लंदन की नौकरी से IAS तक पहुंचने की कहानी
ऊंची तनख्वाह वाली नौकरी से शुरू हुआ सफर प्रशासन की सबसे प्रतिष्ठित कुर्सी तक पहुंचा और फिर उसी कुर्सी को छोड़कर अब एक नई राह पर निकल पड़ा है। यह कहानी एक ऐसी महिला की है, जिसके पास लंदन में शानदार नौकरी थी, IIT और IIM जैसी देश की प्रतिष्ठित संस्थानों की डिग्रियां थीं और करियर में आगे बढ़ने के तमाम मौके थे।
लेकिन फिर एक दिन उन्होंने तय किया कि विदेश में मिली कामयाबी से ज्यादा जरूरी अपने देश के लिए कुछ करना है। करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद अब उन्होंने IAS से इस्तीफा दे दिया है। 30 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने IAS से इस्तीफा देने की जानकारी दी और इसके साथ ही एक बार फिर उनकी कहानी चर्चा में आ गई। यह कहानी है पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल की, जिन्होंने अपने करियर में एक नहीं बल्कि कई बड़े मोड़ देखे। लंदन की कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर सिविल सेवा में आना, प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाना और फिर प्रतिष्ठित सरकारी सेवा से खुद अलग होकर नई पारी शुरू करना उनके सफर को खास बनाता है।
IIT दिल्ली से IIM बेंगलुरु तक की पढ़ाई
दरअसल, उनकी कहानी किसी सामान्य सरकारी नौकरी की तैयारी से शुरू नहीं होती। उन्होंने IIT दिल्ली से बीटेक किया और इसके बाद IIM बेंगलुरु से MBA की पढ़ाई पूरी की। देश के दो प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत विदेश में की। वह लंदन चली गईं और वहां मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में काम किया। उनके सामने कॉरपोरेट क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कई अवसर थे और करियर भी सही दिशा में आगे बढ़ रहा था।
हालांकि, उनकी मंजिल कुछ और थी। उन्होंने कॉरपोरेट की नौकरी छोड़कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि एक प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई और विदेश में अच्छी नौकरी के बाद सुरक्षित करियर छोड़कर UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना अपने आप में बड़ा जोखिम था। इसके बावजूद उन्होंने यह रास्ता चुना। मेहनत रंग लाई और 2013 में उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा में हुआ। दिव्या मित्तल के जीवन में यह दूसरा बड़ा मोड़ था।
IAS बनने के बाद उत्तर प्रदेश कैडर में मिली जिम्मेदारी
IAS बनने के बाद उत्तर प्रदेश कैडर में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालते हुए उन्होंने फील्ड प्रशासन का अनुभव हासिल किया। अलग-अलग जिम्मेदारियों के दौरान उनका जोर सरकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने और जनता से सीधा संवाद रखने पर रहा। इसके अलावा, तकनीक और सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा बना। सरकारी तंत्र की भाषा को आम आदमी तक सहज तरीके से पहुंचाने और लोगों की शिकायतों पर सीधे प्रतिक्रिया देने की कोशिश के कारण वह प्रशासनिक अधिकारियों की भीड़ में अलग नजर आईं। उनकी कार्यशैली में सिर्फ सरकारी आदेश जारी करना ही शामिल नहीं था, बल्कि लोगों से सीधे जुड़ना और उनकी समस्याओं को समझना भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
मिर्जापुर की DM बनकर बनाई अलग पहचान
