भोपाल एजी-8 बिल्डर को 15 दिन की जेल: RERA का आदेश नहीं माना, खरीदारों के ₹7-8 करोड़ बकाया होने पर कार्रवाई

  • October 26, 2026
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भोपाल एजी-8 बिल्डर मामले में रेरा आदेश की अवहेलना पर पुलिस कार्रवाई

भोपाल, 26 अक्टूबर 2026: भोपाल एजी-8 बिल्डर से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के आदेशों का पालन नहीं करने पर प्रशासन ने कार्रवाई की है। एजी-8 वेंचर्स के अधिकृत हस्ताक्षरी हेमंत सोनी को 15 दिन के लिए जेल भेजा गया है।

दरअसल, कंपनी पर मकान और प्लॉट खरीदारों की राशि वापस नहीं करने का मामला चल रहा था। प्रशासन ने कई बार नोटिस जारी किए। इसके बावजूद बकाया भुगतान नहीं किया गया।

इसके बाद कमला नगर पुलिस ने हेमंत सोनी को गिरफ्तार किया। वहीं, एसडीएम के समक्ष पेश करने के बाद उन्हें 24 अक्टूबर 2026 को भोपाल केंद्रीय जेल भेजा गया।

भोपाल एजी-8 बिल्डर को जेल क्यों भेजा गया?

भोपाल में AG-8 Ventures से जुड़े रेरा आदेशों का पालन नहीं होने का मामला सामने आया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कई खरीदार अपनी जमा रकम वापस पाने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

दरअसल, रेरा ने संबंधित मामलों में राशि लौटाने के आदेश दिए थे।

इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया।

वहीं, प्रशासन ने संबंधित पक्षों को कई बार नोटिस भेजे।

हालांकि, बकाया राशि जमा नहीं होने के कारण वसूली प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

अंततः हेमंत सोनी को 15 दिन की सिविल जेल भेजा गया।

एजी-8 बिल्डर के हेमंत सोनी कौन हैं?

हेमंत सोनी को एजी-8 वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड का अधिकृत हस्ताक्षरी बताया गया है।

कंपनी से जुड़े विभिन्न रियल एस्टेट मामलों में उनका नाम सामने आया है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में राजीव सोनी का भी उल्लेख किया गया है।

रेरा ने खरीदारों की रकम लौटाने के लिए संबंधित पक्षों को आदेश दिए थे।

हालांकि, निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद भुगतान लंबित रहा।

इसी वजह से प्रशासन ने वसूली से जुड़ी कार्रवाई की।

यह कार्रवाई बकाया राशि की वसूली के संदर्भ में हुई है।

RERA के किस आदेश पर कार्रवाई हुई?

रिपोर्ट के अनुसार, रेरा प्रकरण क्रमांक N-BPL-24-0052 में 19 जून 2024 को आदेश जारी हुआ था।

इसके अलावा, AG-8 Ventures से संबंधित अन्य मामले भी सामने आए थे।

इनमें खरीदारों को उनकी राशि वापस दिलाने के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि, आदेशों का समय पर पालन नहीं हुआ।

इसके बाद संबंधित मामलों में वसूली की कार्रवाई शुरू की गई।

वहीं, प्रशासन को लंबित रकम की वसूली सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने पड़े।

खरीदारों के कितने करोड़ रुपये बकाया हैं?

प्रशासनिक दस्तावेजों के हवाले से लगभग ₹7 से ₹8 करोड़ की बकाया राशि बताई गई है।

यह रकम विभिन्न खरीदारों से संबंधित वसूली मामलों से जुड़ी बताई जाती है।

दरअसल, कुछ खरीदारों ने फ्लैट और अन्य संपत्तियों के लिए भुगतान किया था।

लेकिन विवाद के बाद उन्होंने अपनी रकम वापसी की मांग की।

इसके अलावा, कई मामलों में रेरा के समक्ष शिकायतें की गईं।

हालांकि, ₹7–8 करोड़ पूरी तरह वसूल होने की पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए इसे लंबित बकाया राशि के रूप में समझना चाहिए।

कमला नगर पुलिस ने कैसे की गिरफ्तारी?

प्रशासन ने भुगतान नहीं होने पर गिरफ्तारी वारंट जारी कराया।

इसके बाद कमला नगर पुलिस ने हेमंत सोनी को गिरफ्तार किया।

वहीं, उन्हें संबंधित एसडीएम के समक्ष पेश किया गया।

प्रक्रिया पूरी होने के बाद 24 अक्टूबर को 15 दिन की सिविल जेल भेजने की कार्रवाई हुई।

इसके अलावा, संबंधित राजस्व वसूली मामलों की प्रक्रिया भी जारी बताई गई है।

हालांकि, सिविल जेल की यह कार्रवाई सामान्य आपराधिक मामले में दोषसिद्धि से अलग है।

RERA क्या है और यह कैसे काम करता है?

RERA का पूरा नाम Real Estate Regulatory Authority है।

भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र के नियमन के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है।

इसके तहत घर खरीदारों के हितों की रक्षा से जुड़े प्रावधान हैं।

इसके अलावा, रियल एस्टेट परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाना इसका उद्देश्य है।

यदि बिल्डर निर्धारित शर्तों का पालन नहीं करता, तो खरीदार शिकायत कर सकते हैं।

वहीं, संबंधित रेरा प्राधिकरण मामले की सुनवाई कर आदेश जारी कर सकता है।

हालांकि, शिकायत का परिणाम उसके तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है।

RERA के आदेश का पालन नहीं करने पर क्या होता है?

