मायावती के बाद कौन संभालेगा BSP? आकाश आनंद या ईशान आनंद

  • October 6, 2026
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मायावती के बाद BSP उत्तराधिकारी को लेकर आकाश आनंद और ईशान आनंद की चर्चा

मायावती के बाद BSP की कमान किसके हाथ में?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी के भीतर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—मायावती के बाद बसपा की कमान आखिर किसके हाथ में है? इस सवाल का जवाब पिछले एक महीने में इतनी तेजी से बदला है कि पार्टी की अंदरूनी कहानी किसी सियासी ड्रामे से कम नहीं लगती। कभी आकाश आनंद मायावती के बाद सबसे बड़े चेहरे नजर आए, फिर उन्हें बाहर कर दिया गया। उनकी जगह छोटे भतीजे ईशान आनंद को आगे बढ़ाया गया और अब कुछ ही दिनों बाद आकाश की फिर वापसी हो गई।

एक तरफ मायावती के भतीजे आकाश आनंद हैं, जिन्हें पार्टी ने पहले राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी, फिर पार्टी से बाहर किया गया और अब करीब एक महीने के भीतर दोबारा उन्हें राष्ट्रीय संयोजक बना दिया गया। तो दूसरी तरफ हैं ईशान आनंद, जिन्हें आकाश आनंद के बाहर होने के बाद मायावती के बेहद करीबी चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया गया। अब सवाल ये है कि मायावती का भरोसा आखिर किस पर ज्यादा है? और क्या आकाश आनंद की वापसी के बाद ईशान आनंद की राजनीतिक भूमिका कमजोर हो गई है?

मायावती के बाद नंबर-2 की भूमिका क्यों अहम?

दरअसल बहुजन समाज पार्टी लंबे समय से एक ऐसी पार्टी रही है, जहां अंतिम फैसला मायावती का ही माना जाता है। पार्टी संगठन से लेकर चुनावी रणनीति और बड़े राजनीतिक फैसलों तक—मायावती की भूमिका सबसे ऊपर रहती है। लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में पीढ़ी बदलने की चर्चा के बीच पिछले कुछ समय से आकाश आनंद का नाम तेजी से उभरा। युवा चेहरा, आक्रामक भाषण शैली और सोशल मीडिया पर सक्रियता… आकाश आनंद को बसपा की नई पीढ़ी के चेहरे के तौर पर देखा जाने लगा।

मायावती ने भी उन्हें पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं। लेकिन इसके बाद कहानी तेजी से बदली। दरअसल कहानी की शुरुआत 3 सितंबर से होती है। मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया। वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि आकाश अभी राजनीतिक तौर पर परिपक्व नहीं हैं। इसके सिर्फ सात दिन बाद 10 सितंबर को आकाश को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी बाहर कर दिया गया।

आकाश आनंद को पहले भी मिल चुका है झटका

हालांकि यह आकाश के लिए पहला झटका नहीं था। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन एक जनसभा में दिए भाषण के बाद मायावती ने उन्हें पद से हटा दिया था। बाद में उनकी वापसी हुई। यानी बुआ और भतीजे के बीच सियासी रिश्ते पहले भी बनते-बिगड़ते रहे हैं। वहीं आकाश के बाहर होने के बाद मायावती ने छोटे भतीजे ईशान आनंद को आगे बढ़ाना शुरू किया। पार्टी की एक बैठक में आकाश मौजूद नहीं थे, जबकि ईशान वहां पहुंचे। उन्हें सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी भी दी गई। इसके बाद मायावती ने अपना रुख और साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि आकाश और उनकी बहन दीपिका को आगे कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी और आनंद कुमार के परिवार से सिर्फ ईशान को आगे बढ़ाया जाएगा।

मायावती ने आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने साफ कहा कि आकाश को दोबारा लाना संगठन के साथ विश्वासघात जैसा होगा। इसके साथ ही ईशान को भी चेतावनी दी गई कि पार्टी विरोधी गतिविधि करने पर उन पर भी कार्रवाई हो सकती है। इसके बाद 23 सितंबर को लखनऊ में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बना दिया गया तो लगा कि बसपा में नंबर-2 का चेहरा बदल चुका है। लेकिन यह बदलाव सिर्फ 13 दिन ही टिक पाया।

