ओवैसी काटेंगे अखिलेश के मुस्लिम वोट? यूपी चुनाव से पहले सपा की बढ़ी टेंशन

  • October 5, 2026
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असदुद्दीन ओवैसी और अखिलेश यादव के बीच यूपी चुनाव को लेकर सियासी चर्चा

यूपी चुनाव से पहले ओवैसी ने सपा को दिया गठबंधन का प्रस्ताव

क्या असदुद्दीन ओवैसी अखिलेश यादव को बड़ा झटका देने जा रहे हैं? समाजवादी पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन का रास्ता खोलेगी? क्या यूपी चुनाव में ओवैसी अकेले मैदान में उतरकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका देने वाले हैं? 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम वोटों की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। चुनाव से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और INDIA गठबंधन को गठबंधन का प्रस्ताव दे दिया है। ओवैसी ने तीसरी बार बीजेपी सरकार बनने से रोकने के लिए गठबंधन की बात कही और चेतावनी दी कि अगर सपा साथ नहीं देती तो वे अकेले चुनाव लड़ेंगे। इसके साथ ही INDIA गठबंधन पर ओवैसी ने निशाना साधा।

श्रावस्ती में ओवैसी ने सपा और INDIA गठबंधन पर साधा निशाना

दरअसल यूपी में अयोध्या से 100 किलोमीटर दूर श्रावस्ती में बीते रविवार को असदुद्दीन ओवैसी ने तकरीर की। यहां ओवैसी बीजेपी से ज्यादा समाजवादी पार्टी को टारगेट करते नजर आए। सीएम योगी आदित्यनाथ से अधिक ओवैसी इन दिनों अखिलेश यादव पर हमलावर हैं। ओवैसी का कहना है कि अखिलेश यादव मुसलमानों के वोट लेकर चुप हो जाते हैं और मदरसों के बंद होने या मुसलमानों के घरों पर बुलडोजर चलने का विरोध भी नहीं करते हैं।

दरअसल, ओवैसी सपा के साथ अलायंस में आना चाहते थे, लेकिन अखिलेश ने इस बारे में बात भी नहीं की। तो अब ओवैसी इस बात का बदला ले रहे हैं। चूंकि यूपी चुनाव में मुस्लिम वोट बहुत बड़ा फैक्टर है। इसलिए यूपी में सियासत की ऐसी बिसात बिछ रही है, जिसमें सस्पेंस बहुत है। दरअसल श्रावस्ती में एक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी और INDIA गठबंधन पर ओवैसी ने निशाना साधा। ओवैसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत देश के 20 करोड़ मुसलमान किसी की बपौती नहीं हैं।

ओवैसी बोले- मुसलमान किसी की बपौती नहीं

उन्होंने कहा कि अगर पार्टियां मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक या अपनी संपत्ति समझती हैं तो आने वाले चुनाव में उन्हें इसका जवाब मिलेगा। दरअसल इस कार्यक्रम में ओवैसी ने समाजवादी पार्टी को गठबंधन का प्रस्ताव भी दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में तीसरी बार BJP की सरकार नहीं बननी चाहिए। उन्होंने बीजेपी को रोकने के लिए सपा और INDIA गठबंधन के सामने गठबंधन का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि उनके प्रस्ताव को कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने प्रस्ताव के साथ ही समाजवादी पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सपा उनका साथ ठुकराती है तो वे अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे।

उन्होंने समाजवादी पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा, ‘यह हमारी कमजोरी नहीं है, यह हमारी ताकत की निशानी है. अगर आप हाथ ठुकराते हैं तो समाजवादी पार्टी सुन लें कि यह हाथ बहुत ताकतवार है।’

ओवैसी ने मुसलमानों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने का लगाया आरोप

इस दौरान ओवैसी ने आरोप लगाया कि पिछले 70-75 सालों से मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि लोगों की आंखों के सामने 200 से ज्यादा मदरसे सील कर दिए गए, लेकिन समाजवादी पार्टी, बीजेपी या अन्य कथित धर्मनिरपेक्ष पार्टी ने उनकी मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया। उन्होंने दावा किया कि 18 से ज्यादा मदरसे गिरा दिए गए।

उन्होंने सवाल किया कि तब समाजवादी पार्टी के नेता कहां थे। ओवैसी ने दावा किया कि यह पार्टियां मुसलमानों से नहीं, उनके वोट से प्यार करती हैं। उन्होंने कहा कि अन्य पार्टियां मुसलमानों को न्याय नहीं दिलाना चाहती बल्कि उन्हें कमजोर करना चाहती हैं। ओवैसी के इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में सपा और AIMIM के बीच संभावित समीकरण को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। वहीं, उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की रणनीति भी चर्चा में है।

ओम प्रकाश राजभर ने ओवैसी के बयान पर क्या कहा?

