दे सकते हैं, लेकिन दोनों बेटों में से किसी को भी कुछ बड़ा पद नहीं दिया जाएगा।
अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन है दीपिका आनंद, जिसका मायावती BSP में ‘सरप्राइज एंट्री’ करवाना चाहती हैं? दरअसल, कुमारी दीपिका आनंद बसपा प्रमुख मायावती की भतीजी और छोटे भाई आनंद कुमार की इकलौती बेटी हैं।
आनंद कुमार बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और उनकी गिनती पार्टी के ताकतवर नेताओं में से होती है। वह पर्दे के पीछे से हमेशा काम करने वाले नेता के तौर पर मायावती के साथ रहे। उनकी बेटी दीपिका आनंद को लेकर अब तक कोई चर्चा सामने नहीं आई थी। अब अचानक मायावती ने आनंद कुमार के सामने उनकी मदद के लिए दीपिका के नाम का प्रस्ताव दे दिया है।
बता दें, दीपिका आनंद इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। अब तक उनकी मीडिया में कोई चर्चा नहीं हुई है।
मायावती ने आनंद कुमार को लेकर बताई वजह
वहीं, मायावती ने भाई आनंद कुमार की मदद लेने का भी कारण बताया। सोशल मीडिया एक्स पर किए गए लॉन्ग पोस्ट में मायावती ने कहा कि मेरे अविवाहित होने के कारण मुझे मजबूरी में अपने सभी सगे भाई-बहनों में से किसी एक को अपने पास रखने की जरूरत पड़ी। आखिरकार, मैंने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखा।
मायावती ने कहा कि आनंद मेरी देखभाल करने के साथ-साथ मेरी पूरी निगरानी में पार्टी की अहम जिम्मेदारियों को भी काफी लंबे समय से निभा रहे हैं। इसका लाभ अब उनके परिवार के लोग भी उठाएं, यह पार्टी एवं मूवमेंट के हित में सही नहीं होगा।
मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि आनंद कुमार अपने दोनों बेटों या आगे उनके बच्चों को यह जिम्मेदारी नहीं सौंपेंगे। हालांकि, अगर दीपिका तैयार नहीं होतीं तो पार्टी की सहमति से दलित समाज के किसी मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
परिवारवाद के खिलाफ मायावती ने दिया कांशीराम का उदाहरण
मायावती का कहना है कि वे कांशीराम की तरह ही परिवारवाद के खिलाफ मजबूती से खड़ी हैं। मायावती ने स्पष्ट किया है कि बसपा को परिवारवाद मुक्त रखना बहुत जरूरी है, जिससे समाज के लोग आंदोलन से जुड़ सकें।
इसके साथ ही मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में सर्वसमाज के कर्मठ और युवा प्रतिभाओं को उम्मीदवार बनाने को प्राथमिकता देने के निर्देश पर भी अमल किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी के जरिए आंबेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ाया जा सके।
इस पूरे फैसले के बाद पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव और संगठन में युवाओं की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, दीपिका आनंद का नाम सामने आने से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में उन्हें संगठन में कोई महत्वपूर्ण भूमिका मिल सकती है?
मायावती ने BSP सरकारों के कामों का भी किया जिक्र
इसके अलावा मायावती ने अपने पोस्ट में BSP की चार सरकारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकारों में कानून-व्यवस्था, जनहित, जनकल्याण और विकास के कामों पर जोर दिया गया।
उन्होंने बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ सरकारी नौकरी, रोजगार, स्कूल, अस्पताल, शहरी और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों का जिक्र कर कहा कि उनके कार्यकाल में स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी छात्रावास, ट्रेनिंग सेंटर और पार्क बनाए गए।
उन्होंने दावा किया कि इन कामों की वजह से लोगों का मजबूरी में पलायन भी काफी हद तक रुका।
मीडिया और सोशल मीडिया के कथित प्रचार से सावधान रहने की अपील
BSP सुप्रीमो ने पार्टी कार्यकर्ताओं को विरोधी दलों और संगठनों के साथ-साथ मीडिया और सोशल मीडिया पर चलने वाले कथित प्रचार से भी सावधान रहने को कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि BSP को उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने से रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपने अंबेडकरवादी मिशन में लगातार जुटे रहने की अपील की। इसके साथ ही मायावती ने उन खबरों को भी गलत बताया, जिनमें कहा जा रहा है कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते BSP से निकाले गए नेताओं को वापस लिया जा सकता है।
उन्होंने इसे फेक न्यूज बताया और साफ कहा कि ऐसे लोगों को BSP में वापस नहीं लिया जाएगा।
क्या BSP में होने वाला है कोई बड़ा उलटफेर?
फिलहाल अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दीपिका आनंद पार्टी ज्वाइन करती हैं या BSP में कोई और बड़ा उलटफेर होने वाला है? आकाश आनंद और ईशान आनंद के बाद अब दीपिका आनंद का नाम सामने आने से बहुजन समाज पार्टी की आगे की राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अब देखने वाली बात होगी कि मायावती के इस फैसले के बाद दीपिका आनंद को पार्टी में किस तरह की भूमिका मिलती है और क्या वह सक्रिय राजनीति में कदम रखती हैं। आपको क्या लगता है, अपनी राय हमें कमेंट्स में जरूर बताएं।


