रसिक दुलारी की मौत के बाद उठे कई सवाल
आखिर रसिक दुलारी की मौत की पूरी सच्चाई क्या है? क्या ये आत्महत्या का मामला है? या मौत से पहले कुछ ऐसा हुआ, जिसकी कड़ियां अभी पुलिस को जोड़नी बाकी हैं? क्या मौत से पहले कुछ ऐसा हुआ था, जिसकी जानकारी अब जांच का हिस्सा है? और सबसे बड़ा सवाल—रसिक दुलारी की डेथ मिस्ट्री आखिर कब सुलझेगी? संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई चौंका देने वाले खुलासे हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर सिर से लेकर छाती और पसलियों तक कई गंभीर चोटों का जिक्र किया गया है।
दरअसल मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य बताए जा रहे रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत का मामला कई सवाल खड़े कर रहा है। 25 सितंबर की सुबह गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई। पुलिस की शुरुआती जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है।
लेकिन पांच दिन बीत जाने पर भी रसिक दुलारी शरण की मौत एक मिस्ट्री बनी हुई है। हालांकि, मौत से पहले शरीर के निजी अंग पर गंभीर चोट मिलने और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद मामले की जांच कई सवालों के बीच चल रही है। परिवार ने निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग की है, जबकि संत समाज भी SIT या उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहा है।
CCTV में कमरे से निकलते दिखे, कुछ देर बाद छत से गिरे
शुक्रवार की सुबह करीब 10:25 बजे रसिक दुलारी शरण अपने कमरे से बाहर निकलते हुए सीसीटीवी में दिखाई दिए। पुलिस के मुताबिक, उनके कपड़ों पर खून लगा हुआ था। इसके बाद वह कुछ देर चलते हुए अपार्टमेंट की चौथी मंजिल की छत पर पहुंचे। जांच के मुताबिक, करीब 10:36 बजे उन्होंने छत से नीचे छलांग लगा दी। गिरने के बाद उन्हें आश्रम से जुड़े लोग गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे। दीपक को सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस को घटना की जानकारी दी गई और जांच शुरू हुई।
पुलिस अब कमरे से लेकर छत और फिर अस्पताल तक के पूरे घटनाक्रम को सीसीटीवी और दूसरे साक्ष्यों के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम में करीब 11 मिनट का अंतर भी जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि कमरे से निकलने के बाद छत तक पहुंचने के दौरान क्या हुआ था। घटना के बाद सामने आए साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर शुरुआती तौर पर आत्महत्या का एंगल सामने आया। हालांकि, मौत से पहले लगी चोटों और परिवार की ओर से उठाए गए सवालों के चलते जांच के दूसरे पहलुओं को भी देखा जा रहा है।
कमरे से मिली कटिंग मशीन, निजी अंग पर गंभीर चोट
वहीं जांच आगे बढ़ी तो दीपक के कमरे से एक इलेक्ट्रिक टाइल्स ग्राइंडर यानी कटिंग मशीन बरामद होने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक, उनके निजी अंग पर गंभीर चोट के तथ्य भी जांच में सामने आए। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि चौथी मंजिल से छलांग लगाने से पहले उन्होंने ग्राइंडर से अपने निजी अंग को नुकसान पहुंचाया था। हालांकि, पुलिस अभी इस पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
पुलिस उपाधीक्षक वृंदावन संजीव कुमार के मुताबिक, पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दीपक ने खुद को ग्राइंडर से चोट पहुंचाई थी या इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी। इस सवाल का जवाब फोरेंसिक जांच और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही सामने आ सकेगा।
पुलिस ने कमरे से मिले सामान और अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया है। ऐसे में कटिंग मशीन से जुड़ा सवाल भी जांच का अहम हिस्सा बना हुआ है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि चोट किस परिस्थिति में लगी और घटना से पहले कमरे में वास्तव में क्या हुआ था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में Hemorrhagic Shock का जिक्र
आपको बता दें कि 29 सितंबर को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की मुख्य वजह अत्यधिक खून बहने से लगा शॉक यानी Hemorrhagic Shock बताई गई। रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट का उल्लेख है, जिस पर 14 टांके लगाए गए थे। निचले होंठ और ठुड्डी पर भी गहरे कट के निशान बताए गए हैं। रिपोर्ट में शरीर का निजी अंग अलग पाए जाने की बात भी दर्ज है। पुलिस इन चोटों को घटना के पूरे क्रम के साथ जोड़कर देख रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मौत से जुड़े सवाल और गंभीर हो गए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में दर्ज चोटों को घटना के पूरे क्रम से जोड़ने का काम जांच एजेंसियों के स्तर पर किया जा रहा है। केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि चोटें किस परिस्थिति में लगीं। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ CCTV फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य और घटनास्थल से मिले दूसरे सबूतों का मिलान कर रही है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों को समझने की कोशिश की जा रही है।
कौन थे दीपक लोधी, कैसे जुड़े वृंदावन से?
