समस्तीपुर में नेहा झा के बाद पटना में रिया की गिरफ्तारी
बिहार के समस्तीपुर में शराब तस्करी के आरोप में पकड़ी गई 25 साल की नेहा झा इन दिनों चर्चा में है। मॉडल जैसी दिखने वाली नेहा जिस अंदाज में एसी फर्स्ट क्लास में सफर कर रही थी, उसे देखकर शायद ही किसी को शक हुआ हो कि उसके सूटकेस में ब्रांडेड विदेशी शराब की बोतलें भरी हैं। लेकिन समस्तीपुर स्टेशन पर आरपीएफ और सीआईबी की कार्रवाई ने पूरा राज खोल दिया। जांच आगे बढ़ी तो मामला सिर्फ नेहा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसके परिवार के पुराने शराब कनेक्शन की परतें भी खुलने लगीं। वहीं समस्तीपुर के बाद पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत पटना जंक्शन के पास पुलिस ने एक और युवती को पकड़ा, जिसका नाम रिया बताया जा रहा है, जो दानापुर की रहने वाली है।
दो तस्वीरों ने बढ़ाई बिहार में हलचल
बिहार में हाल में दो तस्वीरों ने सनसनी मचा दी है। समस्तीपुर में एसी फर्स्ट क्लास से शराब ला रही युवती के पकड़े जाने के बाद अब पटना जंक्शन पर भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा को शराब की खेप के साथ दबोचा गया है। इन दोनों घटनाओं के सामने आने के बाद बड़ा सवाल यह है कि क्या यह लड़कियां सचमुच तस्करी में शामिल हैं या सिर्फ बड़े चालबाजों के लिए प्यादा भर हैं।
दरअसल बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए करीब 10 साल हो गए हैं। अब तक राज्य में विभाग ने हरसंभव तरीके से होने वाली तस्करी को रोकने की कोशिश की है। एंबुलेंस से, पुलिस जीप से, नेता-अधिकारी के नेमप्लेट लगी गाड़ियों से शराब बरामद हो चुकी है। ट्रेनों में भी शराब लेकर आने-जाने वाले तस्कर पकड़े गए हैं। लेकिन अभी जो हो रहा है, वो बिल्कुल नया ट्रेंड है।
हाल में गुप्त सूचना के आधार पर समस्तीपुर स्टेशन पर आरपीएफ और सीआईबी की संयुक्त टीम ने स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के एसी फर्स्ट क्लास में छापेमारी की। टीम ने कूपे से समस्तीपुर के सिंघिया थाना क्षेत्र की रहने वाली नेहा झा और उसके जीजा ईशान कुमार के साथ हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान दो सूटकेस से करीब 75 लीटर ब्रांडेड विदेशी शराब बरामद की गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, नेहा के पिता और उसकी बड़ी बहन भी पूर्व में शराब तस्करी के आरोप में जेल जा चुके हैं।
पटना में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही रिया पकड़ी गई
वहीं समस्तीपुर के बाद पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत पटना जंक्शन के पास पुलिस ने एक और युवती को पकड़ा। रिया नाम की आरोपी युवती दानापुर की रहने वाली है और प्रतियोगी परीक्षाओं सहित बिहार पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही है। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए युवती के हैंडबैग और शोल्डर बैग से करीब 14 हजार रुपये मूल्य की अंग्रेजी शराब बरामद की। युवती उत्तर प्रदेश से ट्रेन के जरिए शराब की यह खेप लेकर पटना पहुंची थी। पूछताछ में उसने बताया कि बनारस से पटना शराब पहुंचाने के लिए उसे दो हजार रुपये देने का झांसा दिया गया था।
वहीं मोतिहारी में भी इससे ही जुड़ा शराब तस्करी का अलग तरीका सामने आया था। उत्पाद विभाग की टीम ने एक महिला को लग्जरी कार से शराब ले जाते हुए पकड़ा था। पूछताछ में महिला ने कथित तौर पर बताया कि पुलिस को शक न हो, इसलिए उसके साथ एक पुरुष और एक बच्चे को परिवार की तरह दिखाया गया था। महिला के अनुसार, पुरुष को 1500 रुपये रोज के हिसाब से किराये कर पति और बच्चे को 500 रुपये में साथ लिया गया था। पुलिस ने बताया कि महिला उत्तर प्रदेश से शराब लेकर मुजफ्फरपुर जा रही थी।
तस्करी के तरीकों में आया बदलाव, पुलिस खंगाल रही नेटवर्क
यह दिखाता है कि तस्करी के तरीके कितने विविध हो गए हैं, और पुलिस अब इन पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। पुलिस दोनों मामलों में पकड़ी गई युवतियों के मोबाइल कॉल डिटेल और संपर्कों को खंगाल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि शराब की ये खेप किन-किन स्थानीय सिंडिकेट और ग्राहकों तक पहुंचाई जानी थी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े जाने के डर से बचने के लिए तस्कर गिरोह युवतियों का सहारा ले रहे हैं और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। दरअसल बिहार में शराबबंदी कानून के तहत सबसे ज्यादा जिन लोगों को सजा हुई है, वो शराब कंज्यूम करनेवाले हैं। आंकड़ों के अनुसार अब तक राज्य में कुल छह लाख 40 हजार 379 लोगों को सजा सुनाई गई, इसमें करीब छह लाख 38 हजार मामले सिर्फ शराब पीने के हैं। इसका मतलब इन दस सालों में दो हजार के करीब ही लोगों को शराब तस्करी के मामले में सजा हुई है।
बिहार में शराब तस्करी के मामलों में महिलाओं की संख्या बढ़ी
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार पुलिस को तस्करों को सजा दिला पाने में उतनी सफलता नहीं मिली है, जितनी इससे जुड़े अन्य मामलों में मिली है। हाल में आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भी शराब तस्करी से जुड़े मामलों में महिलाओं की संख्या बढ़ी है। इधर पश्चिम चंपारण में ही बीते चार सालों में 900 के करीब महिलाओं को तस्करी के मामले में पकड़ा गया है।
हालांकि पुलिस-प्रशासन का यही मानना है कि बड़े माफिया महिलाओं को सिर्फ डिलीवरी के वक्त आगे कर रहे हैं। यानि उनसे सिर्फ कैरियर का काम लिया जा रहा है। इन तमाम बातों-विरोधाभासों के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बार फिर स्पष्ट कहा है कि शराबबंदी राज्य की महिलाओं की मांग पर की गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह फैसला बिहार की आधी आबादी की मांग पर लिया था, और यह फैसला आगे भी जारी रहेगा।
नेहा, निशु और रिया के मामलों में जांच जारी
फिलहाल नेहा, उसकी बहन निशु और अब दानापुर की रहने वाली रिया इन सभी मामलों में उनके जेल जाने के बाद यह मामला पुलिस की जांच के दायरे में है। इन घटनाओं के सामने आने के बाद एक तरफ पुलिस कथित शराब तस्करी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इन युवतियों का इस्तेमाल बड़े तस्करी नेटवर्क के लिए केवल डिलीवरी या कैरियर के तौर पर किया जा रहा था। जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन मामलों में इनके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं और शराब की खेप किन लोगों तक पहुंचाई जानी थी।


