भारत की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत, आईएमएफ ने बताया दुनिया का ग्रोथ इंजन

  • September 12, 2026
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भारत की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत और आईएमएफ की भारतीय अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी

आईएमएफ ने की भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ

नई दिल्ली, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ की है। साथ ही भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन भी बताया है। भारत की GDP ग्रोथ ने ऊर्जा संकट और वैश्विक चुनौतियों के बीच भी अपनी तेज रफ्तार बरकरार रखी है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में देश की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। आईएमएफ ने भारत के इस बेहतर प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि मजबूत सर्विसेज सेक्टर और बेहतर एक्सपोर्ट के दम पर यह ग्रोथ उम्मीद से काफी बेहतर रही है।

आईएमएफ ने की भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ

आईएमएफ की प्रवक्ता जूली कोजाक ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ उनके अनुमान और मार्केट एक्सपर्ट्स की उम्मीदों से कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि सर्विसेज और एक्सपोर्ट में बेहतर प्रदर्शन ने इस ग्रोथ को रफ्तार दी है। जूली कोजाक के मुताबिक, यह प्रदर्शन दिखाता है कि एनर्जी प्राइस शॉक के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह मजबूत है और भारत दुनिया के लिए एक प्रमुख ग्रोथ इंजन बना हुआ है।

आरबीआई के अनुमान से ज्यादा रही विकास दर

पहली तिमाही का यह 7.8 प्रतिशत का आंकड़ा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 7 प्रतिशत के पिछले अनुमान से भी ज्यादा रहा है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही में देश की रियल जीडीपी 81.36 लाख करोड़ रुपए रही, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 75.46 लाख करोड़ रुपए थी। आईएमएफ ने भारत के जीडीपी आकलन की व्यवस्था में किए गए बदलावों और इसके आधुनिकीकरण का स्वागत किया है। जूली कोजाक ने बताया कि नवीनतम डेटा में नया इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स सीरीज शामिल की गई है। आईएमएफ के अनुसार, इन नए बदलावों से जीडीपी आंकड़ों की सटीकता और डेटा की गुणवत्ता में सुधार होगा।

आईआईपी और पीपीआई क्या हैं?

इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन देश के मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन की रफ्तार को मापता है।प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स घरेलू उत्पादकों द्वारा बेचे जाने वाले सामान और सेवाओं की कीमतों में होने वाले औसत बदलाव को दर्शाता है, जिससे थोक स्तर पर महंगाई का सटीक आकलन होता है। भारत की GDP ग्रोथ के आकलन में इन आंकड़ों का महत्व भी बताया गया है।