आपको बता दें कि रसिक दुलारी शरण का वास्तविक नाम दीपक लोधी था। वह मध्य प्रदेश के जबलपुर का रहने वाला था। परिवार के मुताबिक, वह नर्मदा परिक्रमा के बाद वृंदावन पहुंचा और संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ गया। वर्ष 2024 से वह वृंदावन में रह रहा था। उसे संत प्रेमानंद महाराज का शिष्य बताया गया है।
परिवार के मुताबिक, वृंदावन में रहने के बाद धीरे-धीरे उसका संपर्क परिवार से कम होता गया। एक बार वृंदावन आने के बाद दीपक जबलपुर वापस भी गया था, लेकिन करीब दो साल पहले दोबारा वृंदावन आने के बाद वह घर नहीं लौटा। परिवार का कहना है कि इसके बाद उनसे मिलना भी मुश्किल हो गया था। इधर परिजनों का कहना है कि दीपक वर्ष 2024 से वृंदावन में रह रहे थे। परिवार के मुताबिक, शुरुआती समय में वे दीपक से मिल पाते थे, लेकिन बाद में उनसे मिलना मुश्किल हो गया। परिवार का दावा है कि गुरु दीक्षा लेने के बाद दीपक से मिलने के लिए उन्हें कई बार इंतजार करना पड़ता था। कुछ मौकों पर परिवार के लोग आश्रम में कई घंटे तक इंतजार करने के बावजूद उनसे नहीं मिल पाए।
परिवार ने आत्महत्या की संभावना पर उठाए सवाल
परिजनों का कहना है कि दीपक की मानसिक स्थिति को लेकर उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि वह आत्महत्या जैसा कदम उठा सकते हैं। परिवार के मुताबिक, वह उनके लिए सामान्य था और उसने कभी इस तरह की कोई बात नहीं कही थी। परिवार का कहना है कि घर में भी ऐसी कोई परिस्थिति नहीं थी जिससे उन्हें दीपक के इस तरह का कदम उठाने की आशंका होती। परिवार ने यह भी बताया कि दीपक कुछ लोगों से ऐसी बातें करता था, जिनसे उन्हें लगता था कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। हालांकि, परिवार के पास इस बात की स्पष्ट जानकारी नहीं है कि दीपक किस घटना या परेशानी की ओर इशारा कर रहा था।
अब परिवार चाहता है कि उसकी कही गई बातों, मोबाइल चैट और डायरी समेत सभी संभावित साक्ष्यों की जांच की जाए। परिजनों की मांग है कि जांच केवल एक पहलू तक सीमित न रहे और घटना से जुड़े सभी संभावित साक्ष्यों की पड़ताल की जाए। यही वजह है कि परिवार ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। दूसरी तरफ, पुलिस भी मोबाइल, CCTV, फोरेंसिक सैंपल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के जरिए घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है।
कमरे से छत तक क्या हुआ, जांच में ये सवाल अहम
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि दीपक के कमरे में क्या हुआ था और निजी अंग पर गंभीर चोट किस परिस्थिति में लगी। दूसरा सवाल यह है कि कमरे से निकलने और चौथी मंजिल की छत तक पहुंचने के बीच क्या-क्या हुआ। तीसरा सवाल यह है कि घटना से पहले उनके मोबाइल, चैट और डायरी में क्या जानकारी मौजूद थी।
अब मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर SIT या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है। दूसरी तरफ, दीपक के परिजनों ने CBI से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि घटना की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
फिलहाल पुलिस आत्महत्या के एंगल से जांच कर रही है, लेकिन साथ ही दूसरे पहलुओं को भी जांच में शामिल किया गया है। मोबाइल चैट, डायरी, CCTV फुटेज, DVR, फोरेंसिक सैंपल और मृतक के साथियों से पूछताछ के जरिए पुलिस घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है। इस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 25 सितंबर की सुबह दीपक के साथ आखिर क्या हुआ था। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर मौत को लेकर उठे सवालों का अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।


