FCRA Amendment Bill 2026 पर घमासान, क्या अमित शाह संसद में संभालेंगे मोर्चा?
FCRA Bill को लेकर संसद में बढ़ा सियासी तनाव
क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह FCRA बिल पेश करने वाले हैं? क्या FCRA यानी विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक, 2026 को संसद में पेश किए जाने की संभावना है? गृह मंत्री अमित शाह जिस FCRA के लिए डटे हुए हैं, उसमें आखिर क्या राज छिपा हुआ है?
संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में इस मुद्दे पर भारी हंगामे के आसार हैं। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA बिल को लेकर कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है।
कांग्रेस ने शुक्रवार दोपहर तीन लाइन का व्हिप जारी कर अपने सभी लोकसभा सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया है। ऐसी संभावना है कि 10 अगस्त को लोकसभा में FCRA संशोधन बिल पेश किया जा सकता है। चूंकि यह बिल गृह मंत्रालय से जुड़ा है, इसलिए विपक्ष को उम्मीद है कि इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद रहेंगे।
कांग्रेस ने क्यों जारी किया तीन लाइन का व्हिप?
मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में सरकार FCRA संशोधन विधेयक को सदन में ला सकती है। इसी वजह से पार्टी ने अपने लोकसभा सांसदों को सोमवार से बुधवार तक सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया है। कांग्रेस के साथ विपक्ष के अन्य दल भी अपने सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की तैयारी में हैं। इसका उद्देश्य विधेयक पर चर्चा और संभावित मतदान के दौरान विपक्ष की संख्या को मजबूत रखना है।
मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शुक्रवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में विपक्षी दलों की बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस ने सहयोगी दलों से भी सोमवार से अपने सांसदों की संसद में मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा।
अमित शाह की मौजूदगी पर विपक्ष की नजर
कांग्रेस लंबे समय से गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर सदन में बयान देने की मांग कर रही है। विपक्ष का मानना है कि अगर गृह मंत्रालय से जुड़ा FCRA बिल संसद में पेश होता है तो अमित शाह को सदन में आना पड़ सकता है। ऐसे में विपक्ष इस मौके पर उनसे छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर भी जवाब मांगना चाहता है। राज्यसभा के चेयरमैन और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से कहा कि वे अमित शाह के सामने विपक्ष की भावनाएं रखें और सदन में उनकी मौजूदगी के अनुरोध पर विचार करें।
विपक्ष भी सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित कर रहा
विपक्षी गठबंधन यानी इंडिया ब्लॉक के अन्य दल भी इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी विपक्ष के सामूहिक एजेंडे का समर्थन करेगी।
उन्होंने कहा, “हम विपक्ष के साथ खड़े हैं और आगे भी रहेंगे। जरूरत पड़ी तो हम भी व्हिप जारी करेंगे, हालांकि हमारे सभी सांसद पहले से ही सदन में मौजूद हैं।” सपा नेता ने यह भी आशंका जताई कि सरकार अमित शाह की जगह गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को बिल पर चर्चा के लिए भेज सकती है।
लालदुहोमा ने अमित शाह से क्या बातचीत की?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने FCRA संशोधन विधेयक को लेकर अपनी चिंताएं गृह मंत्री के सामने रखीं। लालदुहोमा के अनुसार, अमित शाह ने संकेत दिया कि यह विधेयक 12 अगस्त को लोकसभा में पेश किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमित शाह ने भरोसा दिलाया है कि प्रस्तावित कानून में रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट वाला प्रावधान नहीं होगा। यानी कानून बनने की तारीख से पहले की घटनाओं पर इसे लागू नहीं किया जाएगा।
लालदुहोमा के मुताबिक, अमित शाह ने साफ किया कि जिन संस्थाओं का FCRA पंजीकरण पहले समाप्त हो चुका है, उनके खिलाफ पुराने मामलों में इस कानून का पूर्व प्रभाव से इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
FCRA बिल को लेकर क्यों है विवाद?
FCRA बिल को लेकर पहले से ही विवाद रहा है। विशेष रूप से ईसाई संगठनों में उस प्रावधान को लेकर चिंता है, जिसके तहत FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म होने वाले संगठनों की संपत्तियों पर सरकार द्वारा नामित अथॉरिटी को पिछली तारीख से अधिकार मिलने की आशंका जताई गई है। यह बिल भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि कई चर्च और ईसाई संस्थान विदेशी चंदे से जुड़े रहे हैं और FCRA के तहत आते हैं।
भाजपा खासकर केरल जैसे राज्यों में ईसाई समुदाय के बीच अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सरकार की ओर से इन चिंताओं को दूर करने की कोशिश भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मानसून सत्र के आखिरी दिनों में क्या होगा?
संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि फिलहाल सत्र की अवधि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि वे FCRA विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेंगे, लेकिन इसके कई प्रावधानों का विरोध करेंगे। इसके साथ ही वे छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी का मुद्दा भी उठाने की तैयारी में हैं।
तृणमूल कांग्रेस ने भी अपने सभी सांसदों को सोमवार से संसद में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। कुछ दल औपचारिक व्हिप जारी कर सकते हैं, जबकि कुछ ने अपने सांसदों को अनौपचारिक रूप से मौजूद रहने को कहा है। ऐसे में यदि FCRA संशोधन विधेयक पेश किया जाता है तो उसके संसद के इसी सत्र के अंतिम दिनों में सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
क्या अमित शाह खुद पेश करेंगे FCRA बिल?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमित शाह वास्तव में सदन में आकर FCRA संशोधन विधेयक पेश करेंगे और क्या विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में सफल होगा।
कांग्रेस का व्हिप, विपक्षी दलों की बैठक और लालदुहोमा की ओर से सामने आया बयान इस मुद्दे को और ज्यादा राजनीतिक बना रहा है। हालांकि बिल कब पेश होगा और सदन में इसे लेकर आगे क्या प्रक्रिया होगी, यह आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल FCRA बिल को लेकर संसद के आखिरी दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी टकराव बढ़ने के आसार हैं।


