Boeing 747-8 से भारत आए जिनपिंग, इस विमान की ताकत जानकर चौंक जाएंगे

  • September 12, 2026
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Boeing 747-8 विमान से भारत पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

शी जिनपिंग किस विमान से भारत पहुंचे?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जिस प्लेन से भारत पहुंचे… आखिर उस विमान में ऐसा क्या है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया? आखिर इस विमान की रफ्तरार कितनी खतरनाक है ? कितनी दूर तक बिना रुके उड़ सकता है ये विमान? क्या इसमें दुश्मन के रडार को चकमा देने की क्षमता भी है? और सबसे बड़ा सवाल—शी जिनपिंग की इस हाई-प्रोफाइल यात्रा के लिए इसी विमान को क्यों चुना गया?

दरसल ब्रिक्स सम्मेलन 2026 में हिस्सा लेने के लिए शनिवार दोपहर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली पहुंच गए. वह एक बड़े डेलिगेशन के साथ भारत आए हैं. करीब सात साल बाद भारत का दौरा कर रहे जिनपिंग रविवार तक भारत में रहेंगे और इस दौरान उनकी पीएम नरेंद्र मोदी और दुनिया के अन्य नेताओं से मुलाकात हो सकती है. शी जिनपिंग की गिनती इस वक्त दुनिया के दूसरे सबसे ताकतवर मुल्क के नेता के रूप में है. मौजूदा वक्त के वर्ल्ड ऑर्डर में अमेरिका को अगर कोई देश सीधी टक्कर दे रहा है तो वह चीन है. इतने ताकतवर राष्ट्राध्यक्ष होने के कारण शी जिनपिंग की हर एक गतिविधि और उनकी हर एक चीज पर नजर जाना स्वाभाविक है।

BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंचे जिनपिंग की यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर है…लेकिन इस हाई-प्रोफाइल दौरे के बीच एक और चीज चर्चा में है—वो विमान… जिससे चीन के राष्ट्रपति भारत पहुंचे हैं।

Boeing 747-8 को क्यों इस्तेमाल करते हैं चीनी राष्ट्रपति?

आपको बता दे की चीन के राष्ट्रपति की लंबी दूरी की विदेशी यात्राओं के लिए Boeing 747-8 का इस्तेमाल किया जाता है. यह विमान अमेरिकी कंपनी बोइंग ने बनाया है और मूल रूप से एयर चाइना के बेड़े का हिस्सा है. हालांकि, राष्ट्रपति जब इस विमान से यात्रा करते हैं तो यह सामान्य कमर्शियल फ्लाइट नहीं रहता. उनकी यात्रा से पहले विमान की पूरी सुरक्षा जांच होती है और इसे VVIP यात्रा के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाता है।

इसके संचालन और सुरक्षा में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स की 34वीं डिवीजन तैनात रहती है. दिलचस्प बात यह है कि यह विमान स्थायी रूप से राष्ट्रपति के लिए समर्पित नहीं है. राष्ट्रपति की यात्रा के बाद इसे दोबारा सामान्य कमर्शियल सेवा में लगाया जा सकता है। दरसल दुनिया के कई देशों के नेता अपने आधिकारिक दौरे पर विशेष रूप से तैयार किए गए विमानों से यात्रा करते हैं. ये विमान सिर्फ यात्रा का साधन नहीं बल्कि उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह काम करते हैं. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले विमान को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है।

Boeing 747-8 की पहचान और अंदर की खासियत

कई लोग इसे बोइंग 787-8 बताते हैं, लेकिन वास्तविकता में चीन मुख्य रूप से बोइंग 747-8 मॉडल का इस्तेमाल करता है. यह एयर चाइना की उड़ान है जिस पर विशेष रूप से वीवीआईपी कॉन्फिगरेशन किया गया है. विमान का रजिस्ट्रेशन नंबर बी-2479 है. यह 2014 में एयर चाइना को सौंपा गया था. वही 2016 के आसपास इसे राष्ट्रपति स्तर की यात्रा के लिए पूरी तरह से बदल दिया गया।

यह विमान सामान्य यात्री विमान की तरह दिखता है लेकिन अंदरूनी हिस्सा पूरी तरह अलग है. इसमें राष्ट्रपति के लिए निजी सूट, बैठक कक्ष, कार्यालय और सुरक्षित संचार व्यवस्था होती है. चुकि चीन का तरीका अमेरिका से थोड़ा अलग है. अमेरिका के पास स्थायी रूप से समर्पित एयर फोर्स वन है जबकि चीन अक्सर राष्ट्रीय एयरलाइन के विमान को जरूरत के हिसाब से तैयार करके इस्तेमाल करता है. इससे सुरक्षा और लचीलापन दोनों मिलता है।

Boeing 747-8 की रफ्तार और कितनी है रेंज?

