Amazon Prime Video विज्ञापन विवाद: पैसे देकर सब्सक्रिप्शन लेने के बाद भी दिखे Ads, कंज्यूमर कोर्ट ने ₹9,499 देने का आदेश दिया

  • October 26, 2026
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Amazon Prime Video विज्ञापन विवाद में कंज्यूमर कोर्ट ने कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया

नई दिल्ली/हैदराबाद, 26 अक्टूबर 2026: Amazon Prime Video विज्ञापन विवाद में हैदराबाद के कंज्यूमर कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कंपनी को एक ग्राहक के सब्सक्रिप्शन की राशि लौटाने और मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है।

दरअसल, ग्राहक ने ₹1,499 का वार्षिक Amazon Prime सब्सक्रिप्शन खरीदा था। इसमें विज्ञापन-मुक्त वीडियो देखने की सुविधा शामिल थी।

हालांकि, सब्सक्रिप्शन की अवधि समाप्त होने से पहले ही Prime Video पर विज्ञापन दिखने लगे। इसके बाद विज्ञापन हटाने के लिए ₹699 अतिरिक्त मांगे गए।

इस मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी की सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार पाया।

Amazon Prime Video विज्ञापन विवाद क्या है?

Amazon Prime Video विज्ञापन विवाद हैदराबाद के एक उपभोक्ता की शिकायत से शुरू हुआ।

ग्राहक ने एक साल के लिए प्राइम सदस्यता खरीदी थी।

दरअसल, सदस्यता खरीदते समय विज्ञापन-मुक्त स्ट्रीमिंग की सुविधा उपलब्ध थी।

हालांकि, कुछ सप्ताह बाद प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन दिखने लगे।

इसके अलावा, ग्राहक से विज्ञापन हटाने के लिए अतिरिक्त भुगतान करने को कहा गया।

वहीं, ग्राहक का कहना था कि वह पहले ही पूरे वर्ष की सेवा के लिए भुगतान कर चुका है।

इसी विवाद के बाद मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा।

Amazon Prime का ₹1,499 वाला प्लान कब खरीदा गया?

शिकायतकर्ता कोंधोबा राजेश ने 11 मई 2025 को Amazon Prime की वार्षिक सदस्यता खरीदी।

इसके लिए उन्होंने ₹1,499 का भुगतान किया।

उनके अनुसार, इस सदस्यता में मोबाइल, टीवी और लैपटॉप पर विज्ञापन-मुक्त वीडियो देखने की सुविधा थी।

शुरुआत में उन्हें बिना विज्ञापन के वीडियो देखने की सुविधा मिली।

हालांकि, 17 जून 2025 से विज्ञापन दिखने लगे।

वहीं, उनकी सदस्यता की अवधि अभी समाप्त नहीं हुई थी।

इसलिए उन्होंने कंपनी से पहले वाली सेवा जारी रखने की मांग की।

विज्ञापन हटाने के लिए ₹699 अतिरिक्त क्यों मांगे गए?

Amazon ने भारत में Prime Video की विज्ञापन व्यवस्था में बदलाव किया।

इसके बाद विज्ञापन-मुक्त स्ट्रीमिंग के लिए अलग शुल्क का विकल्प उपलब्ध कराया गया।

शिकायतकर्ता से भी विज्ञापन हटाने के लिए ₹699 अतिरिक्त भुगतान करने को कहा गया।

हालांकि, वह पहले ही विज्ञापन-मुक्त सेवा के लिए वार्षिक सदस्यता खरीद चुके थे।

इसलिए उन्होंने बीच में शर्तें बदलने पर आपत्ति जताई।

दरअसल, विवाद का मुख्य विषय अतिरिक्त शुल्क से अधिक पहले से खरीदी गई सेवा में बदलाव था।

ग्राहक ने Amazon से क्या मांग की?

