ब्रिक्स देशों में डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्रा में कारोबार बढ़ाने का सुझाव, पीयूष गोयल ने रखी बात

  • September 12, 2026
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ब्रिक्स में कारोबार के लिए स्थानीय मुद्रा और भुगतान व्यवस्था का प्रस्ताव

स्थानीय मुद्रा में कारोबार का सुझाव

नई दिल्ली, ब्रिक्स देशों के बीच कारोबार और पैसे का लेनदेन आसान बनाने के लिए भारत ने बड़ा सुझाव दिया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि ब्रिक्स देशों को आपस में अपनी-अपनी करेंसी में कारोबार बढ़ाना चाहिए। साथ ही एक-दूसरे के तेज ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को भी जोड़ना चाहिए। ब्रिक्स में कारोबार को आसान बनाने के लिए यह सुझाव दिया गया है। गोयल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम में यह बात कही। भारत की अध्यक्षता में दो दिन का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शनिवार से शुरू हो रहा है।

भुगतान व्यवस्था जोड़ने की तैयारी

पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देश अपने पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ें। साथ ही एक-दूसरे की करेंसी में कारोबार करें और नई तकनीक के क्षेत्र में मिलकर आगे बढ़ें। भारत का यूपीआई अभी दुनिया के 11 देशों से जुड़ चुका है और इसे आगे और देशों तक पहुंचाने की तैयारी है। ब्रिक्स देशों में भारत ने संयुक्त अरब अमीरात के तेज पेमेंट सिस्टम “आनी” को यूपीआई से जोड़ा है। रूस के साथ भी अपनी-अपनी करेंसी में कारोबार के भुगतान की संभावना तलाशी गई है।

क्या डॉलर पर निर्भरता होगी कम?

ब्रिक्स देशों के बीच डॉलर के बजाय अपनी करेंसी में कारोबार की चर्चा काफी समय से चल रही है। करीब तीन साल पहले ब्रिक्स के लिए एक साझा करेंसी बनाने का विचार भी सामने आया था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के विरोध और टैरिफ की चेतावनियों के बाद यह मामला पीछे चला गया। इसके बावजूद ब्रिक्स देश चाहते हैं कि डॉलर के अलावा भी आपसी कारोबार के भुगतान का एक रास्ता मौजूद हो। यह रूस और ईरान जैसे देशों के लिए ज्यादा अहम है, क्योंकि इन पर आर्थिक पाबंदियों का खतरा रहता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक पाबंदियां लगाई थीं। रूस के कई बड़े बैंकों को अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था स्विफ्ट से भी बाहर कर दिया गया था। रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने बताया कि तीन साल पहले रूस के निर्यात से जुड़े 85 फीसदी भुगतान डॉलर और यूरो में होते थे। अब इनकी हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 11 फीसदी रह गई है। रूस अब ज्यादातर कारोबार का भुगतान साझेदार देशों की करेंसी में कर रहा है।

ब्रिक्स ग्रीन एक्सचेंज का सुझाव

रूस ने ब्रिक्स देशों के लिए “ब्रिक्स ग्रीन एक्सचेंज” बनाने का सुझाव भी दिया है। यह एक ऐसा साझा बाजार होगा, जहां अलग-अलग देशों के उत्पादक, कारोबारी और खरीदार सीधे सौदे कर सकेंगे।इसके अलावा रूस ने ब्रिक्स देशों के विशेष आर्थिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ने के लिए एक संगठन बनाने का सुझाव दिया है। ब्रिक्स में कारोबार के लिए स्थानीय मुद्रा और भुगतान व्यवस्था को अहम विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।