मीरजापुर की जिलाधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल उनकी पहचान का सबसे चर्चित अध्याय बना। पहाड़ी और ग्रामीण भूगोल वाले जिले में विकास की चुनौतियों के बीच उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण विकास और पर्यटन से जुड़े मुद्दों पर काम किया। हालांकि, उनकी सबसे अलग पहचान लोगों से सीधे संवाद की वजह से बनी। सोशल मीडिया पर सक्रियता के जरिए उन्होंने सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों को आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की। समस्या बताने वाले लोगों को जवाब देना और प्रशासन को जनता के करीब लाने का प्रयास उनकी शैली का हिस्सा रहा। इसी वजह से मीरजापुर में उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उनकी चर्चा बनी रही। कुल मिलाकर, एक जिलाधिकारी के रूप में उन्होंने सिर्फ सरकारी पद नहीं संभाला, बल्कि लोगों के बीच अपनी एक अलग छवि भी बनाई।
“मुझे मिर्जापुर में जितना प्यार मिला, उतना कहीं और नहीं मिला। मैं इस प्यार को शब्दों में बयां नहीं कर सकती।”
दिव्या मित्तल
आपको बता दें कि 19 सितंबर 2022 को उन्होंने मिर्जापुर की जिला मजिस्ट्रेट यानी DM के तौर पर पदभार संभाला था और लगभग एक साल तक इस पद पर रहीं। जब उनका तबादला बस्ती हुआ, तो मिर्जापुर के लोगों ने उन्हें गर्मजोशी से विदाई दी। इस दौरान उन पर फूलों की बारिश की गई और विदाई समारोह में वह भावुक भी हो गईं। यह विदाई इस बात का संकेत थी कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए उन्होंने लोगों के बीच सिर्फ एक अधिकारी की छवि नहीं बनाई थी, बल्कि उनके साथ व्यक्तिगत जुड़ाव भी कायम किया था।
चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान वायरल हुआ वीडियो
उनकी पहचान सिर्फ प्रशासनिक काम की वजह से नहीं बनी। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता के कारण वह कई मौकों पर चर्चा में भी रहीं। चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान उन्होंने मंच पर एक छोटी बच्ची के साथ डांस किया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। यह घटना उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व के उस पक्ष को सामने लेकर आई, जिसमें एक प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ-साथ आम लोगों और खासकर बच्चों के साथ सहज तरीके से जुड़ने की उनकी क्षमता दिखाई दी।
लहुरियादह गांव में पानी की समस्या का समाधान
उनकी चर्चा उन कामों की वजह से भी हुई, जिनका असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ा। मिर्जापुर का लहुरियादह गांव पहाड़ी इलाके में बसा है और लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गांव के घरों तक पाइप से पानी पहुंचाने की पहल ने वहां के लोगों की जिंदगी बदल दी। बताया गया कि करीब 125 घरों तक पाइप्ड वाटर सप्लाई पहुंचाई गई। लेकिन इस काम से जुड़ी एक घटना उनके लिए खास बन गई।
एक बुजुर्ग महिला ने अपनी जिंदगी में पहली बार अपने गांव में पानी पहुंचते देखा। उस महिला ने कुछ नहीं कहा, बल्कि कांपते हाथों से उनके सिर पर हाथ रखा और उन्हें आशीर्वाद दिया। उन्होंने अपने विदाई संदेश में इस घटना को याद करते हुए बताया था कि उस बुजुर्ग महिला का वह स्पर्श उनके लिए किसी सरकारी फाइल पर किए गए हस्ताक्षर से कहीं बड़ा था। यही वह अंतर है, जो किसी प्रशासनिक पद को सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी से आगे लेकर जाता है—जब किसी योजना का वास्तविक असर किसी व्यक्ति की जिंदगी में दिखाई देता है।
30 अगस्त 2026 को IAS से इस्तीफा
लेकिन फिर आया 30 अगस्त 2026। करीब 13 साल की प्रशासनिक यात्रा के बाद उन्होंने खुद इस सफर पर विराम लगाने का फैसला किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना इस्तीफा साझा करते हुए कहा कि उन्होंने IAS की 13 साल की “अविस्मरणीय यात्रा” को अपनी इच्छा से विराम दिया है।
उनके इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि आखिर जिस महिला ने लंदन की नौकरी छोड़कर IAS को चुना, उसने 13 साल बाद IAS की नौकरी क्यों छोड़ दी? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने अपने करियर में लगातार बड़े और सुरक्षित विकल्पों को छोड़कर नए रास्ते चुने हैं। हालांकि, उनके सार्वजनिक संदेश में किसी विवाद या किसी विशेष प्रशासनिक घटना को इस्तीफे की वजह नहीं बताया गया। उन्होंने अपने सफर, लोगों से मिले अनुभव और आगे भी देश के लिए कुछ करने की भावना पर जोर दिया है। इसलिए इस्तीफे के पीछे किसी विशेष कारण का दावा करना फिलहाल उचित नहीं होगा।