ग्राहक ने Amazon के कस्टमर सपोर्ट से संपर्क किया।

उन्होंने कहा कि उनकी मौजूदा सदस्यता में विज्ञापन-मुक्त सेवा जारी रखी जाए।

इसके अलावा, उन्होंने पूरे सब्सक्रिप्शन की राशि वापस करने का विकल्प भी रखा।

हालांकि, शिकायतकर्ता के अनुसार, कंपनी ने दोनों मांगें स्वीकार नहीं कीं।

इसके बजाय सदस्यता की बची अवधि के अनुसार आंशिक रिफंड की पेशकश की गई।

वहीं, ग्राहक ने इसे पर्याप्त नहीं माना।

इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत किसने दर्ज कराई?

यह शिकायत हैदराबाद के अधिवक्ता कोंधोबा राजेश ने दर्ज कराई थी।

उन्होंने अपने मामले की पैरवी स्वयं की।

दरअसल, उनका कहना था कि भुगतान के समय बताई गई सेवा को बीच में बदला गया।

इसके अलावा, उन्होंने अतिरिक्त शुल्क मांगने पर आपत्ति जताई।

शिकायत में उन्होंने मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च का भी उल्लेख किया।

वहीं, उन्होंने आयोग से उचित मुआवजा दिलाने की मांग की।

कंज्यूमर कोर्ट ने Amazon के खिलाफ क्या फैसला दिया?

हैदराबाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I ने इस मामले की सुनवाई की।

आयोग ने 1 अक्टूबर 2026 को अपना आदेश दिया।

इसके अनुसार, Amazon Seller Services को ग्राहक की सदस्यता राशि वापस करनी होगी।

इसके अलावा, मुआवजा और मुकदमे के खर्च का भुगतान भी करना होगा।

आयोग ने माना कि सक्रिय सदस्यता के दौरान विज्ञापन-मुक्त सुविधा हटाना सेवा में कमी थी।

वहीं, अतिरिक्त रकम मांगने को अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया।

Amazon को कुल कितनी रकम देने का आदेश मिला?

उपभोक्ता आयोग ने अलग-अलग मदों में भुगतान का आदेश दिया।

भुगतान का विवरणराशि
वार्षिक सदस्यता का रिफंड₹1,499
मुआवजा₹5,000
मुकदमे का खर्च₹3,000
कुल भुगतान₹9,499

इसके अलावा, कंपनी को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया।

हालांकि, यह पूरी रकम सरकारी जुर्माना नहीं है।

इसमें ग्राहक को लौटाया जाने वाला पैसा, मुआवजा और मुकदमे का खर्च शामिल है।

क्या Amazon ने उपभोक्ता आयोग में जवाब दिया?

रिपोर्टों के अनुसार, Amazon Seller Services ने आयोग के सामने अपना लिखित जवाब दाखिल नहीं किया।

इसके अलावा, कंपनी की ओर से कोई प्रतिनिधि भी पेश नहीं हुआ।

इसके कारण जवाब दाखिल करने का अधिकार समाप्त कर दिया गया।

वहीं, आयोग ने शिकायतकर्ता के दस्तावेजों और बयान के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ाई।

आयोग ने पाया कि ग्राहक के साक्ष्यों का कंपनी ने खंडन नहीं किया।

इसके बाद उपलब्ध सामग्री के आधार पर आदेश सुनाया गया।

कंज्यूमर कोर्ट ने विज्ञापन दिखाने को गलत क्यों माना?

आयोग ने देखा कि ग्राहक ने एक निश्चित अवधि के लिए सदस्यता खरीदी थी।

उस समय विज्ञापन-मुक्त वीडियो देखने की सुविधा शामिल थी।

हालांकि, उसी अवधि के बीच यह सुविधा बदल दी गई।

इसके अलावा, पुरानी सुविधा जारी रखने के लिए अतिरिक्त शुल्क मांगा गया।

आयोग के अनुसार, कंपनी ने यह साबित नहीं किया कि ग्राहक को खरीदारी के समय ऐसी संभावित शर्त के बारे में बताया गया था।

इसलिए इस विशेष मामले में सेवा की कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया।

क्या Amazon Prime पर विज्ञापन दिखाना गैरकानूनी है?

किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन दिखाना अपने आप गैरकानूनी नहीं है।

दरअसल, कई प्लेटफॉर्म विज्ञापनों के साथ सस्ती सदस्यता प्रदान करते हैं।

इसके अलावा, कुछ कंपनियां विज्ञापन-मुक्त प्लान के लिए अलग शुल्क लेती हैं।

हालांकि, ग्राहकों को सदस्यता की शर्तों की सही जानकारी देना जरूरी है।

इस मामले में विवाद उस सुविधा को बीच में बदलने से जुड़ा था, जिसका ग्राहक पहले ही भुगतान कर चुका था।

इसलिए आयोग का फैसला विशेष अनुबंध और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आया।

क्या सभी Amazon Prime ग्राहकों को ₹9,499 मिलेंगे?

नहीं। यह आदेश एक विशेष उपभोक्ता शिकायत से संबंधित है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी Amazon Prime सदस्यों को स्वतः ₹9,499 दिए जाएंगे।

दरअसल, प्रत्येक ग्राहक की सदस्यता और भुगतान की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।

इसके अलावा, अन्य ग्राहकों की खरीदारी के समय लागू शर्तें भी अलग हो सकती हैं।

यदि किसी उपभोक्ता को सेवा में कमी की शिकायत है, तो वह संबंधित दस्तावेजों के आधार पर शिकायत कर सकता है।

हालांकि, मुआवजे का फैसला संबंधित मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगा।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में सेवा की कमी क्या है?

भारत में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 लागू है।

इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं से जुड़ी शिकायतें की जा सकती हैं।

सेवा की कमी का अर्थ निर्धारित गुणवत्ता या अनुबंधित सेवा प्रदान करने में कमी हो सकता है।

इसके अलावा, अनुचित व्यापार व्यवहार के खिलाफ भी शिकायत की जा सकती है।

वहीं, उपभोक्ता आयोग मामले के तथ्यों और साक्ष्यों की समीक्षा करता है।

इसलिए ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन सेवाएं भी उपभोक्ता अधिकारों से संबंधित विवादों का विषय बन सकती हैं।

ग्राहक ने कितने रुपये का मुआवजा मांगा था?

शिकायतकर्ता ने आयोग से अधिक राशि की मांग की थी।

उन्होंने मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए ₹25,000 का मुआवजा मांगा था।

इसके अलावा, मुकदमे के खर्च के लिए ₹10,000 की मांग की थी।

वहीं, उन्होंने विज्ञापन-मुक्त सेवा बहाल करने या सदस्यता राशि वापस करने का अनुरोध किया।

हालांकि, आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार किया।

अंततः ₹5,000 मुआवजा और ₹3,000 मुकदमे का खर्च निर्धारित किया गया।

Amazon Prime Video की सदस्यता में बदलाव से क्या सवाल उठे?

आज कई डिजिटल सेवाएं वार्षिक और मासिक सदस्यता के माध्यम से उपलब्ध हैं।

इनमें वीडियो स्ट्रीमिंग, संगीत और अन्य ऑनलाइन सेवाएं शामिल हैं।

हालांकि, सदस्यता की सुविधाओं में बदलाव होने पर ग्राहकों की अपेक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं।

इसलिए कंपनियों के लिए स्पष्ट शर्तें और पारदर्शी जानकारी महत्वपूर्ण हैं।

इसके अलावा, ग्राहकों को भुगतान और सेवाओं का रिकॉर्ड रखना चाहिए।

वहीं, किसी बदलाव से नुकसान होने पर शिकायत की व्यवस्था उपलब्ध है।

OTT प्लेटफॉर्म की शिकायत कहां करें?

