इकरा हसन को आधी रात पुलिस ने क्यों रोका? सहारनपुर जाने पर मचा सियासी बवाल

  • September 5, 2026
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इकरा हसन हाउस अरेस्ट के बीच सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन

इकरा हसन को सहारनपुर जाने से पुलिस ने रोका

सहारनपुर कलेक्ट्रेट में स्थित मस्जिद पर चल रहे बुलडोजर एक्शन को लेकर यूपी में सियासत तेज हो गई हैं. बीती रात मस्जिद पर एक्शन की खबर मिलने के बाद कैराना की सपा सांसद इकरा हसन जब सहारनपुर जाने के लिए निकलीं तो बीच रास्ते में पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया. पुलिस अधिकारियों ने उन्हें कहा- मैडम आप नहीं जा सकती. इस पर इकरा हसन ने पुलिस से कारण पूछा. सपा सांसद और पुलिस अधिकारियों के बीच आधी रात बीच सड़क पर दो-तीन मिनट तक हल्की बहस होती रहीं. जिसका वीडियो भी सामने आया है. सुबह यह खबर सामने आई कि इकरा हसन को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। दूसरी ओर सहारनपुर कलेक्ट्रेट में स्थित मस्जिद पर बुलडोजर चल रहा है।

सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन

दरअसल उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित अवैध घोषित मस्जिद को आज तड़के बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया. अब इसको लेकर सियासी बवाल मच गया है. समाजवादी पार्टी ने इस प्रशासनिक एक्शन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. वहीं, कैराना से पार्टी की सांसद इकरा हसन समेत कई नेताओं को पुलिस ने घर में ही नजरबंद कर दिया. जिसके बाद इकरा और पुलिस अधिकारी के बीच तीखी नोकझोंक हुई. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

दरअसल, सहारनपुर की मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन की सूचना मिलने पर इकरा हसन अपने कैराना स्थित आवास से निकल रही थीं, तभी रात में भारी संख्या में पुलिस बल उनके घर पहुंच गया. पुलिसकर्मियों ने उन्हें बाहर जाने से रोक दिया. इसके बाद सांसद को उनके आवास पर ही हाउस अरेस्ट कर दिया गया. इकरा हसन का कहना है कि वह सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मिलना और क्षेत्र की जनता की आवाज उनके सामने रखना चाहती थीं।

इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

देर रात से ही इकरा हसन के घर पर पुलिस तैनात है. इस पर इकरा हसन ने प्रशासन पर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा, सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मिलकर जनता की आवाज उठाने की तैयारी थी, लेकिन मुझे हाउस अरेस्ट कर लिया गया. मुझे घर से बाहर तक नहीं निकलने दिया गया। गाड़ी में बैठी इकरा हसन ने पुलिस अधिकारियों से रोके जाने की वजह पूछी। पुलिस ने जन्माष्टमी और देर रात का समय होने की बात कही, जबकि इकरा हसन का कहना था कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और वे अपनी इच्छा से कहीं भी जा सकती हैं। सांसद इकरा हसन ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधि का जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना अपराध है। उन्होंने कहा कि पुलिस के इस रवैये से जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।

मस्जिद को लेकर क्या है पूरा विवाद?

दरसल सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद पर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। शनिवार सुबह प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर मस्जिद पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सुनवाई के दौरान मस्जिद का निर्माण अवैध पाया गया था। यह निर्माण सरकारी जमीन पर किया गया था।

इस आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति ने अपील की थी। हालांकि, वह अपील भी खारिज हो गई और सिटी मजिस्ट्रेट का मूल आदेश बरकरार रखा गया। प्रशासन ने कार्रवाई से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने का दावा किया है। वही सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि नोटिस और अपील सहित निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

शिकायत के बाद शुरू हुआ था मस्जिद विवाद

दरसल मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत शिकायत के बाद हुई। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मस्जिद के संबंध में शिकायत की थी। इसके बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पीपी एक्ट के तहत याचिका दाखिल की गई। 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को अवैध करार देते हुए 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

इस आदेश के खिलाफ मस्जिद पक्ष की ओर से 20 जुलाई 2026 को जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की गई। फिर जिला जज की अदालत में मामले की 17 तारीखों पर सुनवाई हुई। इसके बाद दो सितंबर को अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की।

मायावती ने मस्जिदों पर कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल

इधर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस मामले को लेकर एक्स पर पोस्ट की है। मायावती ने प्रदेश में मस्जिदों को अवैध बताकर ध्वस्त किए जाने के कथित सरकारी अभियान पर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की है। मायावती ने अपनी पोस्ट में कहा कि सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध बताकर ध्वस्त करने का सरकारी अभियान उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से ऐसे नकारात्मक हालात से बचने के लिए अभियान पर तत्काल रोक लगाने और समस्या के समाधान के दूसरे उपाय तलाशने की अपील की।

मायावती ने अपने पोस्ट में बिना नियम-कानून का समुचित पालन किए अभियुक्तों के मकान ध्वस्त करने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई में पूरे परिवार को सामूहिक रूप से सजा देकर बेघर कर दिया जाता है, जिससे लोग काफी विचलित हैं। मायावती ने अपने पोस्ट के अंत में लोगों से सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपील की।

इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर लगाए गंभीर आरोप

गौरतलब है की सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण का मामला अब सियासी और कानूनी विवाद में बदलता नजर आ रहा है। मस्जिद गिराए जाने के बाद कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि तमाम दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने के बावजूद मस्जिद को गिरा दिया गया। उनके मुताबिक यह सिर्फ मस्जिद का मामला नहीं, बल्कि संविधान में दिए गए अधिकारों का सवाल है।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान वक्फ से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी ध्यान नहीं रखा गया। इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि रातों-रात पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया। उनका दावा है कि लोगों को घरों में रहने के लिए मजबूर किया गया और इसी दौरान मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।

सहारनपुर मस्जिद मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखने का दावा

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जहां तक जरूरत होगी, वहां तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने इस कार्रवाई को संविधान और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं है। हालाँकि इस पुरे घटनाक्रम के बाद अब देखना दिलचस्प होगा की यूपी सरकार का अगला रुख क्या होगा?