BJP की राज्यसभा सूची में श्रुति गंगवार का नाम
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में राज्यसभा सीटों के चुनाव के लिए जिन 8 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है, वे सभी नए चेहरे हैं। योगी सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह का एक लंबा करियर है तो वहीं विद्यासागर सोनकर भी पुराने नेता हैं और विभिन्न पदों पर रहे हैं। लेकिन अन्य 6 नेता चर्चाओं से परे रहे हैं और कभी बड़ी जिम्मेदारी नहीं संभाली। ऐसे में इन लोगों को सीधे उच्च सदन भेजने के लिए उम्मीदवार बनाया जाना अन्य लोगों के अलावा खुद उन्हें भी चौंका रहा होगा। इन्हीं में से एक नाम श्रुति गंगवार का है, जिनका जिक्र उम्मीदवारों की लिस्ट में सबसे आखिरी में है।
वह कुर्मी समाज से आती हैं और एक लंबी विरासत का हिस्सा हैं। वहीं राज्यसभा की टिकट मिलने पर श्रुति गंगवार ने कहा, “यह बिल्कुल Unexpected, था और मैं हैरान हूं. मैं पीएम मोदी, सीएम योगी और सभी का धन्यवाद करती हूँ. यह दिखाता है कि पीएम मोदी महिलाओं और महिला सशक्तिकरण का कितना समर्थन करते हैं. मैं पार्टी की सभी उम्मीदों पर खरी उतरूँगी और कभी अपनी पार्टी को निराश नहीं होने दूंगी।” तो आइये विस्तार से जानते हैं कि आखिर कौन हैं श्रुति गंगवार?
कौन हैं श्रुति गंगवार?
दरअसल श्रुति गंगवार भारतीय जनता पार्टी की उभरती हुई महिला नेता हैं। वे उत्तर प्रदेश के दिग्गज राजनेता और झारखंड के वर्तमान राज्यपाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री और बरेली से 8 बार के सांसद संतोष गंगवार की बेटी हैं। एक मजबूत राजनीतिक घराने में पली-बढ़ीं श्रुति लंबे समय से जनसेवा और पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रही हैं। इसके अलावा वह बरेली के अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष के रूप में भी अपनी प्रशासनिक क्षमताएं दिखा चुकी हैं।
श्रुति गंगवार की प्रोफाइल को देखें तो उनकी राजनीतिक पहचान केवल पारिवारिक विरासत तक सीमित नहीं है। आईआईटी रुड़की से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और आईआईएम बंगलूरू से एंटरप्रेन्योरशिप मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद उन्होंने आईटी क्षेत्र में करियर शुरू किया। इंफोसिस से पेशेवर सफर की शुरुआत करने के बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं पर काम किया।
IT करियर से उद्यमिता तक का सफर
वहीं श्रुति की उद्यमी पहचान का एक महत्वपूर्ण पड़ाव 2012 रहा। उनके अनुसार, उस दौर में उन्होंने बंगलूरू में शिक्षा और आईटी क्षेत्र से जुड़ा एडटेक स्टार्टअप शुरू किया। इसके बाद 2016 में नोएडा में आईटी सर्विसेज कंपनी स्थापित की। इसका फोकस रोजगार सृजन के साथ छोटे शहरों से आने वाले युवाओं और महिलाओं को अवसर देने पर रहा। दरअसल श्रुति गंगवार का बरेली से संस्थागत जुड़ाव अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के जरिए मजबूत हुआ। अगस्त 2024 में वह बैंक की चेयरपर्सन निर्विरोध चुनी गई थीं। इससे पहले अपनी मां सौभाग्यवती गंगवार के निधन के बाद वह बैंक के निदेशक मंडल में निर्विरोध चुनी गई थीं। बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी श्रुति गंगवार चेयरपर्सन के रूप में दर्ज हैं।
बैंकिंग में भी श्रुति गंगवार की भूमिका
बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में उन्होंने डिजिटल वित्त, वित्तीय समावेशन, साइबर सुरक्षा और सदस्य शिक्षा को भविष्य की प्राथमिकताओं में रखा है। वहीं श्रुति की प्रोफाइल का एक अन्य पक्ष समाजसेवा है। उनके अनुसार बाल शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अब तक 22 हजार से अधिक स्कूली विद्यार्थियों को शैक्षिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। ग्रामीण और शहरी स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की सुविधा के लिए वाटर कूलर और वाटर टैंक भी स्थापित कराए गए। इसके साथ ही भारत सेवा ट्रस्ट के माध्यम से पिछले करीब 16 वर्षों से मोतियाबिंद और नेत्र परीक्षण शिविरों के आयोजन का दावा भी उनकी प्रोफाइल में किया गया है। इन शिविरों के जरिये हजारों लोगों को निशुल्क जांच और उपचार उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में समाजसेवा
