इंडोनेशिया के जंगलों की आग से बिगड़े रिश्ते: मलेशिया में उत्पादों का बहिष्कार, सिंगापुर को गैस कटौती

  • November 4, 2026
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इंडोनेशिया जंगल आग विवाद के चलते आसमान में फैला जहरीला धुआं और मास्क पहने लोग

सुमात्रा और कालीमंतान के जंगलों से उठा जहरीला धुआं

दक्षिण-पूर्व एशिया के द्वीप राष्ट्र इंडोनेशिया के वर्षावनों में बड़े पैमाने पर लगी भीषण आग का जहरीला धुआं अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संकट में तब्दील हो चुका है। इंडोनेशिया के कालीमंतान, पापुआ और सुमात्रा प्रांतों के जंगलों व दलदली पीट भूमियों (पीटबॉड्स) से निरंतर उठ रहा काला और घना धुआं मानसूनी हवाओं के साथ सीमा पार करके पड़ोसी देशों मलेशिया और सिंगापुर तक पहुंच गया है।

इस विषैली धुंध के कारण इन दोनों देशों के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे लाखों नागरिकों को सांस लेने में गंभीर तकलीफ, आंखों में जलन, त्वचा में एलर्जी और तेज सिरदर्द जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस सीमा-पारीय प्रदूषण के चलते इंडोनेशिया जंगल आग विवाद तीनों मित्र राष्ट्रों के संबंधों में गहरी खटास घोल रहा है।

मलेशिया में स्कूल बंद, इंडोनेशियाई सामानों के बहिष्कार की अपील

जहरीले धुएं के हफ्तों से छाए रहने के कारण मलेशिया की सरकार को अपने कई सीमावर्ती प्रांतों में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का आदेश देना पड़ा है। प्रदूषण से त्रस्त मलेशियाई जनता और नागरिक अधिकार संगठनों में इंडोनेशिया के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मलेशिया के कई उपभोक्ता संगठनों ने इंडोनेशियाई उपभोक्ता उत्पादों और खाद्य सामग्रियों के बहिष्कार का राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर दिया है।

उधर, सिंगापुर की सरकार ने ट्रांसबाउंड्री पॉल्यूशन एक्ट के तहत आगजनी के लिए जिम्मेदार कंपनियों और पाम ऑयल फर्मों के खिलाफ कठोर कानूनी और आपराधिक जांच शुरू कर दी है। इस कूटनीतिक दबाव के जवाब में इंडोनेशिया सरकार ने सिंगापुर को की जाने वाली प्राकृतिक गैस के निर्यात में अचानक कटौती करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इंडोनेशिया ने इसके पीछे अपने घरेलू बिजली संयंत्रों की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को वजह बताया है, लेकिन विश्लेषक इसे सीधा जवाबी कूटनीतिक वार मान रहे हैं। इस टकराव ने इंडोनेशिया जंगल आग विवाद को आर्थिक युद्ध का रूप दे दिया है।

पाम ऑयल की अंधाधुंध खेती के लिए लगाई जाती है आग

इंडोनेशिया के जंगलों में भीषण आग लगने का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि यह हर साल दोहराई जाने वाली एक गैरकानूनी प्रथा है। इसकी सबसे बड़ी और प्राथमिक वजह बहुराष्ट्रीय पाम ऑयल कंपनियों और स्थानीय बड़े किसानों द्वारा नए कृषि रकबे और व्यावसायिक प्लांटेशन के लिए जंगलों को ‘स्लैश एंड बर्न’ (काटकर आग लगाने) तकनीक से साफ करना है। पाम तेल के वैश्विक निर्यात में दुनिया का नंबर एक देश होने के कारण इंडोनेशिया में विशालकाय जंगलों को जानबूझकर आग के हवाले कर दिया जाता है।

पीटलैंड में लगी यह आग भूमि के नीचे सुलगती रहती है, जिसे बुझाना महीनों तक असंभव साबित होता है। आसियान (ASEAN) संधियों के बावजूद इस पर प्रभावी अंकुश न लग पाने से क्षेत्रीय सहयोग पूरी तरह चरमरा गया है। इस प्रकार पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के इस असंतुलन से उपजा इंडोनेशिया जंगल आग विवाद अब दक्षिण-पूर्व एशिया में गंभीर भू-राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर रहा है।