वाराणसी बाढ़: गंगा का जलस्तर बढ़ा, PM मोदी ने अधिकारियों से की बात

  • September 3, 2026
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वाराणसी बाढ़ में जलमग्न मणिकर्णिका घाट और बढ़ता गंगा का जलस्तर

मणिकर्णिका घाट तक पहुंचा गंगा का पानी

ये तस्वीरें वाराणसी की हैं…मोक्ष की नगरी वाराणसी…और ये मणिकर्णिका घाट है…वही मणिकर्णिका घाट, जहां दिन-रात चिताएं जलती हैं…जहां जिंदगी की आखिरी यात्रा अपने अंतिम पड़ाव तक पहुंचती है…लेकिन इस वक्त यहां हालात बदल चुके हैं। गंगा का जलस्तर इतना बढ़ चुका है कि घाट का बड़ा हिस्सा पानी में समा गया है। सीढ़ियां…चबूतरे…और अंतिम संस्कार की जगहें…सब पानी की गिरफ्त में हैं। वाराणसी में बाढ़ के हालात के बीच गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. चेतावनी बिंदु को पार करने के बाद पानी अब खतरे के निशान की तरफ बढ़ रहा है. लगभग एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हो रही इस बढ़ोतरी के कारण तटवर्ती इलाकों के लोग काफी परेशान हैं।

बाढ़ के पानी ने आम जनजीवन को तो प्रभावित किया ही है, साथ ही दाह संस्कार की परंपराओं में भी बड़ी अड़चन पैदा कर दी है. महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुका है. बाढ़ का पानी अब आसपास की गलियों तक पहुंच गया है. हालत ये है कि शवों को चार कंधों के बजाय नाव के सहारे मणिकर्णिका घाट स्थित इमारतों की छतों तक ले जाया जा रहा है, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान के पार

दरसल उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार सुबह नदी का पानी 70.54 मीटर तक पहुंच गया, जो चेतावनी स्तर 70.262 मीटर से ऊपर है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, राजघाट गेज स्थल पर सुबह 6 बजे यह जलस्तर दर्ज किया गया। गंगा नदी का पानी फिलहाल हर घंटे करीब 2 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है। राजघाट पर गंगा का खतरे का निशान 71.262 मीटर है, जबकि अब तक का उच्चतम बाढ़ स्तर यानी High Flood Level 73.901 मीटर दर्ज है।

बता दें कि कई इलाकों में गंगा उफान पर है और भागलपुर में 100 साल पुराना चैती मंदिर पहले ही नदी में समा चुका है। हैरान करने वाली बात यह है की इस बार गंगा का पानी उस जगह तक पहुंच गया है, जहां इंसान अपनी आखिरी विदाई देता है। गंगा घाट डूबा…तो अंतिम संस्कार के लिए ऊंची जगह तलाशनी पड़ी। और यही वजह है कि अब मणिकर्णिका में छतों पर चिताएं जलती दिखाई दे रही हैं। नीचे चारों तरफ पानी है …और ऊपर उठती हुई आग की लपटें।

एक तरफ गंगा का उफान है…दूसरी तरफ चिता की आग है…और इनके बीच खड़ी है काशी की वो तस्वीर, जिसे देखकर किसी का भी दिल भर आए। सोचिए…जिस शहर में मृत्यु को भी मोक्ष से जोड़ा जाता है…वहां आज अंतिम संस्कार के लिए भी बाढ़ से जूझना पड़ रहा है। और मजबूरी ऐसी कि अंतिम संस्कार की परंपरा को भी बदलते हालात के साथ ढालना पड़ रहा है। काशी की सदियों पुरानी तस्वीर में बाढ़ ने एक ऐसा अध्याय जोड़ दिया है…जिसे शायद यहां रहने वाले लोग लंबे वक्त तक नहीं भूल पाएंगे।

बाढ़ के बीच नाव बनी लोगों का सहारा

मणिकर्णिका का ये मंजर दरअसल वाराणसी में आई बाढ़ की गंभीरता की एक तस्वीर भर नहीं है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही घाटों के आसपास के इलाकों पर भी असर बढ़ा है। कई जगहों पर नावें अब रास्ता बन गई हैं…और जहां कभी लोग पैदल चलते थे…वहां अब पानी दिखाई देता है। गंगा किनारे बसे लोगों की जिंदगी जैसे थम सी गई है।

