पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 पर जवानों की अचानक नारेबाजी
राजधानी दिल्ली में पुलिस अनुशासन के इतिहास में एक दुर्लभ घटनाक्रम देखने को मिला, जब साथी अधिकारियों के प्रशासनिक तबादले के विरोध में दिल्ली पुलिस के वर्दीधारी जवानों ने स्वयं पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) का घेराव कर दिया। सोमवार सुबह करीब 80 पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर अचानक एकत्र हो गए और आला अधिकारियों व सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे।
प्रदर्शन कर रहे जवानों का स्पष्ट कहना था कि वकीलों के एकतरफा राजनीतिक दबाव में आकर पुलिस अफसरों को बलि का बकरा बनाया जाना पूरी तरह से अनुचित, एकतरफा और अन्यायपूर्ण है, जिससे समूचे पुलिस बल का मनोबल बुरी तरह टूटता है। गेट पर अचानक हुए इस दिल्ली पुलिस ट्रांसफर प्रदर्शन से पुलिस मुख्यालय के शीर्ष गलियारों में हड़कंप मच गया।
शाहदरा थाने में वकील से हाथापाई के बाद हुई थी कार्रवाई
दरअसल, यह पूरा विवाद 23 अक्टूबर को पूर्वी दिल्ली के शाहदरा पुलिस स्टेशन परिसर में हुई एक हिंसक घटना से जुड़ा हुआ है। उस दिन थाने के भीतर पुलिसकर्मियों और एक वकील के बीच तीखी झड़प और हाथापाई हो गई थी, जिसमें वकील के सिर पर गंभीर चोट लग गई थी। इस घटना के विरोध में कड़कड़डूमा और अन्य जिला अदालतों की बार एसोसिएशन के वकीलों ने अदालती कामकाज ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी और दोषी पुलिस अधिकारियों पर निलंबन व तबादले की मांग पर अड़ गए थे।
वकीलों के उग्र आंदोलन के आगे झुकते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त ने गांधी नगर सब-डिवीजन के एसीपी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया था। इस निर्णय से नाराज जवानों ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में संदेश प्रसारित कर मुख्यालय पर जुटने का आह्वान किया था। इस प्रकार शुरू हुआ दिल्ली पुलिस ट्रांसफर प्रदर्शन वकीलों और पुलिस के बीच पुराने तनाव को फिर सतह पर ले आया।
डीसीपी सचिन शर्मा ने की समझाइश, अंदर चलने का दिया प्रस्ताव
जवानों के प्रदर्शन पर अड़ जाने की सूचना मिलते ही कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जवानों को शांत कराने की कोशिश की। जब जवान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तो नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा खुद गेट पर पहुंचे। डीसीपी शर्मा ने एसीपी और प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से दो टूक कहा कि एक अनुशासित सुरक्षा बल का हिस्सा होने के नाते उन्हें सड़क पर सामान्य प्रदर्शनकारियों की तरह बर्ताव नहीं करना चाहिए।
उन्होंने जवानों से आग्रह किया कि वे अपनी शिकायतें रखने के लिए मुख्यालय के अंदर चलें, लेकिन प्रदर्शनकारी जवानों ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया। अधिकारियों ने सभी जिलों के डीसीपी और यूनिट प्रभारियों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं ताकि अन्य थानों से फोर्स मुख्यालय की ओर न बढ़े। इस अप्रत्याशित दिल्ली पुलिस ट्रांसफर प्रदर्शन ने न्यायिक और पुलिस महकमे के आपसी संबंधों में नई दरार पैदा कर दी है।