इधर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ओवैसी सही कह रहे हैं। राजभर ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि इन पार्टियों ने मुसलमानों का इस्तेमाल केवल रैलियों में कालीन यानी (दरी) बिछाने तक सीमित रखा, लेकिन मुख्यमंत्री पद देने की बात कभी नहीं की।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर कड़ा प्रहार करते हुए राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने प्रदेश में चार बार मुसलमानों के समर्थन से सरकार बनाई। इसके बावजूद उन्होंने मुस्लिमों को केवल रैलियों में दरी बिछाने के काम में लगाए रखा। एक बार भी किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री बनाने की बात नहीं की गई। सरकार बनते ही अखिलेश यादव ने सिर्फ अपने समुदाय के लोगों को बढ़ावा दिया और मुसलमानों को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया।

सीएम योगी का हिंदुत्व वोट को लेकर क्या बयान आया?

दूसरी तरफ, सीएम योगी आदित्यनाथ यूपी में हिंदुत्व वोट का किला बनाकर चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। हाल में सीएम योगी ने एक रैली में कहा था कि आज भी वे बांटने वाले तत्व जाति के नाम पर, क्षेत्र के नाम पर, भाषा के नाम पर और तमाम अन्य बातों के आधार पर समाज की एकता को छिन्न-भिन्न करने का काम कर रहे हैं। ये राष्ट्रमाता के प्रति अपराध है। भारत माता के प्रति अपराध है। अपने पूर्वजों के प्रति अपराध है। भारत की स्वाधीनता को फिर से खतरे में डालने की एक शरारतपूर्ण चेष्टा है। सीएम योगी के इस बयान के साथ ही यूपी की राजनीति में जाति, क्षेत्र, भाषा और सामाजिक एकता को लेकर बहस भी सामने आती रही है। वहीं ओवैसी लगातार मुस्लिम राजनीतिक हिस्सेदारी और सपा के साथ संभावित गठबंधन को लेकर अपना पक्ष रख रहे हैं।

अखिलेश यादव के लिए ओवैसी की चुनौती क्यों अहम बताई जा रही है?

दरअसल अखिलेश यादव की पार्टी को जितना डर ओवैसी से लगता है उतना डर किसी से नहीं लगता। वजह ये है कि यूपी का मुसलमान अभी तक समाजवादी पार्टी को एकतरफा सपोर्ट करता रहा है। 2022 में सपा गठबंधन को 79 प्रतिशत और 2024 में सपा-कांग्रेस अलायंस को 92 फीसदी मुस्लिम वोट मिले थे। अगर ओवैसी ने इस वोट बैंक में डेंट मार दिया तो अखिलेश का दोबारा मुख्यमंत्री बनने का सपना सपना ही रह जाएगा।

मजलिस के नेता ने INDIA अलायंस में शामिल होने की अर्जी लगाई थी और 2 अक्टूबर तक की डेडलाइन दी थी। वो डेडलाइन बीत चुकी है और अब ओवैसी मुस्लिम वोट के तलबगार बनकर यूपी में खूब घूम रहे हैं। फिलहाल ओवैसी अखिलेश यादव के पाले में गेंद डाल दी है। उन्होंने बीजेपी को रोकने की बात भी कही है… लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि AIMIM को नजरअंदाज करना उनके मुताबिक विपक्ष के लिए भारी पड़ सकता है।

क्या सपा और AIMIM के बीच गठबंधन होगा?

अब देखना होगा कि अखिलेश यादव इस चुनौती का जवाब कैसे देते हैं। क्या सपा AIMIM के साथ गठबंधन का रास्ता खोलेगी? या फिर ओवैसी अकेले मैदान में उतरकर मुस्लिम राजनीतिक हिस्सेदारी का नया समीकरण बनाने की कोशिश करेंगे? 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले AIMIM प्रमुख की ओर से सपा और INDIA गठबंधन को दिया गया यह प्रस्ताव अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ ओवैसी बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने साथ नहीं मिलने की स्थिति में अकेले चुनाव लड़ने की बात भी कही है। ऐसे में आगे की राजनीतिक रणनीति और संभावित गठबंधन को लेकर स्थिति आने वाले समय में और स्पष्ट होगी।