काशी में घाटों पर पानी भरने के कारण अब शवयात्रा लेकर आने वाले लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है. अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को घुटनों तक भरे पानी, मलबे और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है. इस काम में लोगों को खर्च भी दोगुना उठाना पड़ रहा है। शवयात्री अभिषेक श्रीवास्तव सहित कई लोगों ने मांग की है कि इस पवित्र स्थान की ठीक तरीके से सफाई कराई जाए और श्मशान तक पहुंचने के रास्ते को आसान बनाया जाए। हालाँकि मणिकर्णिका में चिताएं आज भी जल रही हैं…आस्था आज भी कायम है…लेकिन बदलते हालात के बीच काशी एक ऐसी तस्वीर देख रही है…जहां मोक्ष की आग और बाढ़ का पानी…एक ही फ्रेम में दिखाई दे रहे हैं।

PM मोदी ने अधिकारियों से ली बाढ़ की जानकारी

इधर प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के विभिन्न इलाकों में बाढ़ के हालातों का जायजा लेने के लिए शहर मेयर और जिले के डीएम से बातचीत की। सूत्रों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी को राहत कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। पीएम ने मेयर आशुतोष कुमार तिवारी और जिले के डीएम सत्येंद्र कुमार से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो।

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न्यूज एजेंसी पीटीआई द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी के निशान को पार कर गया है। इस वजह से जिला प्रशासन ने नाव संचालन निलंबित कर दिया है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं और निवासियों से घाटों पर या तेज धाराओं वाले क्षेत्रों में न जाने का आग्रह किया गया है। अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि वाराणसी जिले के लगभग 11 इलाके और कई वार्ड बाढ़ से आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं।

राहत शिविरों में सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश

पर्याप्त राहत और बचाव उपाय सुनिश्चित करने के अलावा प्रभावित परिवारों को आवश्यकतानुसार सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जा रही है। फिलहाल जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने और प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया है। डीएम ने अधिकारियों को राहत शिविरों में पर्याप्त खाना, पीने का पानी, बिजली, रोशनी, साफ-सफाई, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

उन्होंने खास तौर पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जरूरतों पर विशेष ध्यान देने को कहा। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य टीमों को राहत शिविरों में नियमित स्वास्थ्य जांच करने के निर्देश दिए। साथ ही जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। नगर निगम और दूसरे संबंधित विभागों को राहत शिविरों में साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए जिलाधिकारी ने राहत शिविरों में CCTV कैमरे लगाने का भी निर्देश दिया है।

काशी में बाढ़ से जीवन और अंतिम विदाई दोनों प्रभावित

फिलहाल वाराणसी में बाढ़ के कारण किसी के लिए घर छोड़ने की मजबूरी है…तो किसी के लिए रोजी-रोटी का संकट…और किसी के लिए अपने प्रियजन को आखिरी विदाई देना भी मुश्किल हो गया है। कुल मिलाकर काशी में बाढ़ का ये मंजर बता रहा है कि जब गंगा अपना रौद्र रूप दिखाती है…तो जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी भी जैसे पानी में बहने लगती है।

FAQ

वाराणसी में गंगा का जलस्तर कितना बढ़ गया है?

गुरुवार सुबह गंगा का जलस्तर 70.54 मीटर तक पहुंच गया, जो चेतावनी स्तर 70.262 मीटर से ऊपर है।

मणिकर्णिका घाट में बाढ़ की क्या स्थिति है?

घाट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब चुका है और आसपास की गलियों तक भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है।

PM मोदी ने वाराणसी बाढ़ को लेकर क्या किया?

प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी के विभिन्न इलाकों में बाढ़ के हालात और राहत कार्यों की जानकारी लेने के लिए शहर के मेयर और जिले के डीएम से बातचीत की।

वाराणसी में बाढ़ से कितने इलाके प्रभावित हुए हैं?

अधिकारियों के अनुसार, वाराणसी जिले के लगभग 11 इलाके और कई वार्ड बाढ़ से आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं।