पटना में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महागठबंधन का 3 घंटे प्रदर्शन
पटना में SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महागठबंधन के नेताओं ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन करीब तीन घंटे तक चला। इस प्रोटेस्ट में RJD नेता तेजस्वी यादव, VIP प्रमुख मुकेश सहनी समेत महागठबंधन के कई नेता शामिल हुए। सुबह 10 बजे से शुरू हुआ प्रदर्शन दोपहर करीब 1 बजे खत्म हुआ। इस दौरान पटना की सड़कों पर विपक्ष का जमकर हंगामा देखने को मिला।
दरअसल, बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार को विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आक्रोश मार्च निकाला। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अगुवाई में सभी नेता राजभवन की ओर बढ़े। इसी दौरान पुलिस ने तेजस्वी यादव, VIP प्रमुख मुकेश सहनी और RJD सांसद मीसा भारती समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।
विपक्ष की मांग है कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर उठ रहे सवालों के जवाब दिए जाएं और बिहार में दोबारा चुनाव कराए जाएं। तेजस्वी यादव के हिरासत में लिए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई। महागठबंधन के मार्च को देखते हुए राजधानी में जगह-जगह पुलिस की तैनाती की गई थी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स तैनात की गई। इसके अलावा, राजभवन जाने वाले रास्ते पर कई जगह बैरिकेडिंग की गई थी। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के लिए पांच लेयर की व्यवस्था की गई थी।
तेजस्वी यादव ने बैरिकेडिंग पर बैठकर किया प्रदर्शन, पुलिस से झड़प
बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सुबह करीब साढ़े 10 बजे प्रदर्शन में शामिल हुए। उनके पहुंचते ही महागठबंधन के अन्य नेताओं और समर्थकों में जोश देखने को मिला। इसके बाद तेजस्वी यादव लोकभवन की ओर बढ़ने लगे। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। तेजस्वी यादव एक बार उसी बैरिकेडिंग पर बैठ गए। इतना ही नहीं, वह दो बार बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े। इस दौरान पुलिस और तेजस्वी यादव के बीच जोरदार झड़प भी हुई।
प्रदर्शन में VIP प्रमुख मुकेश सहनी, RJD सांसद मीसा भारती, IP गुप्ता और कांग्रेस के कई बड़े नेता शामिल हुए। विपक्ष का प्रदर्शन बढ़ने के बाद पुलिस तेजस्वी यादव, मीसा भारती और मुकेश सहनी को अपने साथ ले गई और उनकी राज्यपाल से मुलाकात कराई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पटना में भारी बवाल देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी, लेकिन इसके बावजूद मार्च के दौरान बैरिकेडिंग के पास तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
मुकेश सहनी ने कहा- सरकार को उखाड़ फेंकेंगे
प्रदर्शन के दौरान VIP सुप्रीमो मुकेश सहनी ने आरोप लगाया कि उनकी उंगली तोड़ दी गई। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। मुकेश सहनी ने कहा कि अगर सरकार लोकतंत्र में जनता को मालिक समझने के लिए तैयार नहीं है, तो उसे सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वह जनता के लिए गोली खाने को तैयार हैं।
उनके इस बयान के बाद प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं के तेवर चर्चा में रहे। महागठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और SIR प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के जवाब देने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन में शामिल नेताओं का कहना था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उनकी आपत्तियों पर जवाब दिया जाना चाहिए। वहीं, विपक्ष बिहार में दोबारा चुनाव कराने की मांग भी उठा रहा है।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव ने क्या कहा?
