राजनीतिक मतभेदों से इतर कला और संस्कृति के मंच पर जमावड़ा
महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से जारी कटुता और तीखे हमलों के बीच मुंबई में गुरुवार को एक बेहद दुर्लभ और सुखद राजनीतिक दृश्य देखने को मिला। 75 प्रख्यात कार्टूनिस्टों के जीवन और उनके व्यंग्य चित्रों पर आधारित एक पुस्तक के विमोचन समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे एक ही मंच पर एक साथ मुस्कुराते हुए नजर आए।
राजनीतिक रूप से धुर विरोधी माने जाने वाले इन तीनों शीर्ष नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कार्यक्रम के दौरान नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण हंसी-मजाक भी हुआ। ठाकरे फडणवीस मंच साझा करने की इस घटना पर मुख्यमंत्री ने तुरंत स्थिति स्पष्ट करते हुए इसे राज्य की समृद्ध परंपरा बताया।
‘हम हैरान नहीं हैं, यह महाराष्ट्र की गौरवशाली संस्कृति है’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि कुछ लोग उन्हें, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को एक साथ मंच पर बैठा देखकर इतने हैरान क्यों हो रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम स्वयं बिल्कुल भी हैरान नहीं हैं, क्योंकि अलग-अलग विचारधाराओं और विरोधी राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच निरंतर संवाद और व्यक्तिगत मेलजोल बनाए रखना महाराष्ट्र की सदियों पुरानी राजनीतिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है।
फडणवीस ने कहा कि लोकतंत्र में विभिन्न दलों के नेता किसी सार्वजनिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम में एक साथ शामिल हो सकते हैं, खुलकर हंस सकते हैं और साथ बैठकर चाय की चुस्कियां भी ले सकते हैं। उद्धव ठाकरे की ओर मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री ने पुराने दिनों को याद किया और कहा कि 2019 तक जब भी उद्धवजी मुझे बुलाते थे, मैं हमेशा जाता था; 2019 के बाद उन्होंने फोन नहीं किया और मैं इंतजार ही करता रह गया। इस बयान के बाद ठाकरे फडणवीस मंच साझा करने का यह प्रसंग भावनात्मक चर्चा में बदल गया।
राजनीति को अलग रखकर कला पर हुई सार्थक चर्चा
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी मंच से बोलते हुए इस अनूठे मिलन पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दर्शक और आम जनता सोच रही होगी कि तीनों नेता आज एक साथ एक मंच पर कैसे आ गए। राज ठाकरे ने कहा कि समाज में कुछ मंच ऐसे होते हैं जहां सभी लोग अपनी राजनीतिक पहचान और चुनावी मतभेदों को पूरी तरह किनारे रखकर केवल कला, विचार और संस्कृति के सम्मान में एक साथ खड़े होते हैं।
उल्लेखनीय है कि 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा और अविभाजित शिवसेना के बीच 30 साल पुराना गठबंधन टूट गया था, जिसके बाद से दोनों दलों के बीच राजनीतिक दुश्मनी चरम पर थी। ऐसे तनावपूर्ण माहौल के बीच ठाकरे फडणवीस मंच साझा होने से यह संदेश गया कि वैचारिक लड़ाइयों के बावजूद आपसी सम्मान और शिष्टाचार कायम रखा जा सकता है।


