इमरान खान ने बॉम्बे हाईकोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी: बोले- अब किसी प्रदर्शन में नहीं जाऊंगा

  • November 3, 2026
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इमरान खान बिना शर्त माफी पेश करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी

ओसीआई कार्ड धारक होने के बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने पर फटकार

बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांग ली है। अभिनेता ने उच्च न्यायालय में औपचारिक लिखित अंडरटेकिंग (शपथ पत्र) दाखिल करते हुए स्पष्ट वचन दिया है कि वे भविष्य में भारत की धरती पर इस तरह के किसी भी राजनीतिक धरने, रैली या विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे।

बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ केंद्र सरकार के आव्रजन विभाग द्वारा इमरान खान को जारी किए गए ‘लीव इंडिया नोटिस’ (LIN—भारत छोड़ो नोटिस) के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने पिछली तारीख पर उन्हें साफ निर्देश दिया था कि यदि वे देश में रहना चाहते हैं तो उन्हें बिना शर्त माफी और भविष्य में प्रदर्शनों से दूर रहने का हलफनामा देना होगा। इस तरह इमरान खान बिना शर्त माफी देकर फिलहाल अपनी संभावित देश-निकाला कार्रवाई को टालने में सफल रहे हैं।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ओसीआई कार्ड धारक को प्रदर्शन का अधिकार नहीं

सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने अभिनेता के आचरण पर बेहद गंभीर और तल्ख टिप्पणियां कीं। अदालत ने कहा कि इमरान खान एक अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पास भारत का केवल ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया’ (OCI) कार्ड है। पीठ ने सवाल दागा कि “आप इतने वर्षों से भारत में शांति से रह रहे हैं और अपनी आजीविका कमा रहे हैं, इस दौरान आपने कभी किसी लोकतांत्रिक प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया; फिर अब अचानक आप क्यों कूद पड़े?”

अदालत ने कहा कि एक ओसीआई कार्ड धारक विदेशी नागरिक भारतीय संविधान के तहत सामान्य नागरिकों जैसे राजनीतिक अधिकारों का दावा नहीं कर सकता। जब आप एसआईआर से सीधे तौर पर प्रभावित ही नहीं हैं, तो आपको सड़क पर उतरकर विरोध करने का कोई कानूनी हक नहीं है। पीठ ने कहा कि यदि आप बचपन से यहीं रह रहे हैं और रोजी-रोटी कमा रहे हैं, तो आपने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन क्यों नहीं किया? एक सेलिब्रिटी होने के नाते लोगों को भड़काना और कानून-व्यवस्था के लिए संकट खड़ा करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। इस फटकार के बाद ही इमरान खान बिना शर्त माफी मांगने को विवश हुए।

7 दिसंबर तक ‘लीव इंडिया नोटिस’ पर अंतरिम रोक

अदालत ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को प्राचीन भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के उदार सिद्धांत की याद दिलाते हुए निर्देश दिया कि अभिनेता को उनके खिलाफ जारी ‘लीव इंडिया नोटिस’ का उचित विधिक जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने रेखांकित किया कि यह भारत की महान लोकतांत्रिक उदारता है कि एक अमेरिकी नागरिक को नियमों के उल्लंघन पर तुरंत गिरफ्तार कर डिपोर्ट करने के बजाय पहले नोटिस देकर पक्ष रखने का मौका दिया गया। अदालत ने मामले की अगली नियमित सुनवाई 7 दिसंबर 2026 तय की है और तब तक के लिए उनके खिलाफ जारी देश छोड़ने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दिए गए हलफनामे का दोबारा उल्लंघन होने पर यह राहत तुरंत समाप्त कर दी जाएगी। इस प्रकार इमरान खान बिना शर्त माफी के जरिए अपनी विधिक स्थिति को सुरक्षित करने में जुटे हैं।

ओसीआई कार्ड धारक होने के बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने पर फटकार

बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांग ली है। अभिनेता ने उच्च न्यायालय में औपचारिक लिखित अंडरटेकिंग (शपथ पत्र) दाखिल करते हुए स्पष्ट वचन दिया है कि वे भविष्य में भारत की धरती पर इस तरह के किसी भी राजनीतिक धरने, रैली या विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे।

बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ केंद्र सरकार के आव्रजन विभाग द्वारा इमरान खान को जारी किए गए ‘लीव इंडिया नोटिस’ (LIN—भारत छोड़ो नोटिस) के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने पिछली तारीख पर उन्हें साफ निर्देश दिया था कि यदि वे देश में रहना चाहते हैं तो उन्हें बिना शर्त माफी और भविष्य में प्रदर्शनों से दूर रहने का हलफनामा देना होगा। इस तरह इमरान खान बिना शर्त माफी देकर फिलहाल अपनी संभावित देश-निकाला कार्रवाई को टालने में सफल रहे हैं।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ओसीआई कार्ड धारक को प्रदर्शन का अधिकार नहीं

सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने अभिनेता के आचरण पर बेहद गंभीर और तल्ख टिप्पणियां कीं। अदालत ने कहा कि इमरान खान एक अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पास भारत का केवल ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया’ (OCI) कार्ड है। पीठ ने सवाल दागा कि “आप इतने वर्षों से भारत में शांति से रह रहे हैं और अपनी आजीविका कमा रहे हैं, इस दौरान आपने कभी किसी लोकतांत्रिक प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया; फिर अब अचानक आप क्यों कूद पड़े?”

अदालत ने कहा कि एक ओसीआई कार्ड धारक विदेशी नागरिक भारतीय संविधान के तहत सामान्य नागरिकों जैसे राजनीतिक अधिकारों का दावा नहीं कर सकता। जब आप एसआईआर से सीधे तौर पर प्रभावित ही नहीं हैं, तो आपको सड़क पर उतरकर विरोध करने का कोई कानूनी हक नहीं है। पीठ ने कहा कि यदि आप बचपन से यहीं रह रहे हैं और रोजी-रोटी कमा रहे हैं, तो आपने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन क्यों नहीं किया? एक सेलिब्रिटी होने के नाते लोगों को भड़काना और कानून-व्यवस्था के लिए संकट खड़ा करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। इस फटकार के बाद ही इमरान खान बिना शर्त माफी मांगने को विवश हुए।

7 दिसंबर तक ‘लीव इंडिया नोटिस’ पर अंतरिम रोक

अदालत ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को प्राचीन भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के उदार सिद्धांत की याद दिलाते हुए निर्देश दिया कि अभिनेता को उनके खिलाफ जारी ‘लीव इंडिया नोटिस’ का उचित विधिक जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने रेखांकित किया कि यह भारत की महान लोकतांत्रिक उदारता है कि एक अमेरिकी नागरिक को नियमों के उल्लंघन पर तुरंत गिरफ्तार कर डिपोर्ट करने के बजाय पहले नोटिस देकर पक्ष रखने का मौका दिया गया। अदालत ने मामले की अगली नियमित सुनवाई 7 दिसंबर 2026 तय की है और तब तक के लिए उनके खिलाफ जारी देश छोड़ने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दिए गए हलफनामे का दोबारा उल्लंघन होने पर यह राहत तुरंत समाप्त कर दी जाएगी। इस प्रकार इमरान खान बिना शर्त माफी के जरिए अपनी विधिक स्थिति को सुरक्षित करने में जुटे हैं।