राज्यपाल से मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव ने मीडिया के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कविता सुनाते हुए कहा, “ज्ञानु-ज्ञानु यस पापा, चीटिंग वोट नो पापा।” तेजस्वी यादव ने दावा किया कि देश की जनता सब समझ चुकी है और लोकतंत्र को कोई खत्म नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि महागठबंधन शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकाल रहा था, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन का रवैया तानाशाही वाला रहा। तेजस्वी ने दावा किया कि पुलिस AK-47 के साथ खड़ी थी और सवाल उठाया कि अगर AK-47 का बटन दब जाता तो क्या होता। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के लोग गोली और जेल से डरने वाले नहीं हैं और जो कुर्बानी देनी पड़ेगी, वे देने के लिए तैयार हैं।
तेजस्वी यादव के मुताबिक, बिहार से ही SIR की शुरुआत हुई थी और अब देश की जनता चुनाव आयोग की कथित बेईमानी को समझ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि सब कुछ सामने आ चुका है।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, “ज्ञानेश कुमार तो नमूना है। ज्ञानेश कुमार को इस पद पर क्यों लाया गया, यह सबको पता है।” ये बयान तेजस्वी यादव ने प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान दिए।
रणविजय साहू को बैरिकेडिंग से नीचे उतारने का वीडियो वायरल
प्रदर्शन के दौरान कई वीडियो सामने आए, जिनमें नेताओं और प्रदर्शनकारियों का गुस्सा देखने को मिला। एक वीडियो में RJD नेता रणविजय साहू बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करते दिखाई दिए। इसी दौरान उन्हें बैरिकेडिंग से नीचे उतार दिया गया। प्रदर्शन में कुछ लोग हाथों में हथकड़ी लगाकर भी शामिल हुए। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम हाथों में हथकड़ी लगाकर प्रदर्शन में पहुंचे। उनके हाथ में संविधान की कॉपी भी थी। कांग्रेस के अन्य नेता भी हाथों में हथकड़ी लगाकर प्रदर्शन करते नजर आए।
इन तस्वीरों और वीडियो के जरिए प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध को सामने रखा। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन दोपहर लगभग 1 बजे तक चला। इस तरह, करीब तीन घंटे के प्रदर्शन में बैरिकेडिंग, नेताओं की हिरासत, पुलिस के साथ झड़प और विपक्षी नेताओं के बयानों ने पटना की राजनीति को चर्चा में ला दिया।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर BJP और ज्ञानेश कुमार को घेरा
लोकभवन मार्च के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के जरिए केंद्र की BJP सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। तेजस्वी यादव ने लोकभवन मार्च का वीडियो एक्स पर शेयर किया। उन्होंने वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा, “मोदी भागवत का प्यारा, लोकतंत्र का क्रूर हत्यारा।” तेजस्वी यादव की पोस्ट किए गए वीडियो में प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाते नजर आ रहे हैं। वीडियो में “ज्ञानेश कुमार चोर”, “ज्ञानेश कुमार महाचोर” और “ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो” जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं।
इस पोस्ट के जरिए तेजस्वी यादव ने प्रदर्शन के दौरान उठाए गए मुद्दों को दोबारा सामने रखा। विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और SIR प्रक्रिया को लेकर जवाब मांग रहे हैं। वहीं, प्रदर्शन के वीडियो और नेताओं के बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बने। इस घटनाक्रम के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के विरोध और मतदाता सूची संशोधन से जुड़े सवालों पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के तहत पहले भी हुआ था प्रदर्शन
गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को भी बिहार में INDIA ब्लॉक ने ‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के तहत आक्रोश मार्च और प्रदर्शन किया था। राज्य के सभी 534 प्रखंडों में प्रदर्शन और पुतला दहन का कार्यक्रम रखा गया था। इसके बाद गुरुवार को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और पटना में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजभवन मार्च निकालने का ऐलान किया गया था। इस तरह विपक्ष ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगें उठाईं।
विपक्ष का यह आंदोलन मुख्य रूप से दो मांगों पर केंद्रित है। पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की है। दूसरी मांग बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने की है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और बिहार में दोबारा चुनाव कराने की मांग भी कर रहे हैं। पटना में हुए तीन घंटे के प्रदर्शन के दौरान भी इन मांगों को लेकर नेताओं ने अपना विरोध दर्ज कराया।


