बांकीपुर में RJD की हार पर तेजस्वी के करीबी शक्ति यादव पर भाई वीरेंदर का बड़ा आरोप!

  • August 5, 2026
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Bankipur Bypoll RJD Bhai Virendra vs Shakti Singh Yadav

Bankipur Bypoll News: बांकीपुर उपचुनाव हार: 'तेजस्वी यादव के आसपास के चमचों को हटाना होगा' - भाई वीरेंद्र

बांकीपुर उपचुनाव के बाद RJD में खुलकर सामने आई अंदरूनी कलह

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष अब सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगा है। चुनाव परिणाम आने के बाद जहां पार्टी से आत्ममंथन की उम्मीद की जा रही थी, वहीं अब वरिष्ठ नेताओं के बीच खुली बयानबाजी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के बीच जुबानी जंग ने यह संकेत दिया है कि हार के बाद संगठन के भीतर मतभेद सतह पर आ गए हैं। दोनों नेताओं के लगातार आ रहे बयानों ने विपक्षी दलों को भी RJD पर निशाना साधने का मौका दे दिया है।

दरअसल, बांकीपुर उपचुनाव में पार्टी के अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने और उम्मीदवार की जमानत जब्त होने के बाद संगठन के भीतर रणनीति, नेतृत्व और फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे। इसी क्रम में भाई वीरेंद्र के एक बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया।

‘तेजस्वी यादव के आसपास मौजूद चमचों को हटाना होगा’

चुनाव परिणाम आने के बाद भाई वीरेंद्र ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि यदि राष्ट्रीय जनता दल को भविष्य में मजबूत होना है तो तेजस्वी यादव के आसपास मौजूद “चमचों” को हटाना होगा। उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर नई बहस को जन्म दे दिया।

भाई वीरेंद्र का कहना था कि संगठन के भीतर कुछ ऐसे लोग प्रभावी हो गए हैं जो वास्तविक कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को नेतृत्व तक पहुंचने नहीं देते। उनका मानना था कि यदि पार्टी को मजबूत बनाना है तो संगठन में वास्तविक कार्यकर्ताओं को महत्व देना होगा।

शक्ति सिंह यादव के जवाब के बाद बढ़ा विवाद

भाई वीरेंद्र के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए RJD के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि पहले भाई वीरेंद्र यह बताएं कि उन्होंने पार्टी के लिए क्या योगदान दिया है। उनके इस बयान के बाद विवाद और तेज हो गया।

इसके बाद मीडिया से बातचीत में भाई वीरेंद्र ने तीखे शब्दों में पलटवार करते हुए कहा कि कुछ लोगों को अपनी सीमा में रहना चाहिए। उन्होंने बिना नाम लिए चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह बोलना शुरू कर देंगे तो कई ऐसे तथ्य सामने आएंगे जिनका जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि उन्हें उकसाया गया तो कई लोगों का “कच्चा चिट्ठा” सार्वजनिक कर देंगे।

‘मेरे नेता सिर्फ लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव हैं’

भाई वीरेंद्र ने स्पष्ट कहा कि उनके नेता केवल लालू प्रसाद यादव हैं और लालू प्रसाद द्वारा नेतृत्व सौंपे जाने के कारण तेजस्वी यादव भी उनके नेता हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी अन्य व्यक्ति के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।

उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वह लोकदल के दौर से राजनीति में सक्रिय हैं और वर्ष 2010 में जब RJD के केवल 22 विधायक थे, तब भी उन्होंने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। उनके अनुसार उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी संगठन के साथ मजबूती से खड़े रहकर काम किया है और आज भी उनका लक्ष्य केवल तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाना है।

भाई वीरेंद्र ने लगाए गंभीर आरोप

भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि कुछ लोग तेजस्वी यादव का नाम और चेहरा दिखाकर लोगों से पैसे लेने तथा मुलाकात कराने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में ऐसे लोगों की भूमिका की समीक्षा होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास कुछ नेताओं के राजनीतिक और निजी जीवन से जुड़ी कई जानकारियां हैं। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या सार्वजनिक साक्ष्य पेश नहीं किया। उन्होंने केवल इतना कहा कि यदि उन्हें मजबूर किया गया तो वह कई बातें सार्वजनिक कर सकते हैं।

JDU ने भी साधा निशाना

RJD के भीतर जारी बयानबाजी पर जनता दल (यूनाइटेड) के नेता श्याम रजक ने भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि अभी पार्टी के भीतर और बड़ा घमासान देखने को मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में RJD के अंदर का विवाद और गहरा हो सकता है।

श्याम रजक ने बांकीपुर उपचुनाव के परिणामों को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी रणनीति और नेतृत्व दोनों स्तर पर पार्टी को नुकसान हुआ है। हालांकि RJD की ओर से इन टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हार के बाद बढ़े संगठनात्मक सवाल

बांकीपुर उपचुनाव के बाद RJD में पहले संगठन की रणनीति, फिर चुनाव प्रबंधन और उसके बाद नेतृत्व के करीबी लोगों की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब वरिष्ठ विधायक और पार्टी प्रवक्ता के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी चुनावी हार के बाद दलों में आत्ममंथन होना सामान्य बात है, लेकिन यदि मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आने लगें तो उसका असर संगठनात्मक एकजुटता पर भी पड़ सकता है। हालांकि यह देखना बाकी है कि पार्टी नेतृत्व इन बयानों को व्यक्तिगत राय मानता है या संगठन के भीतर संवाद के जरिए विवाद को शांत करने की कोशिश करता है।

फिलहाल बांकीपुर उपचुनाव के बाद RJD के भीतर उठी यह बयानबाजी बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालता है और क्या संगठन के भीतर मतभेद समाप्त होते हैं, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।