कूनो चीते को गोली मारने पर केंद्र सख्त: 5 गोलियां लगने से हुई थी मौत, जांच को भेजी हाई-लेवल टीम

  • October 29, 2026
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कूनो चीता गोलीकांड की जांच के लिए कूनो पहुंची एनटीसीए और डब्ल्यूसीसीबी की टीम

केंद्र सरकार ने मामले को माना अत्यंत गंभीर

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क के 19 महीने के नर चीते (केएनवी 22) की बंदूक की गोली लगने से हुई मौत के मामले को केंद्र सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। देश के इस महत्वाकांक्षी वन्यजीव प्रोजेक्ट को लगे बड़े झटके के बाद केंद्र ने मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच और समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष टीम (हाई-लेवल टीम) रवाना की है। केंद्र सरकार का स्पष्ट रूप से कहना है कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़ा प्रोजेक्ट है, इसलिए दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से पुनः स्थापित की गई चीतों की आबादी की सुरक्षा उच्चतम मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करना सर्वोपरि है। कूनो चीता गोलीकांड की इस अभूतपूर्व घटना ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से लेकर पूरे वन्यजीव महकमे में खलबली मचा दी है।

एनटीसीए और डब्ल्यूसीसीबी के शीर्ष अधिकारी जांच में जुटे

केंद्रीय जांच दल में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के वन महानिरीक्षक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) के अतिरिक्त निदेशक और डब्ल्यूसीसीबी के क्षेत्रीय उप निदेशक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। इस संयुक्त टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे चीते की मौत के सटीक कारणों की गहन जांच करें, सभी उपलब्ध फॉरेंसिक और जमीनी साक्ष्यों की पड़ताल करें तथा मध्य प्रदेश वन विभाग के साथ मिलकर हमलावरों के खिलाफ सख्त व त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

यह चीता नामीबियाई मादा चीता ‘निर्वा’ का 19 महीने का शावक था। यह 25 अक्टूबर को कूनो नेशनल पार्क के सुरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलकर मुरैना के क्षेत्रीय जंगल में लहूलुहान अवस्था में पाया गया था, जिसे उसी दिन श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन की मदद से रेस्क्यू कर जबलपुर भेजा गया था। इस कूनो चीता गोलीकांड की हर कड़ी की कड़ाई से पड़ताल की जा रही है।

सर्जरी के दौरान निकलीं 5 गोलियां, एसटीएफ भी कर रही जांच

जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा सुविधा केंद्र में चीते को गहन देखभाल और आपातकालीन सर्जरी दी गई थी। जटिल सर्जरी के दौरान चिकित्सकों द्वारा उसके शरीर के विभिन्न हिस्सों से बंदूक की पांच गोलियां निकाली गई थीं। मेडिकल जांच में गोलियां लगने के कारण चीते के कई आंतरिक अंगों में गंभीर चोटों और रक्तस्राव की पुष्टि हुई थी। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर को इस युवा चीते ने दम तोड़ दिया। राज्य सरकार ने पहले ही इस जघन्य अपराध की जांच के लिए वन और पुलिस अधिकारियों की एक विशेष कार्य बल (एसटीएफ) गठित कर रखी है। अब केंद्रीय टीम भी राज्य मशीनरी के साथ मिलकर सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन, ट्रैकिंग व्यवस्था की कमियों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों की समीक्षा करेगी। इस प्रकार कूनो चीता गोलीकांड ने चीतों की खुली निगरानी प्रणाली पर बुनियादी सवाल खड़े कर दिए हैं।