करियर का तीसरा बड़ा मोड़
उनका यह फैसला उनके करियर का तीसरा बड़ा मोड़ कहा जा सकता है। पहला मोड़ था कॉरपोरेट क्षेत्र की सुरक्षित नौकरी छोड़कर सिविल सेवा में आना। दूसरा मोड़ था IAS अधिकारी के रूप में फील्ड प्रशासन में अपनी अलग पहचान बनाना। और तीसरा अब प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा को छोड़कर अपनी पसंद के क्षेत्र में नई पारी शुरू करना है। यह बदलाव सामान्य करियर ट्रांजिशन नहीं है। एक IAS अधिकारी के पास प्रशासनिक व्यवस्था में आगे बढ़ने के कई अवसर होते हैं, लेकिन उन्होंने अब अपनी प्राथमिकताओं को अलग दिशा देने का फैसला किया है।
IAS छोड़ने के बाद शिक्षा और लेखन पर फोकस
सरकारी सेवा से अलग होने के बाद उनका फोकस शिक्षा, युवाओं को प्रेरित करने और लेखन पर रहेगा। प्रशासनिक सेवा में मिले अनुभवों को वह अब व्यापक समाज और खासकर नई पीढ़ी के साथ साझा करना चाहती हैं। IAS के रूप में उन्होंने जिन समस्याओं को करीब से देखा, लोगों की जिन परेशानियों को समझा और प्रशासन चलाने के जो अनुभव हासिल किए, वही अब उनकी नई पारी की पूंजी होंगे। दूसरे शब्दों में कहें तो सरकारी सेवा का अध्याय खत्म हुआ है, लेकिन लोगों से जुड़ने का सिलसिला खत्म नहीं हुआ है। अंतर सिर्फ इतना है कि अब वह किसी जिले की जिलाधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि अपने अनुभव, शिक्षा और लेखन के जरिए लोगों के बीच होंगी।
दिव्या मित्तल की कहानी क्यों है खास?
उनका सफर इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने जिंदगी में एक नहीं, कई बार सुरक्षित रास्ते को छोड़कर नया रास्ता चुना। IIT और IIM से पढ़ाई करने के बाद लंदन की नौकरी छोड़कर IAS बनना अपने आप में बड़ा फैसला था। इसके बाद जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालना और मिर्जापुर में जनता के बीच अलग पहचान बनाना उनके सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। अब उन्होंने IAS की नौकरी भी छोड़ दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी सार्वजनिक यात्रा खत्म हो गई। बल्कि उन्होंने अपने अनुभव को एक अलग दिशा में इस्तेमाल करने का फैसला किया है।
लंदन से लखनऊ और लखनऊ से मीरजापुर तक का सफर तय करने वाली पूर्व IAS अधिकारी अब एक बार फिर रास्ता बदल रही हैं। इस बार मंजिल प्रशासनिक कुर्सी नहीं, बल्कि शिक्षा और लेखन के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचना है। यही वजह है कि दिव्या मित्तल की कहानी सिर्फ UPSC क्रैक करने की कहानी नहीं है। यह उस सोच की कहानी भी है, जिसमें व्यक्ति अपने करियर के अलग-अलग पड़ावों पर यह तय करता है कि उसके लिए सफलता का वास्तविक अर्थ क्या है।
FAQ
दिव्या मित्तल पूर्व IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश कैडर में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं और मिर्जापुर की जिलाधिकारी के रूप में भी काम किया।
उन्होंने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से MBA की पढ़ाई की है।
उन्होंने अपने सार्वजनिक संदेश में अपनी 13 साल की प्रशासनिक यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देने की बात कही है और आगे शिक्षा, युवाओं को प्रेरित करने तथा लेखन पर ध्यान देने की बात सामने आई है। इस्तीफे के पीछे किसी विशेष विवाद या घटना को कारण बताना उचित नहीं होगा।
उन्होंने 30 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए IAS से इस्तीफा देने की जानकारी साझा की।


