ट्रीसा-गायत्री ने रचा इतिहास, WORLD CHAMPIONSHIPS सेमीफाइनल में पहुंचीं

  • August 22, 2026
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ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद वर्ल्ड चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में

ट्रीसा-गायत्री ने चीन को हराकर रचा इतिहास

ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने महिला डबल्स के क्वार्टरफाइनल में चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जिया यी फान और झांग शू शियान को हराकर इतिहास रच दिया है। भारतीय जोड़ी ने पहला गेम गंवाने के बाद जिस अंदाज में वापसी की, उसने पूरे मुकाबले की तस्वीर बदल दी। 16-21 से पहला गेम हारने के बाद ट्रीसा और गायत्री ने दूसरा गेम 21-15 से जीता और निर्णायक गेम में 21-13 से बाजी मार ली।

करीब 69-70 मिनट तक चले इस मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने दुनिया की शीर्ष जोड़ियों में शामिल चीनी टीम को चौंका दिया। इस जीत के साथ ट्रीसा और गायत्री ने वर्ल्ड चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में जगह बना ली। और सेमीफाइनल में पहुंचते ही भारत का कम से कम कांस्य पदक पक्का हो गया। यानी 2011 के बाद पहली बार भारत की महिला डबल्स जोड़ी वर्ल्ड चैंपियनशिप के पोडियम पर होगी।

क्वार्टरफाइनल से पहले ही ट्रीसा-गायत्री ने दिखा दिया था दम

क्वार्टरफाइनल से पहले ही साफ था कि ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद के सामने चुनौती बेहद बड़ी है। भारतीय जोड़ी टूर्नामेंट में गैरवरीयता प्राप्त थी, जबकि सामने चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जिया यी फान और झांग शू शियान थीं। रैंकिंग के लिहाज से चीन का पलड़ा भारी था, लेकिन ट्रीसा और गायत्री इस टूर्नामेंट में पहले ही अपने इरादे जाहिर कर चुकी थीं। उन्होंने राउंड ऑफ 32 में अमेरिका की 16वीं वरीयता प्राप्त लॉरेन लैम और एलिसन क्विन्ह ली को सीधे गेम में हराया था। इसके बाद प्री-क्वार्टरफाइनल में जापान की सातवीं वरीयता प्राप्त रिन इवानागा और की नाकानिशी को भी सीधे गेम में मात दी। यानी क्वार्टरफाइनल तक पहुंचते-पहुंचते भारतीय जोड़ी दो सीडेड टीमों को बाहर कर चुकी थी। अब सामने थी दुनिया की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी और दांव पर था वर्ल्ड चैंपियनशिप का मेडल।

दूसरे गेम में बदली मुकाबले की तस्वीर

दूसरे गेम में ट्रीसा और गायत्री ने कोर्ट पर बिल्कुल अलग ऊर्जा के साथ वापसी की। ट्रीसा ने पीछे से अपने आक्रामक खेल और शक्तिशाली स्मैश का इस्तेमाल बढ़ा दिया, जबकि गायत्री ने नेट के पास तेज रिएक्शन और सटीक शॉट्स से चीन की जोड़ी को परेशान करना शुरू किया।

भारतीय खिलाड़ियों ने रैलियों की गति को भी बेहतर तरीके से नियंत्रित किया और चीनी जोड़ी को आसान अंक देने से इनकार कर दिया। धीरे-धीरे स्कोर भारत के पक्ष में जाने लगा और ट्रीसा-गायत्री का आत्मविश्वास बढ़ता गया। चीन ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन इस बार भारतीय जोड़ी दबाव में नहीं आई। ट्रीसा के आक्रमण और गायत्री के नेट प्ले का शानदार तालमेल दिखाई दिया। भारत ने दूसरे गेम को 21-15 से अपने नाम कर लिया। अब दोनों जोड़ियां एक-एक गेम जीत चुकी थीं। यानी वर्ल्ड चैंपियनशिप के मेडल का फैसला तीसरे और निर्णायक गेम में होना था।

निर्णायक गेम में भारत ने मारी बाजी

आखिरकार इस गेम को भारत ने 21-13 से जीत लिया। भारत ने पिछले डेढ़ दशक में बैडमिंटन के कई वर्गों में बड़ी सफलताएं हासिल की हैं, लेकिन महिला डबल्स में वर्ल्ड चैंपियनशिप पदक लगातार दूर रहा। ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के 2011 के कांस्य के बाद भारतीय महिला डबल्स को दोबारा पोडियम तक पहुंचने के लिए 15 साल इंतजार करना पड़ा। अब ट्रीसा और गायत्री ने इस इंतजार को खत्म कर दिया है। उनकी जीत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि भारतीय महिला डबल्स के लिए नई उम्मीद है।

महिला डबल्स के लिए नई उम्मीद बनी यह जीत

देश की युवा खिलाड़ी अब इस जोड़ी को देखकर यह विश्वास कर सकती हैं कि विश्व स्तर पर भारतीय महिला डबल्स भी शीर्ष टीमों को हरा सकती है। ट्रीसा और गायत्री ने चोट, रैंकिंग और दबाव जैसी तमाम चुनौतियों के बावजूद यह मुकाम हासिल किया है। इसलिए उनकी उपलब्धि का असर सिर्फ इस टूर्नामेंट तक सीमित नहीं रहेगा। यह आने वाले वर्षों में भारत के महिला डबल्स सिस्टम और खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का काम कर सकती है।

15 साल का इंतजार खत्म हो चुका है और भारतीय महिला डबल्स एक बार फिर वर्ल्ड चैंपियनशिप के पोडियम पर पहुंच गई है। ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जिया यी फान और झांग शू शियान को तीन गेम के रोमांचक मुकाबले में हरा दिया। पहला गेम 16-21 से गंवाने के बाद भारतीय जोड़ी ने 21-15 और 21-13 से लगातार दो गेम जीतकर इतिहास रच दिया। इस जीत ने 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के कांस्य के बाद भारत का महिला डबल्स में पहला वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल पक्का किया है।

अब नजर गोल्ड मेडल पर

लेकिन ट्रीसा और गायत्री की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। अब उनके सामने सेमीफाइनल की चुनौती है और उसके बाद फाइनल का सपना। कांस्य भारत के नाम हो चुका है, रजत और गोल्ड के दरवाजे अभी खुले हैं। एक बात तय है—भारत की इन बेटियों ने 15 साल का इंतजार खत्म करके इतिहास लिख दिया है। अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि क्या ये जोड़ी Gold Medal जीत पाएगी या नहीं।