सर्दियों में पाचन दुरुस्त रखेंगे चार आसान योगासन, दूर होगी अपच-कब्ज और गैस की समस्या

  • October 12, 2026
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सर्दियों में अपच, कब्ज और गैस की समस्या से राहत के लिए वज्रासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, पवनमुक्तासन और मार्जरी आसन की जानकारी

सर्दियों में अपच, कब्ज और गैस की समस्या क्यों बढ़ती है?

सर्दियों में ठंडी हवा, कम पानी पीने और भारी खाने की आदत के कारण अपच, कब्ज और वात संबंधी समस्याएं आम हो जाती हैं। इससे पेट फूलना, गैस और असहजता जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं। ऐसी समस्याओं से राहत पाने के लिए योग को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय पाचन तंत्र को मजबूत रखने के लिए सरल योगासनों को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देता है। ये आसन घर पर किए जा सकते हैं। नियमित अभ्यास से शरीर को सक्रिय रखने और पाचन संबंधी परेशानी को संभालने में मदद मिल सकती है। हालांकि, योग का अभ्यास अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करना चाहिए। यदि पेट में लगातार दर्द, गंभीर कब्ज या अन्य परेशानी हो, तो केवल योग पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

वज्रासन उन योगासनों में शामिल है, जिन्हें भोजन के बाद किया जा सकता है। इसके लिए घुटनों के बल बैठें, एड़ियों को नितंबों के नीचे रखें और हाथों को घुटनों पर टिकाएं। इस मुद्रा में पीठ को सीधा रखते हुए आराम से बैठें। वज्रासन को पाचन से जुड़ी दिनचर्या में शामिल किया जाता है। हालांकि, घुटनों या टखनों में दर्द की समस्या वाले लोगों को इसे करने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में जबरदस्ती मुद्रा में बैठने के बजाय प्रशिक्षक या डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन: रीढ़ को लचीला रखने में मदद

अर्ध मत्स्येन्द्रासन बैठकर किया जाने वाला योगासन है। इसे करते समय रीढ़ को धीरे-धीरे एक तरफ घुमाया जाता है। इसके लिए एक पैर मोड़कर दूसरे पैर के ऊपर रखा जाता है और शरीर को विपरीत दिशा में घुमाया जाता है। इस आसन से रीढ़ की लचक बनाए रखने और पेट के आसपास के अंगों को सक्रिय करने में मदद मिल सकती है। खबर में इसे गैस, कब्ज और अपच की समस्या में लाभकारी बताए जाने वाले आसनों में शामिल किया गया है। अभ्यास करते समय शरीर पर ज्यादा जोर नहीं देना चाहिए। पीठ या रीढ़ से जुड़ी समस्या होने पर विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

पवनमुक्तासन करने के लिए पीठ के बल लेटें। दोनों घुटनों को मोड़कर छाती की ओर लाएं और हाथों से उन्हें धीरे से पकड़ें। इसके बाद आराम से सांस लेते और छोड़ते हुए मुद्रा बनाए रखें। शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए। यह आसन पेट के आसपास हल्का दबाव पैदा करता है और गैस से जुड़ी असहजता में कुछ लोगों को राहत का अनुभव हो सकता है। कब्ज या पेट फूलने की समस्या में इसे सावधानी से किया जा सकता है। यदि इसे करने से दर्द या असहजता बढ़े, तो अभ्यास रोक देना चाहिए।

मार्जरी आसन: पाचन के लिए आसान अभ्यास

मार्जरी आसन को कैट-काउ पोज भी कहा जाता है। इसे करने के लिए हाथों और घुटनों के बल चौपाए जैसी मुद्रा में आएं। सांस लेते हुए पीठ को ऊपर उठाएं और फिर सांस छोड़ते हुए पीठ को धीरे-धीरे नीचे की ओर झुकाएं। इस दौरान गर्दन और रीढ़ को आराम से चलाएं। यह अभ्यास पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करने और रीढ़ की गतिशीलता बनाए रखने में मदद कर सकता है। योगासनों का नियमित अभ्यास शरीर को सक्रिय रखने और पाचन से जुड़ी दिनचर्या को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। इस तरह पाचन के लिए योगासन के रूप में वज्रासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, पवनमुक्तासन और मार्जरी आसन को अपनी क्षमता के अनुसार अपनाया जा सकता है। शुरुआत में योग प्रशिक्षक की देखरेख में अभ्यास करना बेहतर है। किसी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।