आकाश आनंद ने तोड़ी चुप्पी

वहीं आकाश ने इस पूरे विवाद के बीच सार्वजनिक तौर पर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि वह किसी दूसरे दल में नहीं जा रहे हैं। बसपा उनके लिए सिर्फ पार्टी नहीं, परिवार है और मायावती उनकी राजनीतिक गुरु और प्रेरणा हैं। सबसे अहम बात उन्होंने अशोक सिद्धार्थ को लेकर कही। आकाश ने मायावती के उस फैसले को पूरी तरह सही बताया, जिसमें उनके ससुर को पार्टी से निकाला गया और उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने की बात कही। आकाश ने कहा कि वह मायावती के फैसले के साथ खड़े हैं और व्यक्तिगत रिश्तों से बड़ा पार्टी और आंदोलन का हित है। उस दौरान आकाश आनंद ने अपनी चुप्पी को लेकर भी सफाई दी।

आकाश ने कहा कि वह उस समय सोशल मीडिया से दूर थे, इसलिए मायावती की पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाए। उनकी इसी चुप्पी को गलत समझा गया और अफवाहों को जगह मिली। उन्होंने कहा कि अगर उनकी वजह से मायावती को ठेस पहुंची है तो वह माफी मांगते हैं। इसके बाद 5 अक्टूबर को मायावती ने आकाश को दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया और राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी भी वापस दे दी। मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से हटने के बाद आकाश के व्यक्तित्व और काम करने के तरीके में बदलाव दिखाई दिया। पार्टी नेताओं की राय के बाद उन्हें फिर जिम्मेदारी देने का फैसला किया गया।

एक महीने में फिर बदली BSP की तस्वीर

यानी जिस वजह से आकाश से जिम्मेदारी छीनी गई थी, उसी मुद्दे पर उनकी वापसी का रास्ता खुल गया। वहीं मायावती के ऐलान के तुरंत बाद आकाश आनंद ने मायावती के प्रति आभार व्यक्त करते हुए लिखा,

‘आदरणीय बहन मायावती जी, सादर चरणस्पर्श. आपने मुझे क्षमा किया और बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक की ज़िम्मेदारी दोबारा सौंपी. इस भरोसे के लिए मैं तहे दिल से आपका आभारी हूं, और इसे मैं हल्के में कभी नहीं ले सकता हूं।’

इस बयान के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगा कि आखिर बसपा में मायावती के बाद सबसे बड़ी भूमिका किसकी है और पार्टी के भीतर नंबर-2 का चेहरा कौन है? अब सवाल है कि तो बसपा में असली नंबर-2 कौन? औपचारिक तौर पर देखें तो इस वक्त जवाब आकाश आनंद हैं, क्योंकि राष्ट्रीय संयोजक की कुर्सी उनके पास है। चूंकि ईशान की मौजूदा भूमिका को लेकर अभी कोई नई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए यह कहना मुश्किल है कि वह आगे किस भूमिका में होंगे। यहीं से बसपा की असली कहानी शुरू होती है। पार्टी में मायावती के बाद किसी दूसरे नेता की जगह कितनी मजबूत होगी, इसका फैसला सिर्फ पद से नहीं, बल्कि मायावती के भरोसे से होता दिखता है। बीते एक महीने में आकाश से ईशान और फिर ईशान से आकाश तक पहुंची कहानी ने यही दिखाया है।

क्या आकाश आनंद लंबे समय तक मायावती का भरोसा कायम रख पाएंगे?

फिलहाल यूपी चुनाव से पहले बड़ा सवाल यही है कि क्या आकाश इस बार मायावती का भरोसा लंबे समय तक कायम रख पाएंगे या बसपा में नंबर-2 की यह कुर्सी फिर किसी और के नाम हो जाएगी? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी के भीतर नेतृत्व और भविष्य की भूमिका को लेकर यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि पिछले एक महीने में पार्टी के भीतर नंबर-2 की जिम्मेदारी में तेजी से बदलाव देखने को मिला है।

पहले आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी से हटाया गया, फिर ईशान आनंद को आगे बढ़ाया गया और अब आकाश आनंद को दोबारा राष्ट्रीय संयोजक बना दिया गया है। ऐसे में BSP उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज है। फिलहाल औपचारिक तौर पर राष्ट्रीय संयोजक का पद आकाश आनंद के पास है, जबकि ईशान आनंद की आगे की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।