नेहा बोरा कौन हैं और क्यों चर्चा में हैं?
जुलाई 2026 में नीट पेपर लीक मामले में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक के साथ एक और चेहरे ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। ये थीं नेहा बोरा, जो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के इस प्रोटेस्ट के समर्थन में अपने कुछ साथियों के साथ भूख हड़ताल कर रही थीं। सीपीआई एमएल (लिबरेशन) के छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा इसके बाद फिर चर्चा में तब आईं, जब वह झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्र प्रदर्शन में हिस्सा लेने रांची पहुंची थीं।
उस दौरान उनके चेहरे पर स्याही फेंकी गई। लेकिन नेहा ने कहा, ”स्याही फेंके जाने से मैं डरने वाली नहीं हूं। दिल्ली के आंदोलन के दौरान मैं पैलेट गन और लाठीचार्ज का भी सामना कर चुकी हूं।” इसके बाद वह उन छात्रों को रिहा करने की मांग को लेकर बिहार पहुंचीं, जिन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
पिछले कुछ वर्षों से छात्र राजनीति में सक्रिय नेहा अब देश में चल रहे युवा और छात्र आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं। अपने तेवरों, बेबाक भाषणों और जुझारू रवैये की वजह से नेहा बोरा इन दिनों मीडिया में छाई हुई हैं। सोशल मीडिया पर उनके भाषणों की कई रील वायरल हैं। अब नेहा एक बार फिर दिल्ली में अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन कर रही हैं। इस बार वह और उनके समर्थक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मैदान में उतरे हैं। कई विपक्षी दलों का आरोप है कि देश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के लिए ज्ञानेश कुमार जिम्मेदार हैं और इसकी वजह से करोड़ों लोग अपने वोट देने के अधिकार से हाथ धो बैठे हैं।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और महिला कांस्टेबल के साथ वायरल तस्वीर
दरअसल, दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान छात्र नेता नेहा बोरा की एक तस्वीर वायरल हुई थी। इसमें वह बैरिकेड पर चढ़कर एक महिला कांस्टेबल की वर्दी पकड़े दिखाई दी थीं। नेहा बोरा के साथ वायरल तस्वीर में दिख रहीं कांस्टेबल का नाम नीतू है। वह आउटर दिल्ली के नांगलोई थाने में तैनात हैं और उन्हें नई दिल्ली इलाके में एक प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर लगाया गया था।
पुलिस के साथ उनकी झड़प और भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। इससे पहले भी जब कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्र आंदोलन को लीड किया था, तब नेहा बोरा सुर्खियों में रही थीं। उन्होंने 23 दिन की भूख हड़ताल की थी। नेहा बोरा की प्रसिद्धि का आलम यह है कि खुद राहुल गांधी भी उनके साथ प्रेस वार्ता कर चुके हैं। ऐसे में बहुत से लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं।
दरअसल, जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट संशोधन यानी एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ AISA, CJP और विपक्षी दलों के प्रदर्शन के दौरान नेहा सड़क पर लेट गई थीं। इसके बाद दिल्ली पुलिस की महिला कर्मियों द्वारा नेहा बोरा को खींचकर और उठाकर पुलिस वैन में बैठाने का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण सत्याग्रह कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर ले जाया गया। वहीं, सितंबर 2026 में प्रयागराज में पुरानी नियमावली लागू करने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे TGT-PGT अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन देने के कारण भी वह लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।
नेहा बोरा कहां की रहने वाली हैं और कहां से की पढ़ाई?
