बडगाम की विशाल जनसभा में संसद सदस्यता छोड़ने का ऐलान
जम्मू-कश्मीर की सबसे पुरानी और प्रमुख राजनीतिक पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) को उस समय बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी के सबसे मुखर चेहरे और श्रीनगर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य आगा सैयद रूहुल्लाह मेहंदी ने पार्टी के सभी पदों और संसद सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफे का ऐलान कर दिया। मंगलवार को मध्य कश्मीर के बडगाम में अपने पिता शहीद आगा सैयद मेहंदी की 26वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए रूहुल्लाह ने सार्वजनिक रूप से मंच पर ही अपने त्यागपत्र के आधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।
भावुक होते हुए उन्होंने जनसमूह से कहा कि यह उनके राजनीतिक जीवन की सच्ची आजादी का फैसला है। उन्होंने कहा कि वे एक महान शहीद की विरासत और पवित्र रक्त की नस्ल का प्रतिनिधित्व करते हैं और वे किसी भी कीमत पर कश्मीरियों के स्वाभिमान का सौदा नहीं कर सकते। उन्होंने औपचारिक घोषणा की कि आज दोपहर ठीक 2:40 बजे से उनका नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी से कोई संबंध नहीं रह गया है। इस प्रकार सामने आया रूहुल्लाह मेहंदी का इस्तीफा उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए गंभीर संकट बन चुका है।
अनुच्छेद 370 पर उमर पर भाजपा के दबाव में झुकने का आरोप
रूहुल्लाह मेहंदी ने बताया कि वे अपना औपचारिक त्यागपत्र वरिष्ठ पार्टी नेता मुहम्मद अशरफ भट के जरिए आधिकारिक तौर पर पार्टी हाईकमान को भेजेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने सत्ता हासिल करने के बाद जम्मू-कश्मीर के अवाम की गरिमा, ऐतिहासिक अधिकारों और लोकतांत्रिक भावनाओं से पूरी तरह समझौता कर लिया है।
रूहुल्लाह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला केंद्र सरकार और भाजपा के भारी राजनीतिक दबाव में आकर अनुच्छेद 370 (Article 370) और राज्य के दर्जे की बहाली के अपने बुनियादी वादे से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी संरक्षक डॉ. फारूक अब्दुल्ला को पहले अपने पुत्र को कुरान की आयतें और वचनों पर टिके रहने की शिक्षा देनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि रूहुल्लाह बडगाम विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं और उन्होंने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में श्रीनगर सीट से भारी मतों से विजय प्राप्त की थी। इस पृष्ठभूमि में रूहुल्लाह मेहंदी का इस्तीफा पार्टी की विचारधारा पर सबसे बड़ा आघात माना जा रहा है।
25 विधायकों का 14 दिन का अल्टीमेटम, कैबिनेट में दरार
पार्टी के भीतर असंतोष केवल एक सांसद तक सीमित नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के 25 बागी विधायकों ने रविवार को ही पार्टी नेतृत्व को 14 दिनों का लिखित अल्टीमेटम सौंप रखा है। इन विधायकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 14 दिनों के भीतर उनकी मांगें स्वीकार नहीं की गईं, तो वे नई सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेंगे। विधायकों ने गुरेज के वरिष्ठ विधायक नजीर अहमद गुरेजी और सुरनकोट-थानामंडी के विधायक मुजफ्फर इकबाल खान के नेतृत्व में 4 सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है, जो फारूक और उमर अब्दुल्ला से मिलकर अपना असंतोष पत्र सौंपेगा।
दरअसल, 27 अक्टूबर को हुए कैबिनेट विस्तार में अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कालू को मंत्री बनाए जाने और निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को अचानक हटाए जाने के बाद से वरिष्ठ विधायकों में भारी बगावत भड़की हुई है। सरकार गठन के कुछ ही हफ्तों के भीतर रूहुल्लाह मेहंदी का इस्तीफा और विधायकों की यह खुली बगावत यह दर्शाती है कि घाटी में नेशनल कॉन्फ्रेंस का आंतरिक संकट विस्फोटक स्थिति में पहुंच चुका है।