दिल्ली में रहते हुए बरेली के गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के उपचार और संबंधित संस्थानों के बीच समन्वय में भी उनकी भूमिका बताई जाती है। दरअसल राजनीति में श्रुति की सक्रियता भी नई नहीं बताई जाती। उनके अनुसार 2004, 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने भाजपा के अभियानों में भाग लिया। 2019 में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ क्षेत्र में अभियान चलाया और 2022 के विधानसभा चुनाव में बरेली लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभाओं में संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी की। यानी श्रुति गंगवार की प्रोफाइल में राजनीति के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, IT और उद्यमिता से जुड़े अलग-अलग अनुभव भी दिखाई देते हैं।
वहीं श्रुति गंगवार के राजनीतिक सफर को उनके पिता संतोष गंगवार की पृष्ठभूमि से अलग करके देखना मुश्किल है। संतोष गंगवार बरेली से आठ बार लोकसभा सांसद रहे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। वर्तमान में वह झारखंड के राज्यपाल हैं। अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उन्हें बैंक का मुख्य प्रवर्तक और संरक्षक दर्ज किया गया है। यही वजह है कि राज्यसभा टिकट को बरेली की राजनीति में केवल एक नए चेहरे की एंट्री के रूप में नहीं देखा जा रहा। यह संतोष गंगवार की चार दशक से अधिक लंबी राजनीतिक विरासत में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।
राजनीतिक विरासत के साथ अपनी अलग प्रोफाइल
हालांकि श्रुति की अपनी प्रोफाइल में उद्यमिता, बैंकिंग और समाजसेवा का अलग ट्रैक दिखाई देता है। राज्यसभा प्रत्याशी बनने के बाद अब यही अनुभव उनकी राष्ट्रीय राजनीतिक पहचान का आधार बनेगा। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की राज्यसभा सूची में श्रुति गंगवार के साथ पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत भी महिला चेहरों में शामिल हैं। आठ नामों में श्रुति का चयन बरेली के लिए विशेष महत्व रखता है।
हालाँकि संतोष गंगवार की बेटी होना श्रुति के लिए मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि है, लेकिन राज्यसभा में उनकी पहचान उनकी अपनी सक्रियता और मुद्दों पर निर्भर करेगी। उद्यमिता में तकनीक और रोजगार, बैंकिंग में वित्तीय समावेशन और समाजसेवा में शिक्षा-स्वास्थ्य—इन तीन क्षेत्रों का अनुभव उनके सार्वजनिक जीवन की अलग तस्वीर पेश करता है। बरेली की राजनीति में अब सवाल यह नहीं रह गया है कि गंगवार परिवार की अगली पीढ़ी सक्रिय राजनीति में आएगी या नहीं। श्रुति के राज्यसभा प्रत्याशी घोषित होने के बाद यह अध्याय शुरू हो चुका है।
नई पीढ़ी और नए पेशेवर अनुभवों के साथ आगे बढ़ेगा सफर
संतोष गंगवार ने बरेली की लोकसभा राजनीति में जिस लंबे दौर का नेतृत्व किया, श्रुति गंगवार उसी विरासत को उच्च सदन के रास्ते नई पीढ़ी और नए पेशेवर अनुभवों के साथ आगे ले जाने की तैयारी में हैं। उनकी प्रोफाइल में एक तरफ मजबूत राजनीतिक विरासत दिखाई देती है तो दूसरी तरफ IT, उद्यमिता, बैंकिंग और समाजसेवा का अनुभव भी नजर आता है।
राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद अब इन अनुभवों के साथ श्रुति गंगवार की राष्ट्रीय राजनीतिक पहचान का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। बरेली से जुड़े उनके संस्थागत जुड़ाव, बैंकिंग की भूमिका, समाजसेवा और पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में भागीदारी अब उनके सार्वजनिक जीवन के अगले चरण का हिस्सा हैं। इस तरह श्रुति गंगवार की प्रोफाइल केवल राजनीतिक परिवार से आने तक सीमित नहीं है। उनके अपने पेशेवर अनुभव और सामाजिक गतिविधियों का भी एक अलग ट्रैक रहा है, जिसे राज्यसभा प्रत्याशी बनने के बाद नई राजनीतिक भूमिका के संदर्भ में देखा जा रहा है।