यदि किसी OTT प्लेटफॉर्म की सेवा में समस्या आती है, तो सबसे पहले उसके कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करें।

इसके अलावा, अपने भुगतान की रसीद और सदस्यता की शर्तें सुरक्षित रखें।

वहीं, शिकायत का लिखित रिकॉर्ड रखना उपयोगी है।

समस्या का समाधान नहीं होने पर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से संपर्क किया जा सकता है।

इसके अलावा, योग्य मामलों में संबंधित उपभोक्ता आयोग के समक्ष शिकायत दाखिल की जा सकती है।

हालांकि, शिकायत की स्वीकार्यता लागू कानून और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?

सबसे पहले, सदस्यता की कीमत और अवधि जांचें।

इसके अलावा, विज्ञापन-मुक्त और विज्ञापन-सहित सेवाओं में अंतर समझें।

वहीं, नवीनीकरण और रद्द करने की शर्तें पढ़ें।

यदि कोई महत्वपूर्ण सुविधा शामिल है, तो उसका विवरण सुरक्षित रखना उपयोगी है।

इसके अलावा, भुगतान की रसीद और कंपनी के ईमेल संभालकर रखें।

इससे भविष्य में विवाद होने पर संबंधित दस्तावेज उपलब्ध रहेंगे।

क्या Amazon कंज्यूमर कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील कर सकता है?

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में जिला आयोग के आदेश के खिलाफ अपील की व्यवस्था है।

संबंधित पक्ष निर्धारित समयसीमा और कानूनी शर्तों के अंतर्गत राज्य आयोग में अपील कर सकता है।

हालांकि, अपील स्वीकार होना या आदेश में बदलाव होना अपने आप निश्चित नहीं है।

इसके अलावा, अपील से संबंधित शुल्क और जमा राशि के नियम लागू हो सकते हैं।

अभी उपलब्ध रिपोर्टों में Amazon द्वारा इस विशेष आदेश के खिलाफ अपील किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए आगे की कानूनी स्थिति आधिकारिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।

Amazon Prime Video विज्ञापन विवाद में आगे क्या होगा?

हैदराबाद उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को भुगतान करने का निर्देश दिया है।

इसके लिए आदेश में 45 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है।

हालांकि, भुगतान पूरा होने या आदेश के खिलाफ अपील की अंतिम स्थिति की पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

वहीं, यह फैसला डिजिटल सदस्यता सेवाओं की शर्तों को लेकर चर्चा का विषय बना है।

इसलिए आगे कंपनी की कानूनी कार्रवाई और आदेश के अनुपालन की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

निष्कर्ष

Amazon Prime Video विज्ञापन विवाद में हैदराबाद उपभोक्ता आयोग ने महत्वपूर्ण निर्णय दिया है।

ग्राहक ने ₹1,499 में एक साल की सदस्यता खरीदी थी।

हालांकि, सदस्यता के दौरान विज्ञापन दिखने लगे और विज्ञापन हटाने के लिए ₹699 अतिरिक्त मांगे गए।

आयोग ने इसे इस मामले में सेवा की कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।

इसके बाद कंपनी को कुल ₹9,499 का भुगतान करने का निर्देश दिया गया।

यह मामला ऑनलाइन सदस्यता सेवाओं में पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों के महत्व को दर्शाता है।

आपकी क्या राय है? क्या कंपनियों को सक्रिय वार्षिक सब्सक्रिप्शन के दौरान पहले से उपलब्ध सुविधाओं में बदलाव करने से पहले ग्राहक की सहमति लेनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

संपादकीय नोट: ₹9,499 में ₹1,499 का रिफंड, ₹5,000 का मुआवजा और ₹3,000 मुकदमे का खर्च शामिल है। यह आदेश एक विशेष उपभोक्ता मामले में दिया गया है।