विदेश में आईटी नौकरी के नाम पर ले जाकर बनाया साइबर गुलाम
विदेश की धरती पर आकर्षक वेतन, आईटी क्षेत्र में उज्ज्वल करियर और बेहतर भविष्य का सपना संजोकर जाने वाले भारतीय भोले-भाले युवाओं के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देश मौत और बंधक बनाए जाने के सबसे खतरनाक अड्डे बनते जा रहे हैं। कंबोडिया, म्यांमार और लाओस में अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट्स द्वारा भारतीय युवाओं को साइबर अपराध के लिए बंधक बनाए जाने का एक और अत्यंत व्यथित करने वाला मामला सामने आया है।
राजस्थान के अलवर जिले के निवासी विजय कुमार वर्मा का युवा पुत्र प्रदीप पिछले करीब छह महीने से कंबोडिया की एक जेल में नारकीय परिस्थितियों में बंद है। इस पूरे मामले का सबसे विचलित करने वाला पहलू यह रहा कि परिवार को अपने लापता बेटे के जिंदा होने की पहली औपचारिक जानकारी एक ऐसे अज्ञात विदेशी फोन कॉल से मिली, जिसने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। यह घटना सिद्ध करती है कि कंबोडिया साइबर ठगी जाल किस प्रकार सीमाओं के पार सक्रिय है।
पाकिस्तान से आया कॉल: ‘प्रदीप और मेरा बेटा एक ही सेल में बंद हैं’
अलवर निवासी विजय कुमार वर्मा के फोन पर अचानक एक अंतरराष्ट्रीय कॉल आया, जिसकी जांच करने पर वह नंबर पाकिस्तान का पाया गया। फोन पर बात करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने खुद को पाकिस्तान के मुल्तान का निवासी और कंबोडिया की जेल में बंद एक अन्य कैदी का पिता बताया। उस पाकिस्तानी व्यक्ति ने बताया कि उसका बेटा सुल्तान और विजय कुमार का बेटा प्रदीप कंबोडिया की जेल की एक ही कोठरी में बंद हैं।
उसने भावुक होते हुए परिवार से विनती की कि जेल में बंद दोनों बेटों के जीवित रहने और भोजन की समुचित व्यवस्था कराने के लिए अलवर का परिवार तुरंत 100 डॉलर किसी तरह ट्रांसफर कर दे। इस अनपेक्षित फोन कॉल ने छह महीने से बेटे की तलाश में भटक रहे अलवर के परिवार को उसके जीवित होने का प्रमाण तो दिया, लेकिन वहां जेल में उस पर हो रहे अत्याचारों की आशंका ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है। इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के कारण कंबोडिया साइबर ठगी जाल के भयावह आयाम उजागर हो रहे हैं।
मलेशिया की जगह सिहानुकविले के साइबर स्कैम कंपाउंड में धकेला
प्राप्त विवरण और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्थानीय फर्जी ट्रैवल एजेंटों ने प्रदीप को मलेशिया की एक प्रतिष्ठित कंपनी में कंप्यूटर ऑपरेटर की सम्मानजनक नौकरी दिलाने का पक्का झांसा दिया था। लेकिन जैसे ही वह मलेशिया की राजधानी पहुंचा, अंतरराष्ट्रीय मानव तस्कर गिरोह ने उसका मूल पासपोर्ट और सभी ट्रैवल दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए।
इसके बाद उसे बंधक बनाकर जबरन कंबोडिया के कुख्यात साइबर अपराध केंद्र ‘सिहानुकविले’ (Sihanoukville) शहर में तस्करी कर दिया गया। वहां उसे एक होटल में शेफ और कंप्यूटर पर काम करने का झूठ बोला गया था, लेकिन स्कैम कंपाउंड्स के भीतर चीनी माफिया द्वारा उससे जबरन भारत के लोगों को डिजिटल अरेस्ट और निवेश ठगी करने वाले कॉल करने का दबाव बनाया गया। इनकार करने पर कंबोडियाई पुलिस के छापों के बाद उसे जेल में डाल दिया गया। प्रदीप ने आखिरी बार 25 मई 2026 को घर फोन किया था। पीड़ित परिवार ने विदेश मंत्रालय और केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि कंबोडिया साइबर ठगी जाल से उनके निर्दोष बेटे को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जाए।