दरअसल Boeing 747-8 एक बड़े आकार का चौड़े धड़ वाला विमान है. इसकी लंबाई लगभग 76 मीटर और पंखों का फैलाव करीब 68 मीटर है. यह 4 इंजन वाला विमान है जिसमें जनरल इलेक्ट्रिक जीईनएक्स-2बी67 इंजन लगे होते हैं. प्रत्येक इंजन करीब 66,500 पाउंड थ्रस्ट देता है. अधिकतम टेकऑफ वजन लगभग 4,47,700 किलोग्राम है। बिना ईंधन भरे इसकी रेंज 14,000 किलोमीटर से ज्यादा हो सकती है, जिससे अंतरमहाद्वीपीय यात्रा आसानी से हो जाती है. क्रूज स्पीड मैक 0.855 यानी लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटा के आसपास है. अधिकतम उड़ान ऊंचाई 43,000 फीट तक पहुंच सकती है।

क्या चीनी राष्ट्रपति के विमान में मिसाइल डिफेंस है?

आपको बता दे की चीनी राष्ट्रपति के विमान में सैन्य स्तर की सुरक्षा व्यवस्थाएं लगाई जाती हैं. इसमें मिसाइल डिफेंस सिस्टम शामिल है जो आने वाली मिसाइलों का पता लगाकर काउंटरमेजर सक्रिय कर सकता है. इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स से बचाव के लिए शिल्डिंग दी गई है ताकि परमाणु विस्फोट जैसी स्थिति में भी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम काम करते रहें।

एन्क्रिप्टेड संचार व्यवस्था के जरिए विमान से सरकार और सैन्य कमांड से सुरक्षित बातचीत संभव है. दरसल सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम से दुनिया के किसी भी कोने से संपर्क बना रहता है. विमान को खतरे का पता लगाने वाले सेंसर और जैमिंग सिस्टम से लैस माना जाता है. उड़ान से पहले पूरी तरह से सुरक्षा जांच होती है. क्रू और स्टाफ का चयन बहुत सावधानी से किया जाता है। विमान को मोबाइल कमांड सेंटर की तरह डिजाइन किया गया है जहां से चीनी राष्ट्रपति यात्रा के दौरान भी देश के मामलों पर नजर रख सकते हैं।

चीन के विमान और एयर फोर्स वन में क्या अंतर है?

वही अमेरिकी राष्ट्रपति का एयर फोर्स वन बोइंग 747-200बी पर आधारित वीसी-25ए मॉडल है. जल्द ही नए 747-8 आधारित विमान आने वाले हैं. इसमें लगभग 4,000 वर्ग फीट का क्षेत्र है जिसमें ओवल ऑफिस जैसा कक्ष, कॉन्फ्रेंस रूम, मेडिकल सूट और मीडिया एरिया शामिल हैं।

सबसे बड़ी खासियत एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की क्षमता है जिससे विमान घंटों हवा में रह सकता है. इसमें एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, लेजर आधारित मिसाइल डिफेंस और न्यूक्लियर ईएमपी प्रोटेक्शन है। चीनी विमान भी 747 सीरीज का है लेकिन यह स्थायी सैन्य विमान नहीं बल्कि एयरलाइन मॉडल पर आधारित है. अमेरिका का विमान पूरी तरह समर्पित और ज्यादा खुलेआम सुरक्षा सुविधाओं वाला है जबकि चीन का विमान बाहरी रूप से सामान्य दिखता है. अमेरिकी विमान की परिचालन लागत बहुत ज्यादा है जबकि चीन का तरीका अपेक्षाकृत किफायती और लचीला है।

मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

गौरतलब है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की होने वाली मुलाकात पर सिर्फ भारत और चीन ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजर है. इसकी वजह दोनों देशों की बड़ी आर्थिक और रणनीतिक ताकत है. भारत और चीन एशिया की दो बड़ी शक्तियां हैं. दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी काफी अहम हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक में सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ व्यापार, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषय भी अहम हो सकते हैं।

भारत-चीन रिश्ते किस दिशा में जाएंगे?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शी जिनपिंग के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के रिश्ते किस दिशा में जाते हैं. चीन ने भले ही अच्छे पड़ोसी, सहयोग और स्थिर संबंधों की बात कही है, लेकिन असली परीक्षा दोनों देशों के बीच बातचीत और जमीन पर होने वाले फैसलों की होगी। भारत भी सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती के लिए अहम मानता रहा है. ऐसे में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बैठक में बातचीत और सहयोग के साथ पुराने मतभेदों को संभालने का रास्ता भी तलाशा जा सकता है।