उपेंद्र कुशवाहा बनेंगे बिहार के CM? नीतीश की तारीफ से बढ़ी हलचल

  • August 22, 2026
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उपेंद्र कुशवाहा का नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर बयान

नीतीश की विरासत पर उपेंद्र कुशवाहा की दावेदारी से गरमाई सियासत

बिहार में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की विरासत संभालने की बात कहकर सियासी पारा चढ़ा दिया है। RLM नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक पारी को विराम देने के मूड में नहीं हैं और अक्टूबर में बिहार यात्रा पर निकल सकते हैं।

उपेंद्र कुशवाहा के बयान से सियासत इसलिए भी गरमा गई है क्योंकि नीतीश ने अपने बेटे और बिहार सरकार में मंत्री निशांत कुमार को अपनी विरासत की बागडोर थमा दी है। बता दें कि राजगीर में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विमर्श शिविर को संबोधित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार के कार्यकाल की तारीफ की। साथ ही उन्होंने यह कहकर चौंका दिया कि नीतीश कुमार की विरासत को संभालने के लिए उनकी पार्टी RLM तैयार है।

RLM ने नीतीश कुमार की विरासत पर ठोकी दावेदारी

दरअसल बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विरासत को लेकर एनडीए में घमासान छिड़ गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश की विरासत को आगे बढ़ाने का दायित्व संभालने की इच्छा जताई। राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने इस मुद्दे पर अपनी पार्टी की दावेदारी पेश की है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा स्वाभाविक है। कई राजनीतिक दल इस विरासत पर अपना दावा करेंगे, लेकिन रालोमो का मानना है कि बिहार की एक बड़ी जमात चाहती है कि यह जिम्मेदारी उनकी पार्टी को मिले।

राजगीर में नीतीश कुमार की तारीफ, विरासत संभालने की बात

दरअसल राजगीर स्थित अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर के उप सभागार में रालोमो के तीन दिवसीय विमर्श शिविर के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि पार्टी बिहार की राजनीतिक और विकास की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि रालोमो इस जिम्मेदारी को निभाने में कितनी सफल होगी, यह भविष्य बताएगा, लेकिन पार्टी अपनी ओर से पूरी क्षमता के साथ तैयार है। उपेंद्र कुशवाहा ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के लिए अपना सर्वस्व लगाया और पिछड़े राज्य की छवि से बिहार को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि नीतीश के सम्मान में शिविर के अंतिम सत्र में धन्यवाद प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा।

गठबंधन की राजनीति पर भी उपेंद्र कुशवाहा का जोर

इसके साथ ही उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बिहार की राजनीति में सरकार बनाने में गठबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गठबंधन में शामिल सभी दलों को एक-दूसरे का सम्मान और सहयोग करना चाहिए। रालोमो अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी बिहार की आकांक्षाओं और विकास की राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए पूरी क्षमता के साथ तैयार है। अब नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से विराम लेने की चर्चा के बीच कुशवाहा का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर अपनी पार्टी को उनकी राजनीतिक विरासत के संभावित दावेदार के रूप में पेश किया है।

JDU ने उपेंद्र कुशवाहा को दिया करारा जवाब

इधर नीतीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड के नेता उपेंद्र कुशवाहा के इस बयान पर भड़क गए हैं। JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को अपना कुनबा संभालने की नसीहत दे दी और कहा कि वह दिन में सपने ना देखें। JDU नेता उमेश सिंह कुशवाहा ने इस संबंध में शनिवार को सोशल मीडिया पोस्ट साझा की। इसमें उपेंद्र कुशवाहा का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, “चादर जितनी हो, पांव उतने ही फैलाने चाहिए। लेकिन कुछ अतिमहत्वाकांक्षी लोगों की आदत होती है कि खाली बैठे-बैठे ख्याली पुलाव कैसे पकाए।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे महानुभावों को हमारी सलाह है कि JDU की चिंता छोड़कर पहले अपने कुनबे की चिंता करें। क्योंकि आपका कुनबा तो पंचर वाहन की तरह समय-समय पर अपना संतुलन खोता रहता है।

JDU ने निशांत कुमार को बताया बिहार का भविष्य

JDU प्रदेश अध्यक्ष ने रालोमो प्रमुख पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी असल बेचैनी की वजह कुछ और है। उन्होंने दावा किया कि नीतीश के बेटे निशांत कुमार बिहार का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार की बढ़ती लोकप्रियता और जनस्वीकार्यता कुछ लोगों को हजम नहीं हो रही है। इसी के चलते उपेंद्र कुशवाहा की ओर से नीतीश कुमार की विरासत संभालने का बयान सामने आने को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।

दरअसल राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रह चुके हैं। हालांकि, उनके बीच कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव, अलगाव और पुनर्मिलन देखने को मिले। नीतीश ने 90 के दशक में बिहार में लव-कुश समीकरण को साधते हुए समता पार्टी की नींव रखी थी, तब उपेंद्र कुशवाहा उनके साथ मजबूती के साथ खड़े थे। नीतीश खुद लव कुश यानी (कुर्मी) और कुशवाहा के प्रभावशाली नेता बनकर उभरे।

अलग पार्टी से लेकर फिर JDU में वापसी तक

हालांकि, राजनीतिक मतभेदों के चलते उपेंद्र कुशवाहा ने JDU से अलग होकर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) का गठन किया। 2014 में भाजपा से गठबंधन कर उपेंद्र कुशवाहा रालोसपा से नरेंद्र मोदी कैबिनेट में मंत्री भी बने। साल 2021 में नीतीश और कुशवाहा में रिश्ते फिर से सुधरे। रालोसपा का JDU में विलय कर लिया गया और उपेंद्र कुशवाहा को JDU संसदीय बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया। हालांकि, 2023 में दोनों के रिश्तों में फिर से खटास आ गई। उपेंद्र कुशवाहा ने JDU से अलग होकर नई पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा का गठन किया। अभी JDU और रालोमो दोनों ही NDA का हिस्सा हैं। ऐसे में एक ही गठबंधन के भीतर नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने से बिहार की सियासत में चर्चा तेज हो गई है।

लव-कुश समीकरण पर टिकी बिहार की अगली सियासी लड़ाई?

गौरतलब है कि बिहार की राजनीति में लव-कुश यानी कुर्मी-कुशवाहा समीकरण नीतीश कुमार की राजनीतिक ताकत का मुख्य आधार रहा है। ऐसे में अब नीतीश कुमार की विरासत को लेकर दोनों पार्टियों के बीच घमासान छिड़ने से राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। अब सवाल यही है कि क्या उपेंद्र कुशवाहा का बयान सिर्फ अपनी पार्टी की राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश है या फिर वे वास्तव में नीतीश कुमार के बाद बिहार की राजनीति में बड़ी भूमिका की तैयारी कर रहे हैं? साथ ही यह भी देखना होगा कि NDA के भीतर इस बयान का आगे क्या असर होता है।