रेरा के आदेशों का पालन करना संबंधित पक्षों के लिए आवश्यक होता है।

आदेश नहीं मानने पर कानून के तहत आगे की कार्रवाई संभव है।

इसके अलावा, बकाया राशि की वसूली के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

कुछ मामलों में संपत्ति की कुर्की और नीलामी भी संभव होती है।

वहीं, कानूनी शर्तें पूरी होने पर सिविल हिरासत जैसी कार्रवाई हो सकती है।

हालांकि, प्रत्येक मामले की प्रक्रिया अलग होती है।

इसलिए हर आदेश की अवहेलना पर अपने आप जेल नहीं होती।

हाई कोर्ट तक क्यों पहुंचा मामला?

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ खरीदारों ने भुगतान नहीं मिलने पर हाई कोर्ट का रुख किया।

दरअसल, रेरा के आदेश जारी होने के बाद भी वसूली लंबित थी।

इसके अलावा, कुछ मामलों में न्यायालय के आदेशों का पालन न होने को लेकर अवमानना कार्यवाही भी विचाराधीन बताई गई।

वहीं, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहले भी रेरा की रिकवरी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में निर्देश दे चुका है।

अक्टूबर 2024 के एक मामले में अदालत ने जिला प्रशासन को लंबित रिकवरी सर्टिफिकेट पर कार्रवाई करने के लिए कहा था।

हालांकि, सभी मामलों को एक ही न्यायिक प्रकरण नहीं समझना चाहिए।

एजी-8 वेंचर्स और आकृति ग्रुप का क्या संबंध है?

AG-8 Ventures का नाम भोपाल की रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़ा रहा है।

कंपनी को पहले आकृति बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के नाम से भी जाना जाता था।

इसके अलावा, आकृति कोलार सिटी परियोजना में विकास कार्यों को लेकर शिकायतें सामने आई थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, रेरा ने अधूरे कार्यों को पूरा कराने के लिए कदम उठाए थे।

वहीं, कुछ बंधक भूखंडों की नीलामी से विकास कार्य पूरे करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।

हालांकि, आकृति कोलार सिटी के भूखंड नीलामी का मामला और हेमंत सोनी की सिविल जेल की कार्रवाई अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।

घर खरीदार RERA में शिकायत कैसे कर सकते हैं?

यदि किसी खरीदार को संपत्ति के कब्जे या भुगतान से संबंधित समस्या है, तो वह रेरा के माध्यम से शिकायत कर सकता है।

सबसे पहले, खरीदार को अपनी परियोजना और बिल्डर की जानकारी एकत्र करनी चाहिए।

इसके अलावा, बुकिंग एग्रीमेंट और भुगतान रसीदें सुरक्षित रखनी चाहिए।

वहीं, बिल्डर के साथ हुए पत्राचार और नोटिस भी उपयोगी होते हैं।

इसके बाद संबंधित राज्य के रेरा पोर्टल पर उपलब्ध शिकायत प्रक्रिया देखी जा सकती है।

हालांकि, शिकायत शुल्क, दस्तावेज और समयसीमा राज्य के लागू नियमों के अनुसार बदल सकते हैं।

क्या खरीदारों को उनकी रकम वापस मिलेगी?

रेरा के आदेश के बाद प्रशासन ने बकाया राशि वसूलने के लिए कार्रवाई की है।

हालांकि, जेल भेजे जाने से अपने आप पूरी रकम वापस नहीं मिल जाती।

दरअसल, वास्तविक भुगतान वसूली और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।

इसके अलावा, संबंधित पक्षों की संपत्तियों और वित्तीय स्थिति का भी महत्व हो सकता है।

वहीं, लंबित न्यायिक मामलों का असर प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

इसलिए खरीदारों को अपनी शिकायत और वसूली आदेश की स्थिति जांचते रहना चाहिए।

भोपाल एजी-8 बिल्डर मामले में आगे क्या होगा?

हेमंत सोनी को 15 दिन की सिविल जेल भेजा गया है।

वहीं, खरीदारों की बकाया राशि वसूलने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

इसके अलावा, संबंधित प्रशासनिक और न्यायिक मामलों में आगे कार्रवाई हो सकती है।

हालांकि, बकाया रकम के पूर्ण भुगतान या सभी विवादों के समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए आगे रेरा, जिला प्रशासन और न्यायालय के आदेश महत्वपूर्ण होंगे।

निष्कर्ष

भोपाल एजी-8 बिल्डर मामले में रेरा के आदेशों का पालन नहीं होने पर बड़ी कार्रवाई हुई है।

प्रशासन ने कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरी हेमंत सोनी को 15 दिन की सिविल जेल भेजा है।

इसके अलावा, करीब ₹7–8 करोड़ की राशि बकाया बताई गई है।

वहीं, खरीदारों को उनकी रकम दिलाने के लिए वसूली प्रक्रिया जारी है।

हालांकि, वास्तविक भुगतान की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

इसलिए यह मामला रियल एस्टेट क्षेत्र में नियामकीय आदेशों के पालन और खरीदारों के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

आपकी क्या राय है? क्या रेरा के आदेशों का पालन नहीं करने वाले बिल्डरों के खिलाफ वसूली प्रक्रिया और तेज होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

संपादकीय नोट: हेमंत सोनी को सिविल जेल भेजने की कार्रवाई बकाया राशि की वसूली से संबंधित है। इसे किसी आपराधिक मामले में अंतिम दोषसिद्धि या 15 दिन की आपराधिक सजा के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।