सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद तुरंत मिले 6 महीने की पेंशन, भारत पेंशनर समाज की बड़ी मांग

  • September 16, 2026
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सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद परिवार को 6 महीने की अंतरिम पेंशन देने की मांग

6 महीने की अंतरिम पेंशन की मांग

केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों के लिए बने संगठन भारत पेंशनर समाज ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मृत्यु के बाद परिवार को मिलने वाली फैमिली पेंशन में होने वाली देरी को कम करने की मांग उठाई है। संगठन ने टेलीकम्युनिकेशन विभाग (DoT) से मांग की है कि किसी कर्मचारी या पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद जब तक नियमित फैमिली पेंशन को लेकर सारी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जातीं, सारे दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक पात्र विधवा या विधुर को कम से कम छह महीने के लिए अंतरिम पारिवारिक पेंशन शुरू की जाए। यानी कि पेंशन से जुड़े कागजात और रेगुलर मंजूरी की प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक छह महीने तक यह सुविधा मिलती रहे।

मांग क्यों उठानी पड़ी?

7 सितंबर 2026 को DoT के कम्युनिकेशन्स अकाउंट्स के कंट्रोलर जनरल को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि इस प्रक्रिया से विधवाओं और विधुरों की तत्काल आर्थिक परेशानी काफी कम हो जाएगी और साथ ही बार-बार की जाने वाली अर्जियों और उसके कारण पेंशन ऑफिस के कर्मचारियों पर पड़ने वाला काम का बोझ भी कम होगा।

DoT के एक प्रतिनिधि के अनुसार, जीवनसाथी को पारिवारिक पेंशन ट्रांसफर करने की राष्ट्रीय औसत प्रोसेसिंग अवधि एक महीने से कम बताई गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर पीड़ित परिवारों को कई महीनों तक भटकना पड़ता है। कई बार सरकारी रिकॉर्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र या जीवनसाथी के आधार/पैन कार्ड में नाम की स्पेलिंग, जन्मतिथि वगैरह मैच करने में दिक्कतें आती हैं। कुछ मामलों में बैंक खातों में ज्वाइंट होल्डर या नॉमिनी की प्रक्रिया अधूरी होती है, जिससे पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) को ट्रांसफर करने में लंबा समय लग जाता है। ऐसे में शोक संतप्त परिवार को विभागों के चक्कर काटना पड़ता है, जो उनके लिए मानसिक और वित्तीय रूप से बेहद कष्टदायी है।

सुप्रीम कोर्ट का क्या है फैसला?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी विधवाओं के हक में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि फैमिली पेंशन सरकारी कृपा नहीं, बल्कि एक मूल्यवान अधिकार है। कोर्ट ने बताया कि यदि इसकी प्रक्रिया में कोई प्रशासनिक देरी होती है, तो पीड़िता को पति की मृत्यु की तारीख से ही पूरे एरियर यानी बकाये का भुगतान ब्याज के साथ किया जाना अनिवार्य है।