नशामुक्त मध्य प्रदेश के लिए नशे का पूरा सिंडिकेट होगा ध्वस्त, सीएम मोहन यादव का एलान

  • October 5, 2026
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मुख्यमंत्री मोहन यादव नशामुक्त मध्य प्रदेश और मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई पर समीक्षा बैठक में

2029 तक मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य प्रदेश में मादक पदार्थों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू की गई है। राज्य सरकार और पुलिस अब मादक पदार्थों, साइबर अपराध, अवैध हथियारों तथा संगठित अपराध के नेटवर्क पर लगातार प्रहार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशामुक्त मध्य प्रदेश बनाने के लिए पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाएगा। प्रदेश को वर्ष 2029 तक पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लिए हर स्तर पर सघन प्रयास किए जाएंगे।

कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा पर उच्च स्तरीय समीक्षा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश में कानून-व्यवस्था एवं आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मादक पदार्थ नियंत्रण, साइबर अपराध, आतंकवाद प्रतिरोध, विदेशियों की आवाजाही, हथियारों की तस्करी, संगठित अपराध, भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस आधुनिकीकरण, पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा समन्वय, आपदा प्रबंधन और शत्रु संपत्ति के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की गई। पहले इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी शामिल होने की जानकारी थी। बाद में मुख्यमंत्री ने बैठक की अध्यक्षता की। अमित शाह देर शाम भोपाल से दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मादक पदार्थों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू की गई है। इसके लिए केवल नशे की बिक्री या उपयोग तक सीमित कार्रवाई के बजाय पूरे नेटवर्क और सिंडिकेट को निशाना बनाया जाएगा। राज्य सरकार और पुलिस मादक पदार्थों के साथ-साथ साइबर अपराध, अवैध हथियारों और संगठित अपराध के नेटवर्क पर भी लगातार कार्रवाई कर रही है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक मध्य प्रदेश को पूरी तरह नशामुक्त बनाना है। इसके लिए राज्य स्तर से लेकर स्थानीय स्तर तक लगातार प्रयास किए जाने की बात कही गई है।

तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा

बैठक में तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर भी जानकारी दी गई। अधिकारियों के अनुसार मध्य प्रदेश ने इन कानूनों के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय काम किया है। राज्य में 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल करने की दर 69 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 59 प्रतिशत से अधिक बताई गई। ई-साक्ष्य की सीधी डिलीवरी में भी राज्य देश में तीसरे स्थान पर है। ई-साक्ष्य का कवरेज पिछले वर्ष के 17 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गया है। साथ ही सभी जिलों में मोबाइल फोरेंसिक वैन उपलब्ध होने की जानकारी भी बैठक में दी गई।

पड़ोसी राज्यों के साथ अपराध नेटवर्क पर समन्वय

बैठक में मध्य प्रदेश की उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ से लगी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए अपराधियों की अंतरराज्यीय गतिविधियों पर भी चर्चा हुई। हथियारों की तस्करी और अपराध के कॉरिडोर पर पड़ोसी राज्यों के साथ सूचनाएं साझा करने तथा समन्वित कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था के सामने मौजूद अंतरराज्यीय अपराध से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी। इसके साथ ही अपराधियों और अपराध नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई गई।

नेटग्रिड के बेहतर इस्तेमाल पर जोर

बैठक में नेटग्रिड के अधिक प्रभावी इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल जरूरी है। आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और तकनीकी संसाधनों का उपयोग अपराध की रोकथाम और जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर दिया।

बैठक में शिक्षण संस्थानों में ‘ड्रग-फ्री कैंपस’ फ्रेमवर्क लागू करने की दिशा में भी जानकारी दी गई। मादक पदार्थों की रोकथाम को केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रखने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में NDPS विशेष न्यायालयों की शीघ्र स्थापना और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन जैसे कदमों पर भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में जांच, कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

साइबर अपराध और अवैध हथियारों पर भी कार्रवाई

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में साइबर अपराध और अवैध हथियारों से जुड़े नेटवर्क पर भी चर्चा हुई। राज्य में कानून-व्यवस्था की चुनौतियों में साइबर अपराध और संगठित अपराध को महत्वपूर्ण विषयों के रूप में शामिल किया गया। सरकार की रणनीति में मादक पदार्थों के साथ-साथ उन अन्य नेटवर्क पर भी कार्रवाई शामिल है, जिनका संबंध संगठित अपराध और अवैध गतिविधियों से है। पुलिस आधुनिकीकरण और तकनीकी क्षमता बढ़ाने को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना गया है।

बैठक में पुलिस आधुनिकीकरण, पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा समन्वय और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। बैठक में IB के निदेशक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के DG सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए। केंद्रीय गृह सचिव की ओर से भी सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम द्वारा राज्यों में आकर व्यवस्थाओं का बारीकी से अध्ययन करना, मार्गदर्शन देना और सहयोग करना सकारात्मक पहल है।

2029 तक नशामुक्त मध्य प्रदेश का लक्ष्य

सरकार ने वर्ष 2029 तक मध्य प्रदेश को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए मादक पदार्थों के पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के साथ-साथ उससे जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करने की रणनीति पर जोर दिया गया है। इस अभियान में पुलिस, प्रशासन, केंद्रीय एजेंसियों और पड़ोसी राज्यों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना गया है। नशे के खिलाफ कार्रवाई के साथ साइबर अपराध, अवैध हथियार, संगठित अपराध और अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क पर कार्रवाई को भी कानून-व्यवस्था की व्यापक रणनीति में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार नशामुक्त मध्य प्रदेश बनाने के लिए हर स्तर पर सघन प्रयास किए जाएंगे और पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने की दिशा में कार्रवाई जारी रहेगी।