नेहा बोरा उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। उन्होंने पहले दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया और फिर आंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली से एमए की पढ़ाई की। फिलहाल वह दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से पीएचडी कर रही हैं। नेहा दिल्ली और जेएनयू में वामपंथी छात्र आंदोलन का चेहरा हैं। सीपीआई एमएल (लिबरेशन) के छात्र संगठन AISA का नेतृत्व करते हुए वह यूनिवर्सिटी में काफी सक्रिय दिखाई देती हैं।
उनके पिता भारतीय सेना में थे, जिसके कारण उनका बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता। उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह दिल्ली आ गईं, जहां उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। इसके बाद डॉ. बी. आर. आंबेडकर यूनिवर्सिटी से अपनी मास्टर डिग्री पूरी की।
दरअसल, नेहा बोरा इस समय देश में जन आंदोलनों और वामपंथी आंदोलनों की मुखर प्रवक्ता के तौर पर सामने आ रही हैं। उनकी पहचान सिर्फ एक छात्र नेता के रूप में नहीं है, बल्कि वह एक कुशल थिएटर कलाकार भी हैं। कॉलेज के दिनों में वह संगवारी नाम के एक थिएटर ग्रुप से जुड़ी थीं। नुक्कड़ नाटकों और रंगमंच के जरिए उन्होंने समाज की जमीनी समस्याओं को करीब से देखा। इसी कला और अभिनय ने उन्हें अपनी बात जनता के सामने रखने का हौसला दिया।
थिएटर से छात्र राजनीति तक का सफर
जेएनयू में कदम रखने के बाद नेहा बोरा वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ गईं। अपनी मजबूत वैचारिक समझ और भाषण शैली के दम पर वह जल्द ही संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गईं। इस दौरान उन्होंने शिक्षा के निजीकरण, फीस बढ़ोतरी, छात्रावास की समस्याओं और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई है। नेहा बोरा की सक्रियता केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रही। वह विभिन्न छात्र आंदोलनों में हिस्सा लेती रही हैं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उठाती रही हैं। उनके भाषणों और विरोध प्रदर्शन के तरीकों ने उन्हें छात्र राजनीति में एक चर्चित चेहरा बनाया है।
उनकी थिएटर पृष्ठभूमि भी उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व का एक अहम हिस्सा है। कॉलेज के दिनों में संगवारी थिएटर ग्रुप से जुड़कर उन्होंने नुक्कड़ नाटकों और रंगमंच के जरिए सामाजिक समस्याओं को समझा। इसी अनुभव ने जनता के सामने अपनी बात रखने और सामाजिक मुद्दों पर बोलने का उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। छात्र संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर नेहा शिक्षा व्यवस्था, फीस, छात्रावास और महिला सुरक्षा जैसे विषयों पर अपनी आवाज उठाती रही हैं। उनकी राजनीतिक पहचान को समझने के लिए इन मुद्दों के साथ-साथ जन आंदोलनों में उनकी भागीदारी को भी देखना जरूरी है।
बीजेपी समर्थक परिवार से आने के बावजूद नेहा बोरा ने कैसे चुनी अलग राह?
गौरतलब है कि नेहा बोरा ऐसे परिवार से आती हैं, जो बीजेपी समर्थक रहा है। नेहा ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ”मेरे अपने परिवार में बीजेपी के कट्टर समर्थक हैं और हमारे घर में बड़े मतभेद रहे हैं। मेरे घर में यह मतभेद बहुत लंबे समय से है। जब से मैं दिल्ली आई और राजनीतिक रूप से सक्रिय हुई, तब से मेरे घर में यह मतभेद रहा है।”
नेहा ने बताया था कि कई बार स्थिति बहुत तनावपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा था, ”मुझे लगता है कि आर्थिक रूप से और अपनी जिंदगी से जुड़े फैसलों में मैं अपने फैसले खुद लेने के लिए काफी हद तक स्वतंत्र रही हूं। यह आजादी मुझे ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दूसरे या तीसरे साल से ही मिल गई थी, क्योंकि वह मेरे लिए एक निर्णायक मोड़ था।”
उनके इन बयानों से उनके परिवार के भीतर राजनीतिक विचारों को लेकर मतभेद की बात सामने आती है। जहां उनके परिवार के कुछ सदस्य बीजेपी के समर्थक हैं, वहीं नेहा ने छात्र राजनीति और जन आंदोलनों के जरिए अपनी अलग राजनीतिक राह चुनी। नेहा बोरा की सार्वजनिक पहचान छात्र अधिकार, शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक विरोध जैसे मुद्दों से जुड़ी रही है। इसलिए उनकी राजनीति को सिर्फ बीजेपी विरोध तक सीमित करके देखना उनकी गतिविधियों और सार्वजनिक बयानों की पूरी तस्वीर नहीं देता।
अभिजीत दीपके ने नेहा बोरा की तारीफ में क्या कहा?
पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प चर्चा देखने को मिली। लोग CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके से नेहा बोरा की तुलना करते हुए बहस करने लगे कि कौन ज्यादा परिपक्व है। दरअसल, CJP के प्रमुख और आंदोलनकारी नेता अभिजीत दीपके ने हाल ही में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की नेतृत्व क्षमता और प्रतिभा की खुले तौर पर प्रशंसा की है।
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा कि नेहा बोरा, अभिजीत दीपके से अधिक प्रतिभाशाली हैं। यूजर ने उन्हें एक संपूर्ण ‘जेन जी’ (Gen-Z) आइकॉन बताया, जिनका व्यक्तित्व और प्रभाव बहुत शानदार है। इसके जवाब में दीपके ने इस यूजर की पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए बिना किसी हिचकिचाहट के लिखा, ‘I agree’ यानी इस बात से मैं सहमत हूं। इस प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर दोनों की तुलना को लेकर चर्चा और तेज हो गई।
हालांकि, नेहा की राजनीति को समझने के लिए उनकी पहचान को केवल बीजेपी विरोध तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उनके सार्वजनिक बयानों और गतिविधियों में छात्र अधिकार, शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक विरोध जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। अब देखना होगा कि नेहा बोरा की यह यात्रा छात्र आंदोलनों तक सीमित रहती है या आने वाले समय में वह राